नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राजीव गांधी हत्याकांड के एक दोषी की याचिका पर मंगलवार को सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में बम बनाने की साजिश से संबंधित सीबीआई की जांच पूरी होने तक दोषी की सजा निलंबित करने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने दोषी ए जी पेरारीवलन की याचिका पर सरकार को दो हफ्ते के भीतर अपना रूख साफ करने का निर्देश दिया। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने पेरारीवलन की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।पेरारीवलन ने अपनी याचिका में न्यायालय से कहा कि उसे नौ वोल्ट की दो बैटरियों की आपूर्ति के लिए दोषी ठहराया गया जिनका इस्तेमाल कथित रूप से उस आईईडी में हुआ जिसने राजीव की जान ली, लेकिन आईईडी से संबंधित सीबीआई की मल्टी डिसिप्लीनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (एमडीएमए) की जांच अब भी चल रही है। दोषी ने कहा कि वह इस मामले में २६ साल से जेल में बंद है जबकि तमिलनाडु सरकार उसकी सजा की शेष अवधि माफ कर उसे रिहा करने का फैसला पहले ही कर चुकी है। उसने दावा किया कि राज्य सरकार ने उसकी सजा माफ करने को लेकर केंद्र से सहमति मांगी थी, लेकिन केंद्र ने पिछले दो सालों से इस मामले में कोई फैसला नहीं किया।पेरारीवलन के वकील गोपाल शंकरनारायणन के जरिये दायर याचिका में कहा गया, और जांच करने तथा सीबीआई में एमडीएमए के गठन का मुख्य उद्देश्य आईईडी के स्रोत, उसके निर्माण और उस व्यापक साजिश का पता लगाना है जिसके कारण राजीव गांधी की जान गई। इसमें कहा गया, हालांकि १८ साल की जांच के बाद भी सीबीआई आईईडी, उसके स्रोत और निर्माण को लेकर अपनी जांच किसी ना किसी कारण से पूरी नहीं पाई है। राजीव गांधी की २१ मई, १९९१ को तमिलनाडु के श्रीपेरम्बुदूर में एक चुनाव रैली के दौरान धानू नाम की एक आत्मघाती हमलावर के बम विस्फोट में मृत्यु हो गयी थी। इस घटना में धानू सहित १४ और लोग मारे गए थे।

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