बेंगलूरु/दक्षिण भारत यहां शांतिनगर स्थित लूणावत जैन स्थानक भवन में बुधवार को श्रमण संघीय उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञान का प्रकाश गलत कार्यों को रोकता है। उन्होंने विवेक और ज्ञान को ही सच्चा धर्म बताते हुए कहा कि यही व्यक्ति के मनोबल को मजबूत करता है। व्यक्ति के दुखी होने के अनेक कारणों का विस्तार से उल्लेख करते हुए मुनिश्री ने कहा कि अज्ञानता, अविवेक, गलत आदतें व आवेग-समवेग आदि दुखी होने के कारण हैं। उन्होंने कहा कि विवेक और ज्ञान से ही हमें सर्वत्र सम्मान मिलता है। नीति और न्याय से कार्य करने की सीख देते हुए उपाध्यायश्री ने यह भी कहा कि तभी जीवन महकेगा व सुगंधमय वातावरण बनेगा। कार्यक्रम का संचालन सभा के चेयरमैन महावीरचंद मूथा ने किया। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर दानमल सिंघी, मुकेश मूथा, ज्ञानचंद बाफना, सुरेशचंद कात्रेला, संजय मूथा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे। प्रकाशचंद खींवेसरा ने सभी का आभार जताया। मुनिवृंद गुरुवार को यहां से पदविहार कर शूले स्थित अशोकनगर स्थानक पहुंचेंगे। इससे पूर्व रवींद्रमुनिजी ने लालबाग रो़ड स्थित गो़डवा़ड भवन का भी अवलोकन किया, जहां संतश्री का वर्ष २०१८ के लिए वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में संयुक्त चातुर्मास का प्रवेश २२ जुलाई को होना है। इस अवसर पर जैन कॉन्फ्रंेस के राष्ट्रीय मंत्री आनंद कोठारी, चिकपेट शाखा के अध्यक्ष ज्ञानचंद बाफना, कार्याध्यक्ष प्रकाशचंद बंब, महामंत्री गौतमचंद धारीवाल, सुरेश मूथा व मनोहर बाफना सहित अनेक पदाधिकारी-सदस्य मौजूद रहे।

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