bangladesh and pakistan
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इस्लामाबाद/ढाका। कभी एक मुल्क रहे पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से दो खबरें आई हैं। डूबते पाकिस्तान को चीन ने मदद देने का फैसला किया है, वहीं बांग्लादेश ने चीन से कर्ज न लेने का फैसला कर यह तय किया है कि वह 30 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले पुल का निर्माण खुद करेगा।

बुधवार को पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने बताया कि चीन उनके मुल्क को मदद देने के लिए तैयार हो गया है। इमरान जिस आर्थिक पैकेज की आस में चीनी राजनेताओं की शरण में पहुंचे थे, वह जल्द जारी हो जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था डूबने का खतरा अभी टल गया है। दूसरी ओर बांग्लादेश ने श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों से सबक लेकर चीनी कर्ज से तौबा कर ली है।

बांग्लादेश एक पुल का निर्माण करना चाहता है, जो वहां की बड़ी परियोजनाओं में से एक है। जब उसने श्रीलंका, मालदीव और नेपाल की हालत देखी तो वह कर्ज लेने के ​फैसले से पीछे हट गया। चीन इन देशों पर भारी कर्ज लादकर इनकी स्थिति खराब कर चुका है।

बांग्लादेश पद्मा नदी पर 20 किमी लंबा पुल बनाना चाहता है। इस पर करीब 30 हजार करोड़ का खर्चा आएगा। चर्चा थी कि बांग्लादेश सरकार इसके लिए चीन से कर्ज लेगी, परंतु अब उसने खुद ही यह वहन करने का फैसला किया है। एक अधिकारी ने कहा है कि पुल निर्माण के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय फंडिंग नहीं ली है। सरकार ने तय किया है कि किसी भी तरह के कर्ज से बचते हुए खुद की रकम लगाकर पुल बनाएंगे।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने कहा है कि मुल्क को 12 अरब डॉलर की जरूरत थी। इनमें से 6 अरब डॉलर की रकम देने के लिए सऊदी अरब तैयार हो चुका है। शेष रकम देने के लिए अब चीन ने सहमति जता दी है। यह कर्ज के रूप में मिलेगी। इससे पाकिस्तान का नकदी संकट खत्म हो गया है। सोशल मीडिया पर दोनों देशों के इस फैसले के बाद यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया में तुलनात्मक अध्ययन किया है।

कभी एक मुल्क के दो हिस्से रहे पाकिस्तान और बांग्लादेश की मौजूदा हालत काफी अलग है। जहां पाकिस्तान आतंकवाद के लिए बदनाम हो चुका है और चीन के कर्ज में फंसता जा रहा है। दूसरी ओर बांग्लादेश के हालात उससे कहीं ज्यादा अच्छे हैं। उसने चीन के कर्ज को ठुकराने का फैसला किया। बांग्लादेश के पासपोर्ट और मुद्रा की कीमत पाकिस्तानी पासपोर्ट और मुद्रा से कहीं ज्यादा है।

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