मैसूरु। विश्व प्रसिद्ध मैसूरुदशहरा महोत्सव का गुरुवार को पारंपरिक विधि से आगाज हुआ, जिसमें प्रसिद्ध कवि के एस निसार अहमद ने यहां चामुंडी पहाि़डयों के ऊपर देवी चामुंडेश्वरी की पूजा कर महोत्सव की शुरुआत की। पहा़डी के शीर्ष पर दस दिवसीय ४०८वें मैसूरू दशहरा महोत्सव के उद्घाटन पर हजारों लोग उपस्थित थे। भक्तों ने प्रार्थना के लिए चामुंडेश्वरी मंदिर के पास मानव श्रृंखला बनाई। उद्घाटन के पहले, मंदिर में आयोजकों ने सुबह ४ बजे से विभिन्न अनुष्ठानों को शुरू किया और देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति को औपचारिक स्नान कराया, जिसे बाद में रेशम की सा़डी और चांदी के रथ पर फूलों से सजाया गया। यद्यपि मंदिर में आने वाले आगंतुकों पर प्रतिबंध था बावजूद इसके मन्दिर में देवी चामुंडेश्वरी के दर्शन के लिए ब़डी संख्या में भक्तों ने कतार लगी थी।कवि निसार अहमद ने नंदी ध्वज के साथ पूर्णकुंभ को विधान किया और बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्दरामैया और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ देवी को पुष्प समर्पित किए। ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता कवि डी आर बेंद्रे की एक कविता से कुछ पंक्तियों का हवाला देते हुए निसार अहमद ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि मैं राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करना चाहते हैं कि उन्होंने ऐतिहासिक मैसूरू दशहरा महोत्सव के उद्घाटन समारोह में उनको आमंत्रित लिया। हालांकि मुझे जीवन में कई पुरस्कार मिले हैं लेकिन यह पल मेरे जीवन की एक यादगार घटना है। मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने कहा था कि वर्ष-१९७३ के बाद से राज्य सरकार द्वारा घोषित ’’नाड हब्बा’’ (राज्य महोत्सव) को पारंपरिक रूप से राज्य और उसके नागरिकों की भलाई में मनाया जाता है। यह उत्सव न केवल शहर बल्कि पूरे राज्य में भी मनाया जाता है। निसार अहमद ने कहा कि मैसूरू दशहरा महोत्सव का महान इतिहास है और अत्यंत धार्मिक उत्साह के साथ इसको मनाया जाता है। मैसूरू शहर, जिसे राज्य में सांस्कृतिक शहर भी कहा जाता है, को अपनी संस्कृति और उन लोगों के लिए स्वीकार किया जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में बेहद योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए निसार अहमद को धन्यवाद दिया। राज्य सरकार ने अपनी परंपरा और संस्कृति से समझौता किए बिना दशहरा उत्सव मनाने का फैसला किया। सिद्दरामैया ने कहा कि यहां हमारे साथ प्रसिद्ध कवि मौजूद हैं और उन्होंने हमेशा क़डी मेहनत की है और सार्वभौम भाईचारे के बारे में लिखा है और समाज में सद्भाव बनाए रखने के बारे में बात की है। सिद्दरामैया ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री के रूप में पिछले पांच दशहरा महोत्सव में भाग लिया है और आशा करता हूं कि मुख्यमंत्री के रूप में मुझे पांच और साल मिले। इस अवसर पर जिला प्रभारी मंत्री एच सी महादेवप्पा ने मैसूर राजपरिवार के नलवा़डी कृष्णराज वाडेयार के योगदान को याद किया जिन्होंने त्यौहारों की परंपरा को जारी रखा।प्रय्य्ब्र्‍ झ्द्यैंझ्द्यय्ृह्र ृय्स्द्य फ्द्बल्ह फ्ैंड·र्ल्ैं्यत्र ·र्ैंर्‍ द्वय्य·र्ैंदशहरा महोत्सव राज्य की शाही परंपराओं और राज्य के समृद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। शहर में अगले नौ दिनों के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। वर्ष १६१० के बाद से इस त्योहार का लंबा इतिहास रहा है और मैसूर वाडेयार परिवार ने इस विरासत को जारी रखा है। इस बीच, शाही परिवार ने मैसूरु महल परिसर के अंदर पारंपरिक तरीके से पूजा करके उत्सव का आगाज किया। मैसूर के शाही परिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडेयार ने शाही परिवार की परंपरा के अनुसार पहली बार पूजा की। ग्रंथों द्वारा निर्धारित धार्मिक कार्यों के अनुसार, वह स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हुए। यह प्रक्रिया दशहरा उत्सव के आखिरी दिन तक जारी रहेगी। इस मौके पर श्रीकतदत्ता वाडेयार की पत्नी प्रमोद देवी वाडेयार समेत शाही परिवार के सदस्य और विशेष आमंत्रित भी उपस्थित थे। अधिकारियों ने चामुंडी हिल्स पर विशेष रोशनी व्यवस्था बनाई है। दस दिन के भव्य जश्न के लिए पूरे शहर समेत कई मुख्य स़डकों, विरासती भवनों और सरकारी कार्यालयों सजाया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमो में सैक़डों कलाकार नौ दिनों के दौरान ३०० सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपना प्रदर्शन करेंगे। अधिकारियों ने पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन, फिल्म समारोह, भोजन मेला और अन्य कार्यक्रम भी रखे हैं। झ्श्नख्रप्रय्श्चद्मर्‍ फ्ैंख्र्‍त्र ृय्स्द्य ्यर्ड्डैंत्द्ब ·र्ैंय् ृय्द्मैंख्रइस साल के जश्न के भाग के रूप में ग्रामीण दशहरा, महिलाओं और बच्चों के लिए दशहरा और अन्य कार्यक्रम भी होंगे। पर्यटन मंत्री प्रियांंक खरगे ने राज्य के दशहरा पर्यटन को ब़ढावा देने के लिए कार्यक्रम का उद्घाटन किया। शाम में रौशन मैसूर महल के सामने संगीत समारोह का मेगा आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया जबकि ९० दिन मैसूर दशहरा प्रदर्शनी भी इस अवसर पर जनता के लिए खुली रहेगी। दशहरा महोत्सव के अन्य आकर्षण में फिल्म महोत्सव और फूल-शो भी आज शुरू हुए। मेगा समारोह ३० सितंबर को प्रसिद्ध दशहरा जुलूस (जंबो सवारी) के साथ खत्म हो जाएगा। इस कार्यक्रम के बाद बनीमंटप मैदान पर भव्य मशाल प्रकाश परेड किया जायेगा। केएसआरटीसी और पर्यटन विभाग ने इन दिनों पर्यटकों के लिए विभिन्न पैकेज टूर लिए हैं और शहर और आसपास के विभिन्न स्थानों का दौरा करने के अलावा अधिकारियों ने शहर में जाने के लिए ग्रामीणों के लिए विशेष पैकेज बनायें है। उत्सव के दौरान ५६०० से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किए जाने के साथ सभी स्थानों पर पुलिस अधिकारियों ने विस्तृत सुरक्षा उपाय किए हैं। उत्सव के दौरान शहर और आसपास के यातायात नियंत्रण के अलावा लोगों लगभग २०० विशेष कैमरों को स्थापित किया गया है।

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