chundhi ganesha jaisalmer
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जैसलमेर। रोटी, कपड़ा और मकान हर इनसान की बुनियादी जरूरतें हैं। खासतौर से हर किसी का सपना होता है कि उसके सिर पर अपनी छत हो। इस सपने को पूरा करते-करते लोगों की ज़िंदगी बीत जाती है। राजस्थान में गणेशजी का एक ऐसा मंदिर है जिसके बारे में यह मान्यता है कि जो यहां सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसे भगवान आशीर्वाद देते हैं और उसका घर बन जाता है। इस वजह से हर साल हजारों की तादाद में लोग इनके दर्शन करने आते हैं।

गणेशजी का यह मंदिर जैसलमेर में है। श्रद्धालु कहते हैं ​कि यह धाम बहुत प्राचीन है। इसे कम से कम 1,400 साल पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि यहां चंवद नामक संत तपस्या करते थे। कालांतर में यह स्थान उनके नाम से ही प्रसिद्ध हो गया। आज इसे चूंधी के नाम से जाना जाता है। उनके अलावा दूसरे संत-महात्माओं ने यहां भगवान का ध्यान लगाया था। इस स्थान के कण—कण में उनका तपोबल माना जाता है।

मंदिर में जिस प्रतिमा का पूजन किया जाता है, उसके बारे में मान्यता है कि वह स्वत: धरती से प्रकट हुई थी। तब से लेकर आज तक यहां अनगिनत लोग दर्शन करने आ चुके हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपने जीवन में हुए चमत्कारों के बारे में बताते हैं। उनका मानना है कि जब यहां आकर भगवान गणपति से अरदास की तो उनका घर बन गया।

मंदिर के पास पास ही दो कुएं हैं, जो बहुत प्राचीन हैं। इनके साथ भी श्रद्धालुओं की मान्यताएं जुड़ी हैं। एक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक महिला गंगाजी में स्नान करने हरिद्वार गई थीं। उसने हाथों में सोने के कंगन पहने थे। स्नान करते समय एक कंगन गंगाजी में ही गिर गया। बाद में वह इस स्थान पर आई और गणेशजी से विनती की। एक बार उसने कुएं से पानी निकाला तो आश्चर्यजनक रूप से उसका कंगन बाहर आ गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि गणपति उस कार्य को भी संभव कर दिखाते हैं जिसे संसार असंभव मानता है।

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