चेन्नई/दक्षिण भारतयहां ट्रिप्लीकेन स्थित जैन श्वेताम्बर तेरापंथ ट्रस्ट भवन में चेन्नई सभा के तत्वावधान में आचार्यश्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनिश्री धर्मरुचिजी, मुनिश्री जंबु कुमारजी एवं मुनिश्री ज्ञानेन्द्र कुमारजी का ‘आध्यात्मिक मिलन‘ समारोह का आयोजन हुआ। नमस्कार महामंत्र के पश्चात ट्रिप्लीकेन की महिला सदस्याओं द्वारा महावीर अष्टकम के संगान से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। आगंतुकों का स्वागत ट्रिप्लीकेन भवन के ट्रस्टी सुरेश बोहरा एवं मंजु गेलडा ने किया।मुनिश्री धर्मरुचिजी ने इस मौके पर कहा कि दुनिया में प्राय: दो बातें देखने को मिलती है प्रदर्शन एवं दर्शन। प्रदर्शन तो बहुत होता है किन्तु हमें दर्शन के महत्व को समझना है। आपने दर्शनार्थ पधारे सभी संतगणों की विशिष्ट बातों का जिक्र कर प्रसन्नता के भाव व्यक्त किए। मुनिश्री ज्ञानेन्द्र कुमार ने कहा कि तेरापंथ की एक नीति-एक रीति- एक परम्परा है और ऐसी परम्परा जैन धर्म कि किसी सम्प्रदाय में नहीं है। तेरापंथ धर्मसंघ के साधु संत कहीं निकट में प्रवासित है और कहीं जाना है तो हम उनसे मिले बिना नहीं जा सकते। ऐसा सौहार्द हमें अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलता। इस अवसर पर आपने मुनिश्री मधुकरजी, मुनिश्री जयचंदलालजी एवं अन्य विशिष्ट संतों की विशेषताओं का उल्लेख किया। मुनिश्री सुबोध कुमारजी ने अपनी मातृभूमि पर सभी मुनिवृन्दों के साथ चेन्नई के अन्य दो संतों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया। आपने तमिल भाषा में श्रावक समाज को अपने दायित्व निर्वाहन की प्रेरणा दी। मुनिश्री सुधाकर जी ने फरमाया कि आग, दाग एवं संताप का नाश करने वाला इस दुनिया में एक ही व्यक्तित्व है, वह है – ‘आचार्य श्री महाश्रमण‘। मुनिश्री दीपकुमारजी एवं मुनिश्री विमलेश कुमारजी ने भी अपनी भावना व्यक्त की। आचार्य श्री महाश्रमण चतुर्मास व्यवस्था समिति अध्यक्ष धरमचंद लुंक़ड, सभा मंत्री विमल चिप्पड, तेयुप मंत्री गजेन्द्र खांटेड, ट्रिप्लीकेन ट्रस्ट की ओर से गौतम सेठिया एवं महिला मंडल अध्यक्ष कमला गेलडा ने सभी चारित्रात्माओं का स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री जंबु कुमारजी ने किया।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY