हैदराबाद। यहां सिकंदराबाद के कृष्णानगर स्थित श्री मंत्रेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर मंे विराजित पंन्यासश्री अरुणविजयजी ने बुधवार को खान-पान मंे जागृति लाने सहित अनेक विषयों पर अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि खाने-पीने के विषय में हमें अपना धर्म और अपनी संस्कृति का आचरण-पालन अवश्य करना चाहिए। वे बोले कि गुणवत्ता के स्तर मंे आज बहुत ज्यादा गिरावट आ चुकी है। मिलावट के कारण गुणवत्ता के गिरते स्तर से लाखों बच्चे देश में कुपोषण के शिकार होकर मौत के मुंह में जा रहे हैं। पंन्यासजी ने कहा कि १९४७ के दौर में जब भारत देश में ३५ करो़ड के करीब जनसंख्या थी, उस समय देश में पशु-प्राणियों की आबादी दसगुनी ज्यादा थी। लेकिन आजादी के ७० वर्षों के बाद जब देश की जनसंख्या सौ करो़ड की वृद्धि के साथ आज करीब १३५ करो़ड हो चुकी है ऐसे में मानवी संख्या के अनुपात की तुलना में पशु-प्राणियों की संख्या एक चौथाई भी नहीं रह गई है। अरुणविजयजी ने चिंतित लहजे में कहा कि अंग्रेजों की गुलामी के समय में भी भारत में जितने कत्लखाने (बूच़डखाने) नहीं थे, उससे दस गुना ज्यादा आज आजाद भारत देश में ७० वर्षों में ब़ढ गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में आज हजारों बच्चे प्रतिदिन पैदा हो रहे हैं, उन्हें पीने के लिए पर्याप्त दूध नहीं मिल रहा है। पंन्यासजी ने कहा कि दूध की खपत कम नहीं हुई है बल्कि प्रतिवर्ष ब़ढी ही है, लेकिन दूध का उत्पादन दिनोंदिन घटता जा रहा है, क्योंकि दूध देने वाले प्राणियों की संख्या कत्ल के कारण घटती जा रही है। वहीं मांस का निर्यात ब़ढता जा रहा है। जैन समाज के नाम अपनी मार्मिक अपील भरे वक्तव्य में पंन्यासजी ने कहा कि देवद्रव्य की राशि को समाज के उत्कर्ष मंे कम ब्याज पर जरुरतमंद लोगों को देकर समाजोत्थान में अपनी भागीदारी निभाएं।

LEAVE A REPLY