गौरी मेरे लिए दोस्त, पहला प्यार और सादगी का सर्वोच्च उदाहरण थी : चिदानन्द

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बेंगलूरु। पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की निर्मम हत्या के बाद उनके पति चिदानन्द राजघट्टा ने अपनी पत्नी को याद करते हुए फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी है जिसमें चिदानन्द लिखते हैं, गौरी उनके लिए लेफ्टिस्ट, रेडिकल, हिंदुत्व-विरोधी और सेकुलर जैसी कुछ भी नहीं थी बल्कि वह दोस्त, पहला प्यार और सादगी का सर्वोच्च उदाहरण थी। पत्रकार गौरी लंकेश के पूर्व पति चिदानन्द राजघट्टा की ओर से फेसबुक पर लिखा संस्मरण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। चिदानन्द लिखते हैं कि अगर गौरी लंकेश खुद पर लिखी श्रद्धांजलियां और तारीफें पढ़ रही होती तो हॅंसती, खास तौर पर जिनमें आत्मा, मृत्य के बाद जीवन और स्वर्ग इत्यादि का जिक्र है। अगर वह नहीं भी हॅंसती तो मुस्कराती जरूर। चिदनन्द राजघट्टा ने लिखा है कि उन्होंने और गौरी लंकेश ने किशोरावस्था में तय कर लिया था कि स्वर्ग, नरक और पुनर्जन्म जैसी चीजें बकवास हैं।

गौरी लंकेश और चिदानंद का शादी के पांच वर्ष बाद ही तलाक हो गया था। चिदानंद टाइम्स ऑफ इंडिया के अमेरिकी संवाददाता के रूप में व्हाइट हाउस को कवर करते हैं। उनकी गिनती अमेरिका के रसूखदार स्तंभकारों में होती है। अपनी पोस्ट में चिदानन्द राजघट्टा ने बताया है कि उनकी गौरी लंकेश से मुलाकात बेंगलूरु के नेशनल कॉलेज में हुई थी जो तर्कवादियों की जन्मस्थली है। किशोरावस्था से ही गौरी और चिदानन्द धार्मिक गुरुओं, अंधविश्र्वासों, कुरीतियों पर सवाल उठाते रहे थे। चिदानन्द ने पांच साल के प्रेम के बाद गौरी से शादी की थी। हालांकि शादी के पांच साल बाद ही दोनों का तलाक हो गया। चिदानन्द के अनुसार तलाक के बाद भी दोनों अच्छे दोस्त बने रहे। चिदानन्द के अनुसार कॉलेज में गौरी को उनका सिगरेट पीना नापसंद था। बाद में जब उन्होंने सिगरेट पीना छोड़ दिया लेकिन तब तक गौरी खुद सिगरेट पीने लगी थीं। एक बार गौरी जब चिदानन्द के पास अमेरिका गई थीं तो उन्होंने उनसे सिगरेट पीना छोड़ने के लिए कहा। गौरी ने जवाब दिया, मुझे तो तुम्हारी वजह से ही सिगरेट की लत लगी। जब चिदानन्द ने उनसे कहा कि वे उनकी सेहत की चिंता के चलते सिगरेट छोड़ने के लिए कह रहे हैं तो इस पर गौरी ने जवाब दिया, मैं तुमसे ज्यादा दिन जिंदा रहूंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

चिदानन्द के अनुसार तलाक के बावजूद दोनों में कभी कड़वाहट नहीं आई। शादी के दौरान उनके बीच कुछ अनबन हुई लेकिन दोनों बहुत जल्द उससे आगे बढ़ गए। चिदानन्द के अनुसार जिस दिन अदालत में उनका तलाक हुआ वो एक-दूसरे का हाथ पकड़े कोर्ट पहुंचे थे और तलाक के बाद एक साथ एमजी रोड के ताज डाउन में लंच करने गए थे। चिदानन्द ने लिखा है कि तलाक के बाद भी वह दिल्ली फिर मुंबई और बाद में वाशिंगटन डीसी में उनसे मिलती रहती थीं। चिदानन्द राजघट्टा ने याद किया है कि करीब आठ साल पहले जब उन्होंने अपने बेंगलूरु स्थित घर पर एक महिला को सहायक तौर पर रखा तो गौरी ने उस सहायक की दोनों बेटियों आशा और उषा की पढ़ाई के लिए उन्हें ताकीद की थी। दोनों लड़कियों ने कॉलेज तक पढ़ाई की और अब वह दोनों नौकरी करती हैं। एक बैंक में और एक एनजीओ में। चिदानन्द ने लिखा है, गौरी लंकेश के कारण आज सैंकड़ों आशा और उषा हैं।

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