नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरक्षा के लिए सतर्क रहने और नियमों के पालन को जरूरी बताते हुए रविवार को कहा कि इनके अनुपालन से हम न सिर्फ खुद के जीवन को सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि समाज को भी ब़डी दुर्घटनाओं से बचा सकते हैं। मोदी ने रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ’’मन की बात’’ के ४१वें संस्करण में कहा कि चार मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाएगा। दैनिक जीवन में सुरक्षा को लेकर सतर्कता आवश्यक है। इससे न सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं के समय जीवन को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी बल्कि दुर्घटनाओं से भी बचा जा सकता है।मोदी ने कहा, दैनिक जीवन में सुरक्षा को लेकर अगर हम जागरुक नहीं होते हैं तो फिर आपदा के दौरान इसे पाना मुश्किल हो जाता है। निजी सुरक्षा को लेकर लोगों से नियमों का पालन करने का आग्रह करते हुए मोदी ने कहा कि दैनिक जीवन में यदि हम स़डकों के किनारे सुरक्षा को लेकर लिखे गए वाक्यों का अनुसरण भी करें तो भी जीवन को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा स़डकों पर सुरक्षित सफर के लिए ‘सतर्कता हटी-दुर्घटना घटी, एक भूल करे नुकसान, छीने खुशियां और मुस्कान, इतनी जल्दी न दुनिया छो़डो, सुरक्षा से अब नाता जो़डो, सुरक्षा से न करो कोई मस्ती, वर्ना िं़जदगी होगी सस्ती‘ जैसे कई उपयोगी वाक्य लिखे होते हैं। उन्होंने कहा, इन वाक्यों का हमारे जीवन में कभी-कभी कोई उपयोग ही नहीं होता है। प्राकृतिक आपदाओं को अगर छो़ड दें तो ़ज्यादातर दुर्घटनाएं, हमारी कोई न कोई गलती का परिणाम होती हैं। अगर हम सतर्क रहें, आवश्यक नियमों का पालन करें तो हम अपने जीवन की रक्षा तो कर ही सकते हैं, लेकिन, बहुत ब़डी दुर्घटनाओं से भी हम समाज को बचा सकते हैं। कभी-कभी हमने देखा है कि कार्य क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बहुत सूत्र लिखे होते हैं लेकिन जब देखते हैं तो कहीं उसका पालन ऩजर नहीं आता है।मोदी ने निजी जीवन में लोगों को सतर्क रहने के साथ ही नगर पालिकाओं और महानगर पालिकाओं से आग्रह किया है कि वे आग से बचने के उपाय के बारे में सप्ताह में या महीने में एक बार अलग-अलग स्कूलों में जाएं और अग्निशमन दस्ते के जरिये मॉक ड्रिल कर बच्चों को आग से बचाव के उपाय समझाएं। इससे बच्चों में सतर्क रहने की आदत विकसित होगी और नई पी़ढी को इसकी शिक्षा भी मिलेगी। इसमें अतिरिक्त खर्च भी नहीं आएगा और यह एक प्रकार से शिक्षा का ही हिस्सा बनेगा। आपदाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने कई प्राक्रतिक और मानव-निर्मित आपदाओं को झेला है और आज राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) आपदा-प्रबंधन की अगुवाई कर रहा है। भूकंप, बा़ढ, चक्रवात , तथा भूस्खलन जैसी आपदाओं में एनडीएमए तुरंत पहुंचता है और राहत तथा बचाव कार्य शुरू कर देता है। इन आपदाओं से निपटने के लिए स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण करके ’’आपदा मित्र’’ नाम की पहल की गई है।

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