संस्कार संपन्न युवा देश की धरोहर हैं: रवींद्रमुनिजी

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। यहां गोडवाड भवन में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में आध्यात्मिक चातुर्मास 2018 के तहत अहिंसा समवशरण के प्रांगण से रविवार को उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी ने पर्युषण पर्व के चौथे दिन ‘युवा-शक्ति के भंडार’ विषयक प्रवचन में कहा कि युवा शक्ति के अपार भंडार का राष्ट्रोत्थान में उपयोग हो इसके विविध पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज संस्था संघ संगठन और राष्ट्र के विकास का दायित्व युवाओं पर ही निर्भर है। युवा यदि अच्छी प्रवृत्तियों से संस्कार संपन्न है तो ऐसे युवक देश समाज और राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका अदा करते हैं। युवा पीढ़ी जितनी आत्मविश्वासी दायित्वशील होगी, उतनी ही देश समाज में रचनात्मक संपन्नता आएगी जो कि नव निर्माण में सहायक होगी। युवा पीढ़ी के संस्कारों से संपन्न होने की आवश्यकताओं पर जोर देते हुए मुनिश्री ने कहा कि आत्मविश्वास किसी स्कूल, कॉलेज यूनिवर्सिटी में नहीं मिलता बल्कि आत्मविश्वास के जागरण के लिए देव, गुरु, धर्म का आराधना, संस्कारों की संपन्नता व समाज से निकटता तथा महापुरुषों की वाणी का नित्य श्रवण जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आत्मविश्वासी युवक पावरफुल होते हैं उनके जीवन में नकारात्मकता नहीं होती। वे अपूर्व ऊर्जा से भरे होते हैं। जिम्मेदारियों का विस्तार से उल्लेख करते हुए उपाध्यायश्री ने कहा कि नौजवान पीढ़ी का जिम्मेवारीपरक होना आवश्यक है। साथ में संस्कारी भी होना भी जरूरी है। जिन युवाओं के जीवन में सात्विकता, अच्छी आदतें व संस्कार है वह देश समाज का उज्जवल भविष्य साबित होंगे। रचनात्मक युवाओं की क्रिएटिविटी पूरे देश और समाज के लिए वरदान बन जाती है।

युवा को अपने शब्दों में विस्तार से परिभाषित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि चुनौतियों परेशानियों के बावजूद जो तनाव से रहित हो वह असली युवा है, लेकिन आज की पीढ़ी डिप्रेशन में आ जाती है और नेगेटिविटी से भर जाती है। वर्तमान में रहने जीने वाला और पुरुषार्थी ही युवक है। जीवन में मेहनत पुरुषार्थ को भी आवश्यक बताते हुए रवींद्रमुनिजी ने कहा कि मनोबल सदैव ऊंचा रखना चाहिए, संयमित जीवन जीना चाहिए। आदर्श युवक में श्रद्धा शीलता, सहनशीलता, सहिष्णुता व स्वयं की विचारशीलता जरूरी है।

युवाओं और बुजुर्गों को अपनी अपनी समझ को विकसित करने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं का जोश और बुजुर्गों का होश मिलकर घर परिवार समाज राष्ट्र की गति में सहायक ही साबित हो सकता है। स्वार्थरहित सबके भले कल्याण के भी सीख देते हुए विशाल स्तर पर साधु-साध्वियों के लिए गठित श्रमण संघ विकास फण्ड योजना से जुड़ने तथा अधिकाधिक लोगों को यथासंभव जो़डने की प्रेरणा भी दी।

इससे पूर्व सलाहकारश्री रमणीकमुनिजी ने संन्यासी और सांसारिक व्यक्ति के बारे में बोलते हुए कहा कि सन्यासी दुनिया से रिश्ता तोड़ कर आध्यात्मिकता रूपी सागर में गहरी डुबकी लगाता है। उन्होंने अंतगड़ दशांग सूत्र की विस्तार पूर्वक वाचना के प्रसंग से विविध वर्णन और उपदेशों का अपनी विशिष्ट शैली से उल्लेख किया। साथ ही यह भी कहा कि उम्र में भले ही व्यक्ति बड़ा हो लेकिन संयम जीवन में जिसने दीक्षा पहले ली हो वह बड़ा कहलाता है।

इससे पूर्व श्री अर्हममुनि जी ने स्तवन-गीतिका प्रस्तुत की। धर्म सभा का संचालन गौतमचंद धारीवाल ने किया। उन्होंने बताया कि रविवार को जाप के लाभार्थी कनकपुरा के नेमीचंद पदमाबाई बोहरा का रवीन्द्रमुनिजी ने सम्मान किया। श्री पारसमुनि जी ने मांगलिक प्रदान की। उन्होंने बताया कि सोमवार को श्रमण भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक दिवस पर मुनिवृन्द के विशेष प्रवचन प्रातः 9 बजे से होंगे। चिकपेट शाखा के उपाध्यक्ष सुरेश कातरेला ने बताया कि इस अवसर पर घोड़नदी, नाशिक, पुणे व दिल्ली सहित शहर के विभिन्न उप नगरों से ब़डी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्म सभा में प्रवचन श्रवण का लाभ लिया।

सामूहिक क्षमापना का कार्यक्रम शुक्रवार को फ्रीडम पार्क में
गोडवाड़ भवन में अष्ट दिवसीय पर्युषण पर्व आराधना के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि 13 सितंबर तक प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से अंतकृत दशांग सूत्र की वाचना रमणीकमुनिजी द्वारा होगी। प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे से रवीन्द्रमुनिजी के प्रवचन व दोपहर में 2.30 बजे से रचितमुनिजी द्वारा श्रीकल्पसूत्र की वाचना होगी।

कल्पसूत्र के अनुसार भगवान महावीर जन्म कल्याणक दिवस सोमवार 10 सितंबर को दोपहर 2.30 बजे से मनाया जाएगा। भवन में सूर्यास्त के बाद प्रतिक्रमण तथा संवर-पौषध की व्यवस्था भी रहेगी। उन्होंने बताया कि संवत्सरी का कार्यक्रम एवं प्रवचन फ्रीडम पार्क में 13 सितंबर को प्रातः 9 बजे से होगा। इसी दिन जाप के कलशों की बोलियां भी लगाई जाएंगी। वहीं शुक्रवार 14 सितंबर को गोडवाड़ भवन में प्रातः 9 बजे संवत्सरी का मांगलिक व कलश वितरण तथा रक्षा सूत्र वितरित किया जाएगा। शुक्रवार को ही दोपहर में 1 बजे से फ्रीडम पार्क में समस्त स्थानकवासी जैन साधु-साध्वीवृंद के सान्निध्य में सामूहिक क्षमापना का कार्यक्रम होगा।

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