दाल-चीनी, हल्दी, इलायची, काली मिर्च और लौंग आदि में पोषक तत्व , एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन और पॉलीफेनल प्रचुर मात्रा में होते हैं। उदाहरण के लिए हल्दी औषधीय गुणों से भरपूर है, जो सूजन को नियंत्रित करती है और प्राकृतिक एंटीबायोटिक का काम करती है। इसी तरह मिर्च में कैपसायसिन होता है, जो भूख और वजन दोनों को नियंत्रित रखता है। छौंक में इस्तेमाल होने वाला पंचफोरन (मेथी, अजवायन, कलौंजी, सौंफ और जीरा) एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। कलौंजी में जहां एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, वहां आयुर्वेद में मेथी के पेस्ट को माइग्रेन के इलाज में कारगर माना गया है।द्भष्ठ घ्ट्टद्मर्‍ ब्स्र क्वय्फ् ट्टह्द्बस्ट्टह् ·र्स्ैंघ्ृझ्टोमैटो कैचअप, खासतौर पर घर पर बनी चटनी में लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होता है। दरअसल कच्चे टमाटर की तुलना में पके हुए टमाटर में छह गुणा लाइकोपीन होता है। घर पर बनी चटनी, लाइकोपीन की अधिकता के कारण इम्युनिटी को ब़ढाती है, त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद है और कई तरह के कैंसर को रोकने में भी कारगर है।फ्द्यफ्ह्र ·र्ैंर्‍ घ्ट्टद्मर्‍ सरसों के दानों में ग्लूकोसिनोलेट्स होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को ब़ढने से रोकते हैं। सरसों के छोटे-छोटे दानों में सेलेनियम और मैग्नीशियम एंटी-ऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो रूमेटॉयड अर्थराइटिस में लाभ पहुंचाते हैं। छाती की जक़डन और माइग्रेन में भी इससे राहत मिलती है। समुद्री भोजन के साथ जब सरसों के दानों को पकाया जाता है तो मछली आदि में ओमेगा-३ की मात्रा ब़ढ जाती है।्यद्बघ्श्च हरी या लाल मिर्च में विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ जुकाम और कैंसर दोनों को उत्पन्न होने से रोकता है। इसके सेवन से कोलेजन पैदा होता है, जो त्वचा के लिए अच्छा होता है। मिर्च में कैपसायसिन भी होता है, जो सूजन को कम करता है और मांसपेशियों को राहत देने वाली क्रीम में इस्तेमाल किया जाता है।ख्रय्ध्-घ्र्‍द्मर्‍इसे फ्लेवर के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पुलाव, रायते और विभिन्न अनाजों में भी उपयोग करते हैं। टाइप-टू डायबिटीज वालों में रक्त शर्करा में होने वाला उतार-च़ढाव इससे नियंत्रित रहता है। नियमित तौर पर इसका आधा चम्मच सेवन ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियमित और सीरम ट्राइग्लिसेराइड को कम रखता है। इसके एंटीबायोटिक और सूजन को कम करने वाले गुण जो़डों के दर्द में राहत देते हैं।ंध्य्द्भघ्र्‍पोषक तत्वों से भरपूर दो या तीन इलायची चबाने से जुकाम, एसिडिटी, सीने में जलन व कब्ज में राहत मिलती है। इलायची किडनी से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है और इससे जुकाम और फ्लू में भी राहत मिलती है। मुंह को ताजगी देने के साथ यह मुंह में अल्सर की आशंका को भी रोकती है।झ्रुख्रर्‍द्मय् घ्ट्टद्मर्‍पुदीना पत्तियों में मौजूद मेथनॉल पाचन तंत्र की मांसपेशियों को राहत देता है तथा इससे एसिडिटी में भी राहत मिलती है। अन्य हरी सब्जियों की तरह इसमें विटामिन बी-९ होता है, जो कोशिकाओं के दोबारा बनने में मदद करता है।द्यष्ठठ्ठर्‍द्बष्ठठ्ठ फ्य्स्रफ्य·र्ैंत्रद्मर्‍ र्ड्डैंय्द्भख्रष्ठद्बैंख्र? बाजार में मौजूद रेडीमेड सॉस की बोतलों में सोडियम और शुगर काफी मात्रा में होते हैं, जिनकी अधिक मात्रा सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है, लेकिन कभी-कभार खाने की दूसरी चीजों में नमक और चीनी को नियंत्रित रख कर सीमित मात्रा में बाजार की सॉस का सेवन करना सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता।

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