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बेंगलूरु। कटलेट, टिक्की, पकौड़ी, समोसा, पूरी, वड़ा पाव, फ्रैंच फ्राइज, चिप्स… यह एक न खत्म होने वाली सूची है। हम में से ज्यादातर लोग दिन में किसी न किसी किस्म का तला हुआ फूड अवश्य लेते हैं। फ्राइड प्रोडक्ट्स की हर आयु वर्ग में जबरदस्त कंज्यूमर अपील होती है। चूंकि यह प्रक्रिया तेज होती है इसलिए इसे निरंतर अधिक प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

कुछ फ्राइड फूड्स को सुखाकर उन्हें लम्बी शैल्फ लाइफ दी जा सकती है। उन्हें आसानी से पैक करके स्टोर और वितरित किया जा सकता है, जैसे आलू के चिप्स, नट्स, इंस्टैंट नूडल्स आदि।साधारण शब्दों में तलने का अर्थ है खूब सारे गर्म तेल में फूड को कुक करना ताकि वह आराम से तेल में डूब जाए या उस पर तैरने लगे।

वातावरण के सामान्य दबाव में फैट्स पानी से अधिक तापमान हासिल कर लेते हैं, इसलिए फ्राइंग से फूड की कार्बनाइज हो जाती है और शुगर कारमलाइज हो जाती है, इसलिए फूड जल्दी कुक हो जाता है और उसमें विशेष करारापन आ जाता है। अलग-अलग फूड में फैट की गहराई अलग डिग्री की होती है जो उसके स्वाद, चिकनाहट और लीवर को प्रभावित करती है। लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि डीप फ्राइंग से फूड में तेल भर जाता है जिससे उसका पौष्टिक घनत्व कम हो जाता है। इसलिए फ्राइड फूड्स हमारे शरीर में बहुत से हानिकारक प्रभाव पैदा कर सकते हैं, जिनमें से कुछेक हैं:

* नियमित फ्राइड फूड खाने से आवश्यकता से अधिक फैट शरीर में पहुंच जाता है। देर तक गर्म करने से तेल में हानिकारक रसायन पैदा हो जाते हैं। इनमें से एक है एक्रोलीन जो आंतों को नुकसान पहुंचाने के अलावा कैंसर का कारण भी बनता है।

* अधिक तापमान पर फैट्स का प्राकृतिक रूप बदल जाता है और यह ट्रांस फैटी एसिड में बदल जाते हैं जिनसे ब्लड कोलेस्ट्राल बढ़ जाता है। यह अच्छे (एचडीएल) कोलेस्ट्रोल की मात्रा भी कम करते हैं और ब्लड क्लोटिंग प्रवृत्ति को बढ़ा देते हैं जिससे कोरोनरी हार्ट रोग का खतरा बढ़ जाता है।

* तली हुई चीज भारी होती है, आसानी से हजम नहीं होती। इसलिए पेट देर से खाली होता है। लिहाजा कब्ज, इरिटेबिल बाउस सिंड्रोम का कारण बनती हैं और यह चीज अगर जारी रहे तो पेट या कोलन का कैंसर भी हो सकता है।

* तली हुई चीजों में मौजूद ट्रांस फैटी एसिड्स ब्लड कोलेस्ट्राल का स्तर बढ़ाते हैं, ब्लड क्लोटिंग की प्रवृत्ति बढ़ती है और कोरोनरी हार्ट रोग होता है।

तलते समय नुकसान कम करने के लिए यह करें:
* यार्ट स्मोकिंग प्वाइंट का तेल चुनें। अतिरिक्त तेल को निकाल दें। तले हुए फूड को तेल सोखने वाले कागज पर रखें।
* बटर या कोकोनट तेल की जगह वनस्पति तले का इस्तेमाल करें क्योंकि उसमें हाई स्मोकिंग प्वाइंट होता है। नॉन स्टिक पैन या कड़ाही का प्रयोग करें।

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