जब किसी मसले पर स्थानीय लोगों में विवाद होता है तो वे उसके हल के लिए पोखूवीर की शरण में आकर गुहार करते हैं। यह परंपरा कई साल पुरानी है। अब तक काफी लोग पोखूवीर के मंदिर में आकर न्याय मांग चुके हैं।

नेटवाड़ा। भगवान के मंदिर में जाने के बाद श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि उनके दर्शन करें। क्या कोई देवता ऐसे भी हैं जिनके दर्शन से लोग डरते हों? आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताएंगे। यह मंदिर उत्तराखंड के नेटवाड़ा नामक स्थान पर स्थित है। यह स्थान उत्तरकाशी में आता है, जहां एक प्राचीन मंदिर है। स्थानीय लोग इसे न्याय के मंदिर के नाम से भी जानते हैं।

उनकी मान्यता है कि यहां आने से उन्हें न्याय मिलता है, परंतु प्राय: मंदिर में दर्शन नहीं किए जाते। इसकी वजह उनकी मान्यताएं और परंपराएं हो सकती हैं। माना जाता है कि इन देव के मुख के दर्शन नहीं किए जाते। इनका नाम पोखूवीर है। ये अपने भक्तों को न्याय अवश्य दिलाते हैं।

जब किसी मसले पर स्थानीय लोगों में विवाद होता है तो वे उसके हल के लिए पोखूवीर की शरण में आकर गुहार करते हैं। यह परंपरा कई साल पुरानी है। अब तक काफी लोग पोखूवीर के मंदिर में आकर न्याय मांग चुके हैं। उनके लिए यह स्थान किसी अदालत से कम नहीं होता। उनकी मान्यता है कि इस स्थान पर आकर कोई व्यक्ति झूठ नहीं बोलता। अगर बोलता है तो भविष्य में उसके साथ कोई अनिष्ट अवश्य होता है।

ऐसे भी कई उदाहरण दिए जाते हैं जब पोखूवीर ने चमत्कार दिखाया और अपने भक्त को न्याय दिया। इनके बारे में कई कथाएं प्रचलित है। उनमें से अधिकतर का संबंध महाभारत से बताया जाता है। कहते हैं कि पोखूवीर की पीठ की पूजा शुभ होती है। इस दौरान श्रद्धालु सच्चे मन से जो भी कामना करता है, वह अवश्य पूर्ण होती है।

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