नई दिल्ली। नियमित अभ्यास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति असम्मान दिखाने वाले बीएसएफ के एक जवान को बल ने वेतन कटौती का दंड दिया था लेकिन प्रधानमंत्री ने बुधवार को इस बात पर नाखुशी जताई और वह चाहते थे कि यह दंड तुरंत वापस लिया जाए। इसके बाद बल ने जवान का एक हफ्ते का वेतन काटने का आदेश वापस ले लिया। अर्द्धसैनिक बल के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को निर्देश दिया कि वह तुरंत आदेश को वापस ले।पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में तैनात बीएसएफ की १५वीं बटालियन के कॉन्स्टेबल संजीव कुमार को उनके कमांडिंग अफसर (सीओ) ने २१ फरवरी की सुबह के अभ्यास के दौरान मोदी प्रोग्राम जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया था। इकाई के सीओ कमांडेंट अनूप लाल भगत ने आदेश जारी कर प्रधानमंत्री के प्रति असम्मान जताने के लिए जवान पर सात दिन का वेतन जुर्माना लगाया जिसका मतलब है कि कुल वेतन में से एक हफ्ते के वेतन की राशि की कटौती।बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने कहा, प्रधानमंत्री ने इस बात पर अप्रसन्नता जाहिर की और बल को निर्देश दिया कि वह दंड को तत्काल वापस ले। आदेश को रद्द कर दिया गया और मामले से विवेकपूर्ण तरीके से नहीं निबटने के लिए संबद्ध कमांडेंट को आगाह किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जीरो परेड या अपनी आधिकारिक गतिविधियों के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने वाली रिपोर्टिंग असेंबली के दौरान जवान ने एक कार्यक्रम का जिक्र किया जिसमें वह शामिल हुआ था। इस कार्यक्रम को उसने मोदी कार्यक्रम कहा। उन्होंने बताया कि सीओ ने प्रधानमंत्री के प्रति जवान के इस संदर्भ को अनुचित पाया और उसके खिलाफ जांच का आदेश दिया। अधिकारियों ने बताया कि जांच एक दिन में पूरी हो गई और इसमें कॉन्स्टेबल कुमार को बीएसएफ एक्ट की धारा ४० के तहत दोषी माना गया। बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, बल के वरीय अधिकारियों को बार-बार निर्देश दिया जाता है कि अपने कमान के कर्मियों के प्रति अच्छे नेता के गुण दिखाएं। उन्होंने कहा, ये कर्मी देश में सबसे कठिन स्थितियों में से एक में काम करते हैं। उनके कमांडर को बल में अनुशासन सुनिश्चित करना चाहिए लेकिन अपराध के अनुरूप दंड दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जवान के वेतन में कटौती उचित निर्णय नहीं है।

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