चित्रदुर्गा। संतश्री चन्द्रप्रभसागरजी महाराज ने कहा कि वेलेंटाइन डे रिश्तों में मिठास घोलने और टूटे रिश्तों को साधने का दिन है। रिश्तों को बनाना आसान है, पर उन्हें मीठा-मधुर बनाकर रखना मुश्किल है। रिश्तों को बनाना तो ठीक वैसे ही है जैसे मिट्टी पर मिट्टी से मिट्टी लिखना, पर उन्हें निभाना पानी पर पानी से पानी लिखने जैसा है। उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते रोटी जैसे न हो कि थो़डी-सी आँच क्या लगी कि वह काली प़ड गई, रिश्ते तो मछली और सरोवर जैसे होने चाहिए कि जब तक जीएँगे तब तक साथ-साथ रहेंगे। जो घर को सदा जो़डकर रखे समझना वह बुद्धिमान और बुद्धिनिधान है। लक्ष्मी की पूजा करने से पता नहीं लक्ष्मीजी कितने प्रतिशत आएँगे, पर घर की बहुएँ महालक्ष्मी बन जाए तो घर में सदा लक्ष्मीजी का बसेरा हो जाएगा। संतश्री बुधवार को गुईलाल ग्राम के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के पास आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वेलेंटाइन-डे आपस में जु़डने और जो़डने का त्यौहार है। अगर हमारे रिश्तों में दरार आ गई है, अगर हमारी किसी से बोलचाल नहीं है तो हम उन्हें फोन लगाएँ और कहें कि आई एम सॉरी। बस आपका इतना-सा ब़डप्पन इस दिन को धन्य कर देगा और दूरियाँ हमेशा के लिए जीवन से दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस डे पर नारी-जाति की आन, बान और शान की रक्षा करने का संकल्प लें। संतश्री ने कहा कि वेलेन्टाइन-डे केवल प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी वरन भाई-बहन, सास-बहू, देवरानी-जेठानी, भाई-भाई, देवर-भाभी भी बनाएँ और इस डे के बहाने किसी से किसी भी तरह का मनमुटाव हो तो मन की गाँठें खोल लें। मन की गाँठें खोलने से ब़डा कोई धर्म नहीं है अन्यथा ये गाँठें हमारी जन्म-जन्मांतर तक पीछा करती रहेंगी। कार्यक्रम में कुटूर, चित्रदुर्गा, हिरीयूर जैन संघ के अनेक सदस्य उपस्थित थे।

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