मुंबई/भाषाभारत के पास अपनी स्थिति को बदलकर विकसित देशों की कतार में शामिल होने के लिए सिर्फ एक दशक का वक्त है। इसके लिए भारत को शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी। अगर वह इस मोर्च पर विफल हुआ तो देश की युवा आबादी का लाभ नुकसान में बदल जाएगा। भारतीय स्टेट बैंक की शोध शाखा ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही। देश के सबसे ब़डे बैंक एसबीआई की रिपोर्ट में चेताया गया है कि देश अगर व्यवस्थित ढंग से कार्य नहीं करता है तो यह विकसित देशों की कतार में कभी शामिल नहीं हो सकेगा। नीति-निर्माताओं को इस बात का अंदाजा होना चाहिए भारत के पास विकसित देश सेहरा पहनने के लिए बहुत थो़डा समय है जिसमें यह अपना दर्जा ब़ढा सकता है या फिर हमेशा के लिए अभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में अटका रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और नीति-निर्माताओं को युवा पी़ढी पर ध्यान केंद्रित करना सुनिश्चित करना होगा ताकि वे अच्छे नागरिक बन सके। साथ ही जनसांख्यिकीय लाभांश को समझने और अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा में निवेश करना चाहिए। बैंक ने चेताया, देश का जनसांख्यिकी लाभांश, जो कि उसकी ताकत है वास्तव में वर्ष २०३० तक उसके लिए नुकसानदायक हो सकती है। जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति दर्शाती है कि पिछले दो दशकों में वृद्धिशील जनसंख्या वृद्धि स्थिर बनी हुई है और लगभग १८ करो़ड है और राज्यों में प्रजनन दर में काफी विधितता है।

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