कारकल। नारलूर के कारकल की ओर विहार के पूर्व उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए पुष्पगिरि तीर्थ के प्रणेता आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी ने गुरुवार को अपने प्रवचन में कहा कि मां से संस्कार मिलते हैं और देश से संस्कृति मिलती है। उन्होंने कहा कि पुरुष की अपेक्षा एक नारी में करुणा ज्यादा होती है। पुष्पदंतजी ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों को बचाने के लिए मां सरस्वती की आराधना करनी होगी, उन्हीं से विेवेक और सद्बुद्धि की प्राप्ति हो सकती है। उन्होंने कहा कि विवेक और सद्बुद्धि के आते ही संस्कार व संस्कृति की सुरक्षा का भाव स्वतः ही पैदा हो जाएगा। आचार्यश्री ने कहा कि पिता का उपकार जन्म के कुछ वर्षों के बाद, भाइयों व मित्रांेे का उपकार समझदार अथवा ब़डे होने पर, गुरु का उपकार जब प़ढना शुरु करते हैं तब शुरु होता है, लेकिन मां का उपकार गर्भ से ही शुरु हो जाता है, जो कि जीवन के अंत समय तक रहता है। उन्होंने कहा कि मां में करुणा व धर्म का बहुमूल्य है। विहार के पूर्व धर्मस्थला के धर्माधिकारी वीरेन्द्र हेग़डे ने परिवार सहित आचार्यश्री को विहार के लिए विदाई दी।

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