दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कबेलगावी। संतश्री ललितप्रभसागरजी ने बुधवार को यहां पांगुल गली स्थित जैन उपाश्रय भवन में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में कहा कि गुस्सा और चिंता जीवन की खुशियों को खत्म करने वाले दो मुख्य दुश्मन हैं। अगर हमें सदा खुश रहना है तो चिंता और गुस्से से बचकर रहना होगा। खुश रहने का पहला मंत्र देते हुए संतश्री ने कहा कि जो व्यक्ति कार्य करने से पहले मुस्कुरा लेता है उसका हर कार्य प्रभु की पूजा बन जाता है। हर समय मुस्कान से भरे रहना अपने आप में ईश्वर की सर्वोपरि पूजा और भक्ति है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने आप को लाफिंग बुद्धा अर्थात् हंसता-मुस्कुराता हुआ बुद्ध पुरुष बना लेना चाहिए। संतश्री ने कहा कि लाफिंग बुद्धा की मूर्ति लगाने से घर-दुकान के वास्तुदोष दूर होंगे या नहीं होंगे यह पक्का नहीं है, पर जो स्वयं को ही लाफिंग बुद्धा बना देता है उसके जीवन के सारे दोष अपने-आप दूर हो जाते हैं। ललितप्रभजी ने कहा कि सुख-दुख प्रकृति और जीवन के हिस्से हैं। साइकिल के पहिए की तरह ये ऊपर-नीचे होते रहते हैं, पर जो सुख के साथ दुख का भी आनंद उठाना जानता है और जीवन में आने वाले नाखुशी के पलों में से नकारात्मकता के न को हटा देता है वह सदाबहार खुश रहता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति सदा बदलती रहती है। संयोग-वियोग, लाभ-हानि, जन्म-मरण, सम्मान-अपमान, अनुकूलता-प्रतिकूलता, रिश्ते-नाते, विचार-व्यवहार सब परिवर्तनशील हैं। अच्छी-बुरी परिस्थितियों का सामना सब को करना प़डता है। जो प्रकृति की इस परिवर्तनशीलता के रहस्य को समझ लेता है वह जीवन में आने वाली हर उठापठक से मुक्त हो जाता है और सदाबहार मस्त और प्रसन्न रहता है। मंच संचालन कांतिलाल जैन ने किया। सभी का आभार राजेन्द्र जैन ने ज्ञापित किया।

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