विजयवा़डा/दक्षिण भारतयहां के कोविल अपार्टमेंट में श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय की प्रतिष्ठा हेतु चढावों की जाजम कार्यक्रम आचार्य जगच्चंद्रसूरीजी व मुनिश्री संयमरत्नविजयजी, मुनिश्री भुवनरत्नविजयजी आदि साधु साध्वियांे के सान्निध्य में हुआ। आचार्य श्री ने मंगलाचरण करके आशीर्वाद प्रदान किया। मुनिश्री संयमरत्न विजयजी के सान्निध्य में च़ढावे बोले गए। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि बिना पुण्य के कोई भी अपनी लक्ष्मी का सदुपयोग नहीं कर सकता। पुण्य की लक्ष्मी ही पवित्र कार्यों में लगती है। जाजम के तीन अक्षर हमें एक आध्यात्मिक संदेश प्रदान करते हैं। जा से जाई, ज से जरा और म से मरण अर्थात् जाई-जरा व मरण के चक्र को समाप्त करने का संदेश हमें जाजम देती है। मुनिश्री ने कहा कि अपनी लक्ष्मी का सदुपयोग करने से वह चार गुना होकर हमारे पास लौटकर आती है। प्रभु की भक्ति करते करते भक्त भी भगवान के समान बन जाता है। इस अवसर पर मुनिद्वय के सांसारिक माता-पिता का सम्मान कोविल श्रीसंघ द्वारा किया गया।

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