डिंडीगल/चेन्नई। राज्य में बसों के किराए में की गई ब़ढोत्तरी की सभी राजनीतिक दलों ने तीव्र निंदा की है। वहीं, सरकार के इस फैसले से प्रभावित होने वाले दैनिक बस यात्रियों ने रविवार को स़डकों पर इसका तीखा विरोध किया। डिंडीगल जिले में ग्रामीणों ने इसके विरोध में स़डक रोको आंदोलन शुरू कर दिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि ब़ढाया गया किराया तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया जाए्। प्रदर्शनकारियों में मुख्यत: दैनिक मजदूरी करनेवाले शामिल थे। इनका कहना था कि २० जनवरी से बसों के किराए में जिस स्तर की ब़ढोत्तरी की गई है, उससे उनकी आय का एक ब़डा हिस्सा दैनिक यातायात का खर्चा पूरा करने में ही निपट जाएगा। तिरुवन्मलई के चेंगम और तंजावुर के कई इलाकों में भी बस किराया ब़ढाने के खिलाफ इसी प्रकार के विरोध-प्रदर्शनों की खबर मिली है। स्वाभाविक तौर पर प्रदेश की राजनीति में मुख्य विपक्षी दल द्रवि़ड मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) ने सरकार के इस फैसले का तुरंत विरोध शुरू कर दिया है। अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर खामोश नहीं बैठे हैं, क्योंकि उनकी नजर में आम जनता के हितों को प्रभावित करनेवाला यह मुद्दा सीधे जनता के दिल से जु़डता है। उन्होंने राज्य सरकार को ’’आम जनता को दुखी देखकर सुखद अनुभव प्राप्त करनेवाला’’ मानते हुए इसके फैसले को नागरिकों के लिए ’’वज्राघात’’ सरीखा माना। सरकार की आलोचना करने वाली पार्टियों में द्रमुक के साथ ही पीएमके भी सामने आ गई है। जहां पीएमके ने इसके खिलाफ २५ जनवरी को चेन्नई में धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है वहीं द्रमुक भी २७ जनवरी को सरकार पर दबाव बनाने के लिए इसी प्रकार का कदम उठाने जा रही है। जब आम जनता से जु़डा मसला हो तो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) औरों से पीछे छूटना पसंद नहीं करती। सो, इसने भी सोमवार यानी २२ जनवरी को ही सरकार पर बस किराया ब़ढाने का निर्णय वापस लेने का दबाव बनाने के लिए प्रदर्शन करने की घोषणा की है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ईके पलनिस्वामी ने शनिवार को बसों के किराए में वृद्धि की घोषणा करते हुए कहा था कि राज्य सरकार ’’काफी क्षोभ’’ के साथ यह निर्णय लेने को बाध्य हो रही है, क्योंकि अब इसे टाला नहीं जा सकता। ईंधनों की कीमतों में वृद्धि और वाहनों के रख-रखाव की ब़ढी हुई लागत के मद्देनजर यह निर्णय अनिवार्य हो गया है। वहीं, करूर में पत्रकारों से रू-ब-रू होते हुए राज्य के परिवहन मंत्री एमआर विजयभास्कर ने कहा, ’’हम जनता से इस निर्णय के लिए क्षमा प्रार्थना करते हैं्। कुछ अनिवार्य कारणों से तमिलनाडु सरकार को बसों का किराया ब़ढाने के लिए बाध्य होना प़डा।’’ उन्होंने इसके साथ ही शनिवार को स्पष्ट किया था कि यह निर्णय वापस लेने की कोई संभावना नहीं है।

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