चेन्नई। तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत ने जब से इस बात के संकेत दिए हैं कि वह राजनीति में आ सकते हैं उस दिन से राज्य के विभिन्न वर्गों मंें इस बात को लेकर चर्चा हो रही है। इसी क्रम में सोमवार को तमिझार मुनेत्र कषगम (टीएमपी) नामक एक तमिल संगठन के सदस्यों ने रजनीकांत के राजनीति में प्रवेश करने का विरोध किया। जब इस संंगठन के सदस्यों का विरोध प्रदर्शन उग्र होने लगा तो पुलिस ने टीएमपी के ३० कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। सोमवार को टीएमपी के लगभग ५० कार्यकर्ता कैथेड्रल रोड पर पहुंचे और अपने नेता वीरालक्ष्मी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य में लाखों तमिल मौजूदा हैं जो राज्य पर शासन कर सकते हैं और वह यह नहीं चाहते कि प़डोसी राज्य से यहां पर आजीविका अर्जित करने के लिए आया एक व्यक्ति राजनीति में आए और उन पर शासन करे। इन प्रदर्शनकारियों ने कैथेड्रल रोड पर रजनीकांत का पुतला फूंका और उनके खिलाफ नारेबाजी की और पोएस गार्डन स्थित रजनीकांत के घर की ओर बढने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें कैथेड्रल रोड पर ही रोक दिया। हालांकि जब पुलिस द्वारा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का अनुरोध करने के बाद भी प्रदर्शनकारी यह विरोध प्रदर्शन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हुए तो पुलिस ने टीएमपी के ३० कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।इसी क्रम में तमिल संगठन द्वारा इस प्रकार से विरोध प्रदर्शन को देखते हुए रजनीकांत के घर की सुरक्षा बढा दी गई है। पुलिस उपायुक्त सर्वणन, सात पुलिस इंस्पेेक्टरों और तीन सहायक पुलिस आयुक्त सेल्वम, गुणाशेखरन और सुब्रमणी के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम को रजनीकांत के घर के सामने तैनात कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार रजनीकांत के घर की ओर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेड लगा दिया गया है। रजनीकांत के घर की ओर जाने वाले सभी वाहनों की जांच करने के बाद ही उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी जा रही हैं।ज्ञातव्य है कि दो दिनों पहले पेरियार द्रवि़डार कषगम (पीडीके) के कार्यकर्ताओं ने भी कोयंबटूर के गांधीपुरम में रजनीकांत का पुतला फूंका था। हाल ही में रजनीकांत ने चेन्नई मंें अपने प्रशंसकों के साथ मुलाकात के दौरान उन्हें अपने राजनीति में प्रवेश को जंग की संज्ञा देते हुए इस जंग के लिए तैयार रहे। उन्होंने हाल ही में शहर के राघवेन्द्र कल्याण मंडपम में अपने प्रशंसकों के साथ बातचीत के दौरान खुद को सच्चा तमिल बताया था और राजनीति में अपने प्रवेश का संकेत देते हुए कहा था कि अगर तमिलनाडु के लोग उन्हें बाहर जाने के लिए कहेंगे तो उनके कदम हिमालय की वादियों की ओर जाएंगे और कहीं नहीं।

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