नई दिल्ली। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक दशक से अधिक समय की जांच के बाद भी भारतीय नौसेना के पूर्व कैप्टन कश्यप कुमार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। कुमार को सरकार ने वर्ष २००५ में कुख्यात नौसेना वाररूम लीक मामले में कथित रूप से संलिप्त होने के आरोप में बर्खास्त कर दिया था। सीबीआई ने एक विशेष अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय में बीते वर्ष के अंत में अपनी रिपोर्ट सौंपी और कहा, याचिकाकर्ता कश्यप कुमार के संबंध में जांच पूरी हो चुकी है और सीबीआई ने उनके खिलाफ मामला बंद करने का फैसला किया है। सीबीआई जांच पर स्थिति रिपोर्ट अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज करने की ५८ साल के कैप्टन की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका पर सौंपी गई। कुमार की याचिका निपटाते हुए न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने अपने एक पेज के आदेश में कहा था कि संबंधित दस्तावेजों को देखते हुए सीबीआई ने कहा है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला सीबीआई द्वारा बंद किया गया है। नौसेना युद्ध वाररूम लीक कांड में नाम आने के बाद कोर्ट मार्शल के बिना कश्यप कुमार को अक्टूबर २००५ में संविधान की धारा ३११ के तहत राष्ट्रपति के प्रसाद के सिद्धांत के दुर्लभ प्रयोग के तहत सेवा से बर्खास्त किया गया था। उन्होंने नवंबर २००५ में रिट याचिका दायर करके इस फैसले को चुनौती दी थी। सीबीआई द्वारा जांच का जिम्मा संभालने के पश्चात प्राथमिकी में उन्हें नामजद किया गया था लेकिन एजेंसी ने सबूतों के अभाव में उनका नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं किया था। सीबीआई ने वर्ष २००६ में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश के एक रिश्तेदार रवि शंकरन और दिल्ली के कारोबारी अभिषेक वर्मा सहित छह लोगों को आरोपपत्र में नामजद किया था। जांच के दौरान, सीबीआई ने सभी फाइलों की जांच की और लीक मामले में कश्यप कुमार की भूमिका के संबंध में कुछ नौसेना अधिकारियों से सवाल किए लेकिन उन्हें उनकी संलिप्तता को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं मिले। उन्हें सामान्य जवाब मिला कि कुमार को भारतीय नौसेना अधिनियम की धारा १५ के तहत बर्खास्त किया गया है। कुमार को नौसेना अधिनियम की धारा १५ के तहत बर्खास्त किया गया था जिसमें आरोपी अधिकारी को अपना मामला पेश करने का अधिकार नहीं होता।

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