बेंगलूरु/दक्षिण भारत श्रमणी संघीय सलाहकार श्री रमणीकमुनिजी म.सा. ने शनिवार को अपने उद्बोधन में कहा कि विश्वास और आस्था दो ऐसे शब्द हैं, जिनके मायने एक दूसरे के बिल्कुल करीब होते हुए भी जुदा-जुदा हैं। उन्हांेने कहा कि विश्वास सदैव अपने रास्ते चलता रहता है, जबकि आस्था अपने रास्ते परिपक्व होती रहती है। मुनिश्री ने कहा कि विश्वास के बिना परमात्मा को भी खुश करना नामुमकिन है, इसलिए किसी भी व्यक्ति का दिल जीतना यानी विश्वास कायम करना आवश्यक है। यहां कुलवेनहल्ली स्थित महावीर तपोवन-रांका भवन में मुनिश्री ने कहा कि विश्वास जीव के मूल की प्रकृति है, जबकि आस्था उसके संस्कारों का नतीजा होता है। इस मौके पर समय का आदर करने की सीख देते हुए मुनिश्री ने कहा कि समय का पाबंद होने के लिए व्यक्ति के जीवन में धैर्य, सक्रियता व अनुशासन की आवश्यकता होती है, इसके लिए हमें अपने अंदर सकारात्मक नजरिया विकसित करना चाहिए। समयनिष्ठता को व्यक्ति की विशेषता बताते हुए रमणीकमुनिजी ने यह भी कहा कि यह हमें बहुत से तरीकों से लाभ पहंुचाती है यानी इसे सफलता के सबसे ब़डे रहस्यों में से एक कहा जा सकता है। इससे पूर्व उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी शहर के समाजसेवी अशोक रांका की फैक्ट्री से ११ किमी. का पदविहार कर यहां पहुंचे। दोनों गुरुभ्राताओं का करीब तीन वर्षों के बाद आध्यात्मिक मिलन हुआ। संतों के दर्शन एवं पदविहार सेवा में वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल के साथ मार्गदर्शक संपतराज धारीवाल, मनोहर बाफना, यशवंतपुर संघ के मंत्री रमेश बोहरा, रमेश खाबिया, नीतेश गुलच्छा, नरेश मूथा व मंजूनाथ राव शामिल थे। रवींद्रमुनिजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मांगलिक प्रदान की। धारीवाल ने बताया कि रविवार को प्रातः १० बजे यहां गुरुभ्राता मिलन समारोह का आयोजन धर्मप्रभावना के साथ होगा। आयोजन स्थल तक पहुंचने के लिए स्थानीय मैसूर बैंक सर्कल से प्रातः ७.३० बजे से बसों की रवानगी होगी।

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