सरलता, सादगी व संयम के त्रिवेणी संगम थे जैनाचार्य शुभचंद्रजी

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में वीवीपुरम स्थित जय परिसर महावीर धर्मशाला में जयधुरंधरमुनिजी के सान्निध्य में जयमल सम्प्रदाय के ग्यारहवें आचार्यश्री शुभचन्द्रजी की स्मृति में गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया। मुनिश्री जयधुरंधरजी ने कहा कि कि आचार्यश्री शुभचन्द्रजी, सर्वसम्प्रदाय समुदाय के लोगों के बीच श्रद्धा एवं अनन्य आस्था के केन्द्र थे। उनका जीवन सरलता, सादगी व संयम का त्रिवेणी संगम था। आचार्यश्री का आचरण, चिन्तन, मनन, वाणी व्यवहार उनके नाम के अनुसार शुभमय था। वे हर पल स्वाध्याय एवं अनुप्रेक्षा में रत रहते हुए शुभ भावों में रमण करते थे।

मात्र 17 वर्ष की आयु में संयम अंगीकार कर 63 वर्ष तक दीर्घ संयम साधना का पालन करते हुए जिनशासन की महती प्रभावना की। 31 वर्ष तक आचार्य पद पर रहते हुए जयमल संघ का कुशल नेतृत्व करते हुए संघ को नयी ऊंचाइयां प्रदान कीं। जयधुरंधरमुनिजी ने कहा कि आचार्यश्री शुभचन्द्रजी भले ही एक सम्प्रदाय के आचार्य थे परन्तु सम्पूर्ण जैन समाज में अग्रण्य स्थान रखते हुए अपनी उदारता, स्नेह, वात्सल्य, नम्रता,सहजता से सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे।

उनके व्यक्तित्व में ऐसा चुम्बकीय आकर्षण था कि जो व्यक्ति एक बार उनके सान्निध्य प्राप्त कर लेता था वह हमेशा के लिए उनका भक्त बन जाता था। आचार्यश्री हजारों—लाखों भक्तों के लिए भगवान तुल्य माने जाते थे। उनके मुख मंडल पर अलौकिक आभा, तेजस्विता, सौम्यता, प्रसन्नता, हमेशा झलकती रहती थी। आचार्य शुभचन्द्रजी गुणों के महासागर थे।

मुनिश्री ने कहा कि आचार्य शुभचन्द्रजी अपनी समन्वय प्रेमिता के कारण ही सभी सम्प्रदायों के आचार्यों व वरिष्ठ संतों से मिलने की अभिलाषा रखते थे। जोधपुर में 13 वर्ष के स्थिरवास में उन्होंने आचार्यश्री महाश्रमण, लोकमान्य संत रुपमुनि, रत्नवंशीय आचार्य हीराचन्दजी, ज्ञानगच्छाधिपति प्रकाशचन्दजी, दिगम्बर संतों से मुलाकात की जो सौहार्दता का ज्वलंत उदाहरण है। आचार्यश्री आधि व्याधि में भी समाधि में रहने वाले संत थे। कुटील कांटों की गोद में भी उनकी साधना का गुलाब हमेशा मुस्कराता रहता था।

मुनिश्री ने कहा कि आचार्यश्री ने देहावसान से जिनशासन को अपूर्णनीय क्षति हुई है। उन्होंने संथारा सहित समाधि मरण का वरण कर मृत्यु को महोत्सव बना दिया। आचार्यश्री के गुणों को स्मरण करते हुए जयमल जैन महिला मंडल, बहु मंडल व विमल जांग़डा ने श्रद्धागीत प्रस्तुत किया। सभा में जैन कॉन्फ्रेंस के विश्वस्थ मंडल के चेयरमैन केसरीमल बुरड़, प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश छल्लाणी, मरुधर केसरी जैन गुरु सेवा समिति के अध्यक्ष उत्तमचन्द रातड़िया, रत्नहितैषी श्रावक संघ के अध्यक्ष पदमराज मेहता,साधुमार्गी जैन संघ के पूर्व अध्यक्ष शांतिलाल सांड, अध्यक्ष जयसिंग बिलवाि़डया, विजयनगर संघ के मंत्री शांतिलाल लोढा, हनुमंतनगर संघ के उत्तम बोहरा, सज्जनराज रुणवाल, रोशन बाफना, जैन युवा संगठन के अध्यक्ष भरत रांका, मुनिरेड्डीपाल्या संघ के अध्यक्ष मांगीलाल जांग़डा, नेमीचन्द कामदार आदि उपस्थित थे।

वरिष्ठ पत्रकार गौतमचन्द ओस्तवाल, चेतनप्रकाश डूंगरवाल, ज्ञान प्रकाशयोजना के मंत्री अशोक धोका, जेपीपी अहिंसा रिसर्च फाउंडेशन के राष्ट्रीय महामंत्री महावीर चोरड़िया (जेके), हीराबाग के जब्बरचन्द कांकरिया, जयमल युवक परिषद के गौतमचन्द श्रीश्रीमाल, सुरेन्द्र बेतालाल, संगीता धोका, नेहा बोहरा, प्रेमा गादिया आदि ने आचार्यश्री के प्रति श्रद्धांजलि भाव व्यक्त किए।

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