मैसूरु। यहां शालिग्राम क्षेत्र मंे विराजित पुष्पगिरि तीर्थ के प्रणेता, दिगंबर संत आचार्यश्री पुष्पदंतसागरजी ने बुधवार को कहा कि सज्जनता ही अच्छे शासक की पहचान होती है। सद्गुणों को देखकर उसके मन में आदर-सम्मान का भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि प्राणी मात्र के प्रति प्रेम रखने वाला अपने हृदय में सभी को स्थान देता है। प्रजा का हित चाहने वाला व प्रेम करने वाला सभी के प्रति उदार भाव रखता है। वह शत्रु के प्रति भी मन में गलत भाव नहीं रखता है। आचार्यश्री ने कहा कि हृदय में देशप्रेम का भाव आने पर शत्रु को परास्त करने का भाव कभी भी मन में जीवित नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा कि जनता के हित की उपेक्षा करने वाला भी जनता की उपेक्षा का कारण बन जाता है। पुष्पदंतजी ने यह भी कहा कि नियम कानून सभी के लिए एक समान होने चाहिए, अलग-अलग नहीं। यही शासक का कर्त्तव्य और धर्म है।

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