बेंगलूरु/दक्षिण भारतवासूपूज्यस्वामी जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ अक्कीपेट के तत्वावधान में अक्कीपेट स्थित वासूपूज्य मंदिर में संघ स्थापना के रजत जयंती के मौके पर संप्रतिकालीन सुमतिनाथ प्रभु, नेमीनाथ प्रभु, गणधर सुभूमस्वामी एवं गौतमस्वामी की प्रतिष्ठा एवं जिनालय वर्षगांठ तथा साध्वीश्री दिव्यधर्माश्रीजी म.सा. की ९१वीं ओली की पूर्णाहुति निमित्ते बृहदष्टोत्तरी सह पंचाह्निका महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को आचार्यश्री मुक्तिसागरसूरीश्वरजी के साथ आचार्यश्री चन्दजीतसूरीश्वरजी म.सा., आचार्यश्री जिनसुन्दरसूरीश्वरजी, पन्यासश्री इन्द्रजीतविजयजी, कल्परक्षितविजयजी सहित साध्वीश्री जिनधर्माश्रीजी एवं दिव्ययशाश्रीजी म.सा. आदि साधु साध्वियांे की निश्रा में लाभार्थी परिवारों द्वारा प्रात: ९ बजे प्रतिष्ठित होने वाली सभी प्रतिमाओं पर अठारह अभिषेक किए गए।इस मौके पर आचार्यश्री ने कहा कि प्रभु का अभिषेक करना मात्र एक प्रक्रिया नहीं है अपितु प्रभु के समान बनने की प्रक्रिया है। प्रभु का अभिषेक करने वाले अनेक पुण्यों का उपार्जन करते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि हमें प्रभु को अपने मन मंदिर में विराजमान करना है इसलिए हमें हमारे मन में अच्छे विचारों को मौका देना चाहिए। जब मन खाली व शुद्ध होगा तब जाकर हम मन मंदिर में प्रभु को विराजमान कर सकते है। दोपहर में सांझी एवं मेहन्दी वितरण का आयोजन किया गया जिसमें प्रतिष्ठा के निमित्त ब़डी संख्या में उपस्थित महिलाआंे ने मंगल गीत गाए तथा मेहंदी लगाई। शाम को आंगी व भक्ति का कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर अक्कीपेट जैन संघ के अध्यक्ष उत्तमकरण मेहता, कोषाध्यक्ष जीवराज कातरेला, भरतकुमार जैन, सुमनकुमार मेहता, नरपत लुंक़ड आदि ने व्यवस्था संभाली।शाम को मंदिर में प्रतिमाओं की विशेष अंगरचना की गई तथा भक्ति का आयोजन किया गया। शनिवार को सुबह ६ बजे कुंभ, दीपक स्थापना की जाएगी तथा ज्वारारोपण किया जाएगा। सुबह ८ बजे साध्वीश्री दिव्यधर्माजी म.सा. की ९१वीं ओली का पारणा, पगलिया होगा तत्पश्चात जिनालय वर्षगांठ एवं ध्वजारोहण होगा। सुबह १० बजे रथयात्रा का वरघो़डा निकाला जाएगा।

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