rafale deal
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। राफेल सौदे पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच बुधवार को राज्यसभा में कैग की रिपोर्ट पेश की गई। इसमें बताया गया है कि संप्रग के मुकाबले राजग के शासन में 2.86 प्रतिशत सस्ता सौदा तय किया गया। इसे पिछले सौदे से बेहतर बताया गया है। रिपोर्ट कहती है कि 126 विमानों की तुलना में भारत ने 36 राफेल अनुबंध में बड़ी रकम की बचत की है। बता दें कि संप्रग के शासनकाल के दौरान सौदे पर सहमति नहीं बन पाई थी। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद उसने साल 2016 में 36 राफेल विमानों की खरीद का सौदा किया।

रिपोर्ट के अनुसार, 126 विमानों के लिए किए गए सौदे की तुलना में भारत ने अपनी आवश्यकतानुसार करवाए गए परिवर्तनों के साथ 36 राफेल विमानों के सौदे में 17.08 प्रतिशत रकम बचाई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पहले 18 राफेल विमानों का डिलीवरी शेड्यूल उस शेड्यूल से पांच महीने बेहतर है, जो 126 विमानों के लिए किए गए सौदे में प्रस्तावित था।

रिपोर्ट राज्यसभा में पेश होने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि उच्चतम न्यायालय भी गलत हो, सीएजी भी गलत हो, सिर्फ परिवार ही सही हो। सत्यमेव जयते। सच्चाई की हमेशा जीत होती है। उन्होंने कहा कि राफेल पर सीएजी रिपोर्ट से सच की पुष्टि हुई। लोकतंत्र उन्हें कैसे दंडित करता है, जो लगातार देश से झूठ बोलते रहे हों। सीएजी रिपोर्ट से ‘महाझूठबंधन’ के झूठों की पोल खुल गई है।

बता दें कि इस रिपोर्ट में 2007 और 2015 की मूल्य बोलियों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में लिखा है कि आईएनटी द्वारा गणना किए गए संरेखित मूल्य ‘यू 1’ मिलियन यूरो था, जबकि लेखापरीक्षा द्वारा आकलित की गई संरेखित कीमत ‘सीवी’ मिलियन यूरो थी, जो आईएनटी संरेखित लागत से लगभग 1.23 प्रतिशत कम थी। यह वह मूल्य था जिस पर 2015 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए थे, यदि 2007 और 2015 की कीमतों को बराबर माना जाता। लेकिन इसकी जगह 2016 में ‘यू’ मिलियन यूरो के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे जो लेखापरीक्षा के संरेखित कीमत से 2.86 प्रतिशत कम थी।

उधर, कांग्रेस ने कैग रिपोर्ट पर कई सवाल दागे। राज्यसभा में इस पर भारी हंगामा हुआ। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। दूसरी ओर लोकसभा में भी तेदेपा, तृणमूल सहित विपक्ष के सांसदों ने हंगामा किया। इसके बाद यहां भी कार्यवाही स्थगित की गई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसदों ने मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

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