नई दिल्ली। अपने पति की, अश्‍लील फिल्मों की लत से तंग आकर एक महिला ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और न्यायालय से अनुरोध किया है कि देश में अश्‍लील फिल्में आसानी से दिखाने वाली वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाया जाए। महिला ने अदालत के समक्ष गुरुवार को एक हलफनामा दायर कर यह अनुरोध किया है। मूल रुप से कोलकाता की रहने वाली यह महिला फिलहाल मुंबई में रहती है और इसका पति भी मुंबई में ही रहता है। महिला ने न्यायालय को बताया है कि उसके पति को अश्‍लील फिल्मों को देखने की लत लग गई है जिसके कारण उसका वैवाहिक जीवन पूरी तरह से बर्बाद हो गया है।
महिला द्वारा अदालत को यह भी बताया गया है कि उसका पति अश्‍लील फिल्मों को देखने की अपनी लत छोड़ने से इंकार कर दिया है और उसका ज्यादातर समय मोबाइल फोन पर अश्‍लील फिल्में देखने में बीतता है जोकि इंटरनेट के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हैं। ज्यादा समय तक इस प्रकार की फिल्में देखने के कारण उसके दिमाग पर भी असर हुआ है। महिला का दावा है कि वर्ष 2016 में शादी के बाद से अब तक उसे वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त नहीं हो सका है। महिला एक मध्यमवर्गीय बंगाली परिवार से ताल्लुक रखती है। अदालत ने अभी इस महिला के हलफनामे पर सुनवाई के लिए कोई तिथि निर्धारित नहीं की है।
मुंबई की एक गैर सरकारी संस्था में बतौर प्रबंधक सेवा दे रही इस महिला के अनुसार अश्‍लील फिल्में देखने के कारण उसके पति की पौरुष शक्ति खत्म हो चुकी है और वह महिला पर अब आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए दबाव बना रहा है। उसने कहा है ‘ मैं पोर्नोग्राफी की पीड़ित हूं, मैं बड़ी विनम्रता के साथ सम्मानीय अदालत के ध्यान में इंटरनेट पर पोर्न वीडियो से मची तबाही को लाना चाहती हूं।’
महिला द्वारा अदालत को यह भी बताया गया है कि उसका पति अक्सर उसकी सहमति के बिना उस पर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए भी दबाव बनाता है। महिला ने सर्वोच्च न्यायालय में दिए गए अपने हलफनामे में वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश के कमलेश वासवानी नामक याचिकाकर्ता की याचिका का भी उल्लेख किया है। ज्ञातव्य है कि कमलेश वासवानी ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर देश में सामूहिक दुष्कर्म की बढती घटनाओं के लिए अश्‍लील फिल्मों को जिम्मेदार ठहराया था और इस प्रकार की फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था।

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