दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्ककृष्णगिरि। कृष्णगिरि शक्ति पीठाधिपति, तीर्थ संस्थापक एवं मार्ग दर्शक राष्टसंत यतिवर्य डॉ.वसन्तविजय जी म.सा. की निश्रा में विश्वप्रसिद्ध तीर्थ धाम में दुनिया के पहले और एकमात्र नवनिर्मित वृहद ३६५ फीट ऊंचे श्री पार्श्व महाचैत्यालये की ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा होगी, इसी क्रम में विश्व शांति कल्याण के लिए एक विश्वशांति रथ यात्रा का आगाज रविवार को किया गया। धाम के पीठाधिपति विद्यासागर राष्ट्रसंत यतिवर्य डॉ.वसंतविजयजी की प्रेरणा से ही उनके ४९वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में हो रहे इस आयोजन में आचार्यश्री चंद्रजीतसूरीश्वरजी, श्रमणसंघीय संतश्री पंकजमुनिजी व साध्वीश्री आत्मदर्शनाश्रीजी की निश्रा में देशभर से अनेक धर्मों के शंकराचार्य, संत मंडलेश्वर, आचार्यवृंद, जैनाचार्य व साधु-साध्वियों की पावन उपस्थिति में शांति शोभायात्रा निकाली गई। कृष्णगिरि शहर से प्रारंभ हुए करीब २ किलोमीटर लम्बे इस वरघो़डे को पूरे शहर के विभिन्न स्थानों मार्गों से निकाला गया जिसमें कृष्णगिरि धाम के समस्त मानद सदस्यों सहित देश भर से आये भक्तगण मौजूद थे। तीन घंटे से अधिक चली इस शोभायात्रा का नगर की विभिन्न संस्थाओं, राजनीतिक दलों सहित अन्य धर्मावलंबियों ने भावभीना स्वागत किया। इस वरघो़डे (जुलूस) की शुरुआत गुरुदेव के निवास स्थान से हुई जिसमें सबसे आगे धर्म ध्वजा लिए नवयुवक चल रहे थे, उनके पीछे नारी शक्ति को प्रदर्शित करती हुई नवयुवतियां बाइक पर ध्वजा लेकर चल रही थीं। केरल बैंड पर सुमधुर भजनों की स्वर लहरियों ने पूरे नगर में धर्ममय माहौल बना हुआ था। शोभायात्रा में हाथी पर लाभार्थी परिवार प्रभु परमात्मा को हाथों में लेकर विराजमान था तथा चंवर डोला रहा था। रजत रथ के पीछे घो़डांे के करतब आमजनता को आकर्षित कर रहे थे। जैन नवयुवक मंडल मुम्बई के कलाकारों द्वारा बैंड पर शानदार प्रस्तुति दी जा रही थी। उनके पीछे आचार्य, साधु साध्वियों के साथ विशाल जनसमुदाय जय जयकार करता चल रहा था। बेंगलूरु की महिला मण्डल सदस्याओं द्वारा हाथों में नारी शक्ति को प्रदर्शित करने वाली तख्तियों से संदेश दिया जा रहा था, वहीं कई महिलाओं ने लाल चुनरी पहनकर सिर पर कलश धारण किया हुआ था। महिलाओं द्वारा मंगल गीत गाए जा रहे थे। तमिल ढोल व नासिक ढोल की थाप पर युवा नृत्य करते चल रहे थे। शोभायात्रा में विभिन्न रथों में मठाधीश एवं महामंडलेश्वर गणों की पावन उपस्थिति रही। इस वरघो़डे के प्रति भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह था और उमंग, उत्सुकता व श्रद्धा भी भरपूर देखी गई। इस वरघो़डे के सफल संचालन में स्थानीय पुलिस व ट्रैफिक के करीब १५० से ज्यादा जवान मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि पवित्र रथ के साथ यह यात्रा भारत के ११ प्रदेशों के करीब २८० से अधिक शहरों-कस्बों में जाएगी। इसमें ५१इंच के साधना सिद्ध प्रभु पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजित रहेगी। साथ ही एक विशाल ७फीट ऊंचे कलश में १०८ पार्श्वनाथ भगवान के पूजित वासक्षेप, १२० पूजित सिद्ध तीर्थ भूमियों और गच्छाधिपति, आचार्यवृंदों, संतों के वासक्षेप से भरे दिव्य घट के दर्शन होंगे।दोपहर में कृष्णगिरि धाम पर सर्व धर्म सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें समस्त जैन संतांे के साथ ही अनेक महामंडलेश्वर संतों सहित विभिन्न मठों के मठाधीश उपस्थित रहे जिसमंे सर्व धर्म एकता पर सभी ने अपने विचार व्यक्त किए। शाम को मुख्य मन्दिर प्रांगण में भजन संध्या आयोजित की गई जिसमें राजस्थान से आये संगीतकार दीपक करणपुरिया व उनकी टीम ने विभिन्न भजनों गीतों के माध्यम से उपस्थित जनसमुदाय को भक्ति रस से सराबोर कर दिया,देर रात तक चली भजन संध्या में अनेक श्रद्धालुओं की ब़डी उपस्थिति रही।

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