दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कचेन्नई। जैन संघ नार्थ टाउन, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा चेन्नई एवं अणुव्रत समिति चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में होली चातुर्मास और ६९वें अणुव्रत स्थापना दिवस का कार्यक्रम नार्थ टाउन, पेरंबूर में आयोजित किया गया। साध्वीश्री काव्यलताजी के सान्निध्य में ‘अणुव्रत रैली‘ निकाली गई। अणुव्रत उद्घोषों के साथ निकली रैली प्रवचन पण्डाल पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गई, जहां मूर्तिपूजक संघ से मुनिश्री गुणहंसविजय जी म.सा., श्रमण संघीय श्री ज्ञानमुनि जी म.सा., साध्वीश्री काव्यलता जी के सान्निध्य में अणुव्रत स्थापना दिवस एवं होली चतुर्मास का कार्यक्रम आयोजित हुआ। तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। साध्वीश्री सुरभियशाजी एवं साध्वीश्री वैभवयशाजी ने अणुव्रत संबंधित गीत का गान किया। मुनिश्री गुणहंसविजयजी ने होली के पर्व पर ब़डे ही मार्मिक ढंग से अपने कषायों को जलाने और क्षमा की आराधना करने की प्रेरणा प्रदान की। साध्वीश्री काव्यलताजी ने कहा कि भारत की संस्कृति त्याग प्रधान संस्कृति है। भगवान महावीर की परम्परा को सही दृष्टिकोण से समझें। होली का दूसरा नाम कषाय मुक्त होना है। अणुव्रत आंदोलन प्रवर्तक गणाधिपति गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी ने आज के दिन अणुव्रत आंदोलन की स्थापना की। यह आंदोलन सम्प्रदायातीत है। आपने नीति को पयोलो कथानक से प्रेरणा प्रदान की। श्री ज्ञानमुनिजी ने कहा कि हर पर्व हमारे लिए आनन्द लाने वाला होता है। अध्यात्म की दृष्टि से अपने आप को देखना चाहिए। हमने आचार्यश्री तुलसी का प्रवचन सुना है। मैंने आचार्यश्री तुलसी कि जीवनी ‘मेरा जीवन मेरा दर्शन‘ के प्रथम भाग से तेरहवें भाग तक के एक-एक पृष्ठ को पढा है। भारत में एक नई अलख जगाई थी-आचार्य श्री तुलसी एवं आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने। आपने होलिका के कथानक से प्रेरणा प्रदान की।तेरापंथी सभा के मंत्री विमल चिप्पड ने अणुव्रत स्थापना दिवस पर अपनी भावना व्यक्त की। इस मौके पर जैन महासंघ के अध्यक्ष, मूर्तिपूजक संघ के पदाधिकारी सहित सभा, परिषद, महिला मंडल एवं समिति की ओर से अनेक पदाधिकारी मौजूद थे।

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