चेन्नई। चेन्नई और सेलम के बीच ढांचागत सुविधाओं का विकास करते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने इन दोनों शहरों को जो़डने के लिए १०,००० करो़ड रुपए की लागत से एक ग्रीन एक्सप्रेस कोरीडोर का निर्माण करने का प्रस्ताव रखा है। हरुर और तिरुवनमलै होते हुए बनाए जाने वाले इस कोरीडोर से मौजूदा समय में चेन्नई और सेलम को जो़डने वाले दो मार्गों की तुलना में कम समय लगेगा इसके साथ ही दोनों शहरों के बीच की दूरी भी कम हो जाएगी। मौजूदा समय में चेन्नई और सेलम को दो स़डकें जो़डती हैं जिनमें से एक अरुंदुलुरपेट और अथूर होते हुए और दूसरी वेल्लूर और कृष्णगिरि होते हुए गुजरती हैं।प्रस्तावित ग्रीन एक्सप्रेस कोरीडोर चेन्नई और सेलम को तिरुवन्नमलै से जो़डने का कार्य करेगा। मौजूदा समय में सेलम और चेन्नई के बीच जो दो स़डकें हैं उनकी लंबाई लगभग ३६० किमी है और नए कोरीडोर के निर्माण के बाद दोनों शहरों के बीच ६० किमी तक की दूरी कम की जा सकेगी। इसके साथ ही छह घंटे की यात्रा को महज तीन घंटों में पूरा किया जा सकेगा। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की तरह ही तैयार की जाने वाली तमिलनाडु में यह पहली परियोजना होगी। केन्द्रीय भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चेन्नई के दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में इस बात की जानकारी दी।नितिन गडकरी ने इससे पूर्व यहां मुख्यमंत्री ईडाप्पाडी के पलानीस्वामी एवं अन्य मंत्रियों की मौजूदगी में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की। बैठक में केंद्रीय वित्त एवं जहाजरानी मंत्री पोन राधाकृष्णन, राज्य के वन मंत्री डिंडिगल सी श्रीनिवासन और राजस्व मंत्री आर बी उदयकुमार तथा राज्य एवं केन्द्र सरकार के विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सेलम-चेन्नई परियोजना के साथ ही केन्द्र सरकार और राज्य सरकार चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेस कोरीडोर परियोजना के कार्यों को भी तेज करने की योजना बना रही है। नितीन गडकरी ने इस बैठक के दौरान कहा कि एक बार भूमि अधिग्रहण कार्य पूरा हो जाने के बाद, हम परियोजनाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित करेंगे। गडकरी ने बताया कि कुल मिलाकर छह ग्रीन कोरीडोर और रिंग रोड परियोजनाओं की समीक्षा की गई है और इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। इनका निर्माण कार्य ४३,००० करो़ड रुपए की अनुमानित लागत पर किया जाएगा। गडकरी ने बताया कि जिन परियोजनाओं की समीक्षा की गई है उनमें करूर-कोयंबटूर, मेलूर-तंजावुर, मदुरै-धनुषको़डी और महाबलीपुरम-पुदुच्चेरी परियोजना शामिल हैं। जल संसाधन और नदियों के जल के बंटवारे के मुद्दे पर गडकरी ने कहा कि केन्द्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन का कार्य कर रही है और यह भी सुनिश्चित कर रही है कि कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों के हितों को रक्षा की जा सके।मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने इस संबंध में पत्रकारों से बातचीत में कहा ‘मैंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड की आवश्यकता के विषय पर केन्द्रीय मंत्री से चर्चा की है। मैंने प्रधानमंत्री से भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समय में कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन करने का अनुरोध किया है।’’ पलानीस्वामी ने कहा नए बंदरगाहों की परियोजनाओं के साथ ही हम इस बात पर भी ध्यान के्द्रिरत कर रहे हैं कि राज्य के मछुआरों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को स़डकों के निर्माण और नदियों की परियोजनाओं को जो़डने का अनुरोध करते हुए तीन पत्र सौंपा।

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