नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने १०वीं एवं १२वीं कक्षा के विद्यार्थियों को इम्तिहान को उत्सव की तरह से लेने और हर प्रकार के तनाव से मुक्त एवं प्रसन्नचित्त होकर परीक्षा कक्ष में जाने का संदेश देते हुए कहा, ‘मैं चुनाव से नहीं डरता, तुम परीक्षा से नहीं डरो।‘ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मोदी की पुस्तक ’’एग़्जाम वॉरियर’’ का विमोचन के अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की बहुत प्रसन्नता है कि वह प्रधानमंत्री द्वारा एक ऐसे विषय पर लिखी पुस्तक का विमोचन कर रहीं हैं जो बहुत प्रासंगिक है। यह पुस्तक उनके आकाशवाणी पर लोकप्रिय कार्यक्रम ’’मन की बात’’ में संवाद का सार है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के दिनों में आई यह किताब बहुत रुचिकर है और आकार भी छोटा है। मोदी के अनुभवों एवं उदाहरणों के साथ रुचिकर बनाई गई इस किताब को प़ढने का एक अलग म़जा भी होगा।श्रीमती स्वराज ने कहा कि मोदी सिर्फ भाषण देने वाले नेता नहीं बल्कि संवाद करने वाले अनूठे नेता हैं। देशवासियों से संवाद का उनका अनोखा ढंग है। मन की बात कार्यक्रम से उन्होंने यह साबित किया है कि करो़डों देशवासी उनकी बात सुनते हैं। उन्होंने पुस्तक में विद्यार्थियों के लिए २५ मोदी मंत्रों को प़ढकर सुनाया और उनकी व्याख्या भी की लेकिन बीच बीच में कई बार उनके मुख से ’’परीक्षा’’ की बजाय ’’चुनाव’’ शब्द बोला गया तो सभागार में बैठे अतिथिगण और स्वयं श्रीमती स्वराज भी हंसे बिना नहीं रह सकीं। उन्होंने बात को संभालते हुए कहा कि मोदी का बच्चों को संदेश है, ’’मैं चुनाव से नहीं डरता, तुम परीक्षा से मत डरो।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का मानना है कि परीक्षा को हौआ या भूत नहीं समझना चाहिए और ना ही तनाव लेना चाहिए। खेलना, नींद लेना और योग करना भी स्वयं को तनाव मुक्त रहने एवं परीक्षा को अधिक एकाग्रता से देने में सहायक होता है। उन्होंने बच्चों को अपने शौक पहचान कर उसे करियर बनाने का भी सुझाव दिया है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जाव़डेकर मौजूद थे। जाव़डेकर ने अपने संबोधन में बताया कि मोदी अगले शुक्रवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में इन बच्चों से संवाद करेंगे। वह आने वाली १०वीं एवं १२वीं के विद्यार्थियों को परीक्षा को उत्सव की तरह मनाने और परीक्षा देने से पहले तनाव मुक्त रहने के गुर सिखाएंगे। जाव़डेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अभिभावकों और शिक्षकों के लिए अलग अलग दो पत्र लिखे हैं जिनमें उन्हें बच्चों को तनाव मुक्त रखने के संबंध में सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि बच्चों को परीक्षा को ’’वरियर’’ (चिंताग्रस्त) होकर नहीं, ’’वॉरियर’’ (योद्धा) होकर लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि बच्चे जैसे हैं, उन्हें वैसे ही स्वीकार किया जाना चाहिए। उनकी प्रतिभा को फलने फूलने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि परीक्षा किसी बच्चे की परीक्षा नहीं होती है बल्कि बच्चे की उस समय की तैयारी की परीक्षा होती है। बच्चों को ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस प्रयास से शिक्षा को लेकर समग्र दृष्टि विकसित होगी और आत्मविश्वास से भरी नई पी़ढी तैयार होगी।

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