बेंगलूरु/दक्षिण भारतशहर के यशवंतपुर से विहार कर राजाजीनगर पहंुचीं साध्वीश्री कुमुदलताजी व साध्वी श्री महाप्रज्ञा जी म.सा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु परमात्मा ने अपनी अमृतमय वाणी में चार ची़जों का महत्व बताया है। सर्वप्रथम मानव जीवन, धर्म के प्रति श्रद्धा, धर्म वाणी का श्रवण व संयमी जीवन। यह मानव जन्म दुर्लभ है। देवता भी मनुष्य जीवन के लिए तरसते हैं। मानव जीवन के साथ-साथ आर्य कुल व आर्य धर्म मिलना भी बेहद ़जरूरी है। हम ब़डे ही सौभाग्यशाली हैं जो हमें जैन धर्म मिला है। यह उत्तम मनुष्य जन्म, जैन धर्म मिलने पर हमें जीवन में कुछ अच्छे कार्य करना चाहिए। व्यक्ति के जीवन में धन नहीं, धर्म मुख्य होता है। हमें यह मनुष्य जन्म भविष्य को सुधारने के लिए बनाना है। हम इस जीवन में उत्तम धर्म आराधना कर के आगामी जीवन को सुखद बनाने का प्रयास करेंगे, तभी यह मानव जीवन सार्थक होगा। साध्वीश्री ने कहा कि आवश्यकता है इस मानव जीवन को पाकर हम अपने जीवन का उत्थान व धर्म के गौरव को ब़ढाने का कार्य करें। इस मौके पर राजाजीनगर, यशवंतपुर और आसपास के अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।

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