kalpana tiwari
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लखनऊ। बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में ऐसी कई बातें सामने आई हैं जो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती हैं। इस घटना की चश्मदीद गवाह सना ने 28 सितंबर की रात को जो हुआ, उसके बारे में ऐसी बातें बताईं जिन्हें पढ़कर आप चौंक जाएंगे। सना का कहना है कि विवेक को गोली मारने के ​बाद पुलिस मामले को दबाने में जुट गई थी। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने उन पर खूब दबाव बनाया ताकि आरोपी पुलिसकर्मी बच जाएं।

सना ने मीडिया को बताया कि गोली मारने के बाद पुलिस ने उनसे बोलकर तहरीर लिखवाई। तहरीर लिखवाने वाली एक महिला पुलिसकर्मी थी। सना ने कहा है ​कि वह महिला पुलिसकर्मी कोई और नहीं बल्कि आरोपी कांस्टेबल प्रशांत चौधरी की पत्नी थी। तहरीर लिखवाते समय वह उनके बयान पर सवाल उठा रही थी। यही नहीं, वह सना की बात को काटने की कोशिश में जुटी थी।

घबराहट का उठाया फायदा
अचानक हुई इस घटना से सना घबरा गईं। उन्होंने कहा कि उनकी घबराहट का इन पुलिसकर्मियों ने खासा फायदा उठाया। उन्होंने जल्दबाजी में हस्ताक्षर करवा लिए। उन्हें तहरीर लिखाने की घटना पर उस वक्त आश्चर्य हुआ जब अखबारों में उसी महिला कांस्टेबल की फोटो देखी और उसका परिचय आरोपी कांस्टेबल प्रशांत चौधरी की पत्नी के तौर पर दिया गया था।

सना ने कहा है कि यदि विवेक को डॉक्टरों की सलाह पर दूसरे अस्पताल ले जाया जाता तो वे जिंदा होते। सना ने उस रात की घटना को याद करते हुए बताया कि गोली मारने के बाद पुलिस ने विवेक को अस्पताल भेज दिया लेकिन उसे अपने साथ ​ले गए और करीब दो घंटे तक आसपास के इलाकों में घुमाते रहे। इन सबसे सना बहुत घबरा गई थीं तो पुलिसवाले उस पर शांत रहने के लिए दबाव डालने लगे। उनका मोबाइल छीन लिया। जब उन्होंने अपने परिजनों से बात करने के लिए मोबाइल मांगा तो नहीं दिया।

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पुलिस पर दागे कई सवाल
सना ने कहा कि फिर वे उसे कैसरबाग ले आए और वहां एक महिला कांस्टेबल को साथ लेकर गोमतीनगर थाने में तहरीर लिखवाने लगे। सना ने कहा है कि लोहिया अस्पताल में डॉक्टरों ने कहा ​था कि विवेक की हालत बेहद नाजुक है, इसलिए इसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाइए, लेकिन पुलिसवाले उन्हें कहीं नहीं ले गए। उन्होंने पुलिस से सवाल किया है कि विवेक को दूसरे अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया।

गाड़ी न रोकने की बताई वजह
विवेक ने पुलिस को देखकर गाड़ी क्यों नहीं रोकी? इस पर सना कहती हैं कि दो पुलिसकर्मियों में से एक ने गाड़ी के शीशे में जबरदस्ती लाठी डालना शुरू कर दिया था। दूसरा पुलिसकर्मी विवेक को गाड़ी से बाहर निकालने की कोशिश करने लगा। पुलिस हिंसक हो चुकी थी। ऐसे हालात देख विवेक ने रुकना ठीक नहीं समझा। सना ने बताया कि इसके बाद पुलिसकर्मी ने विवेक को निशाना बनाते हुए गोली चला दी। गोली लगने के बाद भी विवेक ने कुछ देर तक गाड़ी चलाई। उनके शरीर से लगातार खून बह रहा था। बाद में गाड़ी एक दीवार से टकरा गई।

पुलिसकर्मियों के खिलाफ फूटा गुस्सा
सना ने बताया, उस रात की घटना एक हत्या है और मैं चाहती हूं कि आम आदमी इस पर ध्यान दें। बता दें कि विवेक हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन पर सख्त कार्रवाई की मांग होने लगी। अब इस मामले की जांच एसआईटी करेगी। आरोपी दोनों पुलिसकर्मी जेल में हैं। विवेक की पत्नी कल्पना ने 1 अक्टूबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उन्हें सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है। कल्पना ने कहा है कि मुख्यमंत्री से बात करने के बाद राज्य सरकार के प्रति उनका भरोसा बढ़ा है।

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