बेंगलूरु/दक्षिण भारत स्थानीय श्रीरामपुरम स्थानक में विराजित श्रमण संघीय साध्वीश्री वीरकांताजी की शिष्या साध्वीश्री हीतिकाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज हर व्यक्ति शांति की खोज में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि तीर्थ में, मंदिर में, गुरुद्वारे और वन सहित अनेक स्थानों में शांति को खोजा जा रहा है। यहां तक कि मेडिटेशन करने के लिए अन्य देशों में भी लोग जा रहे हैं, यानी शांति के लिए लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी व्यक्ति को उसके जीवन में शांति नहीं मिलती है। साध्वीश्री ने कहा कि इधर-उधर शांति को ़ढूंढने के बाद भी अशांति ही मिल रही है। हीतिकाजी ने कहा कि शांति को खोजने के लिए हमें अपने भीतर झांकना होगा। जब तक हम अपने अंदर नहीं झांकेंगे, तब तक हमें शांति नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि प्रभु महावीर ने भी कहा कि ज्ञान का दीपक जलाकर उजाला करके ढूंढने पर हमें शांति मिल सकती है। इससे पूर्व साध्वीश्री वीनाजी ने कहा कि जीवन में कभी भी किसी व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि हमेशा के लिए कोई चीज स्थिर नहीं रहती है। उन्होंने कहा कि रावण के अहंकार ने उसके पूरे कुल को खत्म कर दिया था।

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