जयपुर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि विधायकों के लिए विधानसभा ही सबसे अच्छी पाठशाला है जहां हम विधायी कार्यों से लेकर सभी तरह के नियम और प्रतिक्रियाओं को सीखते हैं। उन्होंने कहा कि जनता एक विधायक को अपने प्रतिनिधि के रूप में चुनकर भेजती है, से में विधायकों को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना चाहिए। श्रीमती राजे विधानसभा में सर्वश्रेष्ठ विधायक सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रही थीं। सम्मानित होने वाले विधायकों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इन विधायकों ने संसदीय परम्पराओं का निर्वहन किया है, वह सभी के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष सदन में लोकतंत्र के दो पहिए होते हैं। इसलिए सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के साथी विधायकों के साथ हमारा व्यवहार समान रूप से सरल और मृदु होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पक्ष-प्रतिपक्ष की भावना से ऊपर उठकर ही सदन के विभिन्न सदस्यों को सर्वश्रेष्ठ विधायक के रूप में चयन किया गया है।श्रीमती राजे ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ विधायक का सम्मान पाने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत ने सदैव विधानसभा अध्यक्ष के रूप में पद की गरिमा और शालीनता ब़ढाई है। इसी प्रकार पूर्वमंत्री भरत सिंह ने अपनी ईमानदारी और बेदाग छवि के कारण विशेष पहचान बनाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान, प्रक्रिया नियमों तथा संसदीय परम्पराओं का गू़ढ ज्ञान रखने वाले राजेन्द्र राठौ़ड ने विधानसभा के सुचारू संचालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने संसदीय परम्पराओं को ऊंचे आयाम दिए हैं। उन्होंने कहा कि युवा विधायकों को कटारिया से प्रेरणा लेनी चाहिए।

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