महिला हो या पुरुष, जो स्नान करते समय नहीं मानता ये 3 बातें, वह होता है पाप का भागी

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बेंगलूरु। भारतीय ज्योतिष एवं आध्यात्मिक ग्रंथों में प्रकृति के हर स्वरूप को एक शक्ति माना गया है और उसका अधिपति किसी एक देवता को बताया गया है। जिस प्रकार चंद्रमा के स्वामी भगवान शिव, मेघों के इंद्र और अग्नि के अग्निदेव हैं, उसी प्रकार जल के स्वामी वरुण देवता हैं। चूंकि जल हमारे जीवन का आधार है। इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते, इसलिए जल की स्वच्छता और पवित्रता के संबंध में हमें कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। विशेष रूप से नहाते समय। जानिए जल तत्व की पवित्रता के संबंध में हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

1. जल किसी सरोवर में हो या बाथरूम में, उसकी पवित्रता का सम्मान करना चाहिए। जल का आगमन और निकासी स्थान वास्तु के अनुसार होना चाहिए। निकासी का अवरुद्ध स्थान और रुकी हुई नालियां नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। इससे बीमारियां पैदा होने का खतरा भी रहता है। अत: जल तत्व की निकासी स्वच्छ होनी चाहिए।

2. वास्तु की मान्यता है कि बाथरूम एवं रसोईघर को कभी जल से रिक्त नहीं रखना चाहिए। वहां पानी का पूरा प्रबंध होना चाहिए। बाथरूम एवं रसोई में पानी के खाली बर्तन असुविधा के साथ ही वास्तु दोष का निर्माण करते हैं। इससे लक्ष्मी रुष्ट होती है।

3. इन सबके आखिर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात, बाथरूम हो या कोई जलाशय उसमें कभी निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए। इससे वरुण देव का दोष उत्पन्न होता है। इसी प्रकार दोनों ही स्थानों की पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमारे प्राचीन ऋषियों एवं संसार के अन्य धर्मों में भी कहा गया है कि जो व्यक्ति जल की पवित्रता का सम्मान नहीं करता, उसके भाग्योदय के मार्ग में बाधाएं आती हैं और वह पाप का भागी होता है।

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