marriage and horoscope
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बेंगलूरु। किसी मनुष्य के जीवन में विवाह एक ऐसी घटना है जिसे वह सदैव याद रखता है। हमारे देश में विवाह को सिर्फ एक संस्कार या रस्म ही नहीं माना जाता। यह कई जन्मों का रिश्ता कहलाता है जो पवित्रता, प्रेम और मर्यादा की डोरी से बंधा रहता है। विवाह से पहले परिजन भावी वर और वधू की कुंडली का मिलान करवाते हैं ताकि दोनों का जीवन शुभ हो।

आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे योगों के बारे में जो कुंडली में उपस्थित हों तो शुभ फल नहीं देते। ऐसे लोग विवाह के मामले में गलत फैसले लेते हैं और बाद में उन्हें पछताना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि विवाह के बंधन में बंधने से पहले विवेक और सद्बुद्धि से विचार किया जाए।

कुंडली में पांचवां भाव प्रेम संबंधों को जानने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर पंचम भाव में चंद्रमा बैठा हो और वह शुभ स्थिति में हो, उस पर किसी क्रूर ग्रह की दृष्टि न हो तो ऐसा जातक पारंपरिक रीति से विवाह करता है, परंतु यदि चंद्रमा के साथ दोष हो तो वह अच्छा नहीं होता। ऐसा जातक किसी की बात नहीं मानता और अपनी मर्जी से विवाह करना चाहता है।

दूसरी ओर सातवें भाव को भी देखना चाहिए। यदि सप्तम भाव में चंद्रमा दोषपूर्ण अथवा वहां राहु की स्थिति हो तो ऐसे व्यक्ति को परिजनों द्वारा पसंद किया गया रिश्ता अच्छा नहीं लगता। वह अपनी पसंद को तरजीह देता है। यदि उस पर ज्यादा दबाव डाला जाए तो वह परिजनों से विवाद कर लेता है। इसलिए हमारे ऋषियों ने विवाह से पूर्व विभिन्न गुणों के मिलान पर बहुत जोर दिया है।

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