चेन्नई। राज्य विधानसभा में सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल द्वारा दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की तस्वीर के अनावरण के खिलाफ राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अनावरण के केवल एक घंटे बाद ही द्रमुक ने मद्रास हाई कोर्ट में इस तस्वीर को हटाने की मांग के साथ एक अपील दायर की। द्रमुक का कहना है कि जयललिता को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया था ऐसे में विधानसभा में उनकी तस्वीर का अनावरण सही नहीं है।सोमवार की सुबह १०:३० बजे जैसे ही मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायाधीश अब्दुल कुद्दोसी ने कार्रवाई शुरू की, सीनियर वकील पी विल्सन ने द्रमुक की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। कोर्ट ने बताया कि पहले पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई की जाएगी, इसलिए डीएमके की याचिका पर सुनवाई मंगलवार को होगी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, जयललिता को आय से अधिक संपत्ति अर्जितउ करने के आरोप में विशेष न्यायालय ने दोषी ठहराया था, लेकिन इस फैसले को बाद में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पलट दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता और अन्य को इस मामले में दोषी पाया था। जयललिता की मौत हो जाने की वजह से उन्हें सजा नहीं सुनाई गई लेकिन अन्य आरोपियों को ४ वर्ष की सजा और १०० करो़ड रुपए जुर्माना और उनकी संपत्तियां जब्त किए जाने का आदेश कोर्ट द्वारा जारी किया गया था। उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर द्रमुक ने अनुरोध किया है कि सरकारी दफ्तरों, भवनों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सरकारी योजनाओं से जयललिता का नाम और उनकी तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया जाए। इस मामले पर अदालत ने सुनवाई शुरु नहीं की है। द्रमुक के नेताओं का कहना है कि पार्टी ऐसे किसी भी नेता की तस्वीर विधानसभा में उस स्थान पर लगाने के खिलाफ है जहां पर ऐसे बेदाग महान नेताओं की तस्वीर लगी हुई है जिन्होंने राज्य और राष्ट्र के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया है।द्रमुक नेताओं ने इस मामले के बारे में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्रियों की तस्वीरें लगाने की परंपरा रही है लेकिन अभी तक ऐसे किसी व्यक्ति की तस्वीर वहां पर नहीं है जिसे देश की सर्वोच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में दोषी करार दिया हो। यह एक प्रकार से उन महान नेताओं के लिए असम्मान प्रकट करना होगा जिनकी तस्वीर पहले से ही विधानसभा के सभा कक्ष की शोभा बढ रही है।

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