मडिकेरी/दक्षिण भारतदक्षिण भारत से यहां पहुंचे हजारों श्रद्धालु बुधवार को कावेरी नदी के उद्गम स्थल तलकावेरी पर आयोजित होने वाले वार्षिक धार्मिक समारोह ’’तीर्थोद्भव’’ में शामिल हुए। माना जाता है कि तलकावेरी ही वह स्थान है, जहां से समूचे दक्षिण भारत की जीवनदायिनी नदी कावेरी का जन्म होता है। यह कोडगु जिले की ब्रह्मगिरि पहा़डी के निचले हिस्से में स्थित है। यहां एक छोटे से तालाब से पानी के बुलबुलों के रूप में कावेरी नदी का प्रवाह शुरू होता है। आज यहां तीर्थोद्भव के मौके पर आयोजित समारोह में श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारों के साथ कावेरी उद्गम स्थल के दर्शन किए।पुरोहितों के मंत्रोच्चारों के बीच सटीक उसी समय तलकावेरी से कावेरी नदी प्रकट हुई, जो समय पहले से घोषित किया गया था। हमेशा की तरह इस चमत्कारी दृश्य से हर श्रद्धालु अवाक रह गया। इनमें से अधिकांश ने अपने सिर का मुंडन करवा रखा था। नदी के प्रकट होने के बाद उन्होंने तलकावेरी के मुख्य जलाशय में पवित्र स्नान किया। यह जलाशय ब्रह्म कुंडिके के सामने ही स्थित है, जहां कावेरी एक छोटे से झरने के रूप में प्रकट होती है। आज तीर्थोद्भव के जादुई असर वाले समय में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी श्रद्धलुओं के हुजूम के साथ पहली बार खुद भी शामिल हुए। उनके साथ उनके मंत्रिमंडल के कई सहकर्मी भी तलकावेरी में तीर्थोद्भव के दर्शनार्थ मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि तलकावेरी से जन्म लेने के बाद कावेरी नदी दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु के कई जिलों के लिए मुख्य जलस्रोत बन जाती है। इस नदी का जन्म छोटी बूंदों के रूप में होता है लेकिन सुज्योति और कन्निका जैसी सहायक नदियों के जल से पोषण पाकर यह समूचे दक्षिण भारत की प्राणरेखा बन जाती है। कावेरी के पूरे प्रवाह मार्ग में लक्ष्मातीर्थ, हेमावती, कपिला और कर्नाटक की कई अन्य प्रमुख नदियों का पानी भी इसमें आकर मिलता है और धीरे-धीरे यह एक ब़डी नदी बन जाती है। आज तीर्थोद्भव के मौके पर तलकावेरी पर स्थित मुख्य मंदिर के १३ पुरोहितों ने विधि-विधान के साथ कावेरी की पूजा-अर्चना शुरू की। उन्होंने श्रद्धालुओं पर तीर्थ की नदी का पानी छि़डका और इसके बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र जलाशय में डुबकियां लगाकर खुद को पवित्र किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं को कावेरी नदी के मंदिर में पूजा-अर्चना का मौका मिला। इस मौके पर मंदिर में स्थित कावेरी की प्रतिमा को सोने के आभूषणों से लाद दिया गया था।

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