चंदन नगरी मैसूरु के बाजार में गणेश उत्सव की धूम, गणपति पूजन की हो रही तैयारी

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मैसूरु/दक्षिण भारत। आज गौरी व कल गणेश उत्सव है। कर्नाटक में गौरी-गणेश उत्सव का अपना ही महत्त्व है। गौरी-गणेश उत्सव से उत्सवों का सिलसिला शुरू होता है। कर्नाटक में भगवान गणेश के साथ मां गौरी की भी विशेष पूजा की जाती है। उत्सव के मद्देनजर कई स्थानों पर मिट्टी से बनी गौरी व गणेश की प्रतिमाएं ख़रीदी जा रही हैं। बढ़ते प्रदूषण को रोकने व पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देने के लिए मिट्टी से बनी इको फ्रेंडली प्रतिमाएं लोगों की पहली पसंद बनी हुुई हैं।

शहर में गुरुवार को गणेश चतुर्थी पर इन प्रतिमाओं की स्थापना होगी। चंदननगरी मैसूरु में घर-घर में रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश का पदार्पण होगा। धूमधाम से श्रद्धालु प्रतिमाओं को घर में विराजमान करेंगे। इसके साथ ही पूजन व दस दिवसीय आयोजन का दौर शुरू हो जाएगा। कई प्रतिमाओं को एक दिन बाद ही विसर्जित कर दिया जाता है तो कई को तीन दिन के बाद। मंडलों द्वारा स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं को सामान्यतः दस दिन के बाद अनंत चतुदर्शी पर विसर्जित किया जाता है।

दस दिवसीय उत्सव के तहत भक्ति संगीत, आरती, छप्पन भोग, विशेष शृंगार आदि के कार्यक्रम होते हैं। पिछले कुछ दिनों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गणेश प्रतिमाओं को ख़रीदने व बुकिंग करने का दौर सुबह से लेकर देर शाम तक चल रहा है। लोग विभिन्न आकृतियों और आकार प्रकार की छवि वाली गणेश प्रतिमाओं को पसंद कर रहे हैं तथा मंडलों द्वारा प्रतिमाएं बुक कराई जा रही हैं।

प्रतिमाओं की स्थापना के लिए रविवार को ही शहर भर में दर्जनों पांडाल तैयार हो चुके हैं और उनकी सजावट भी शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ अब प्रवासी लोग भी बड़ी संख्या में अपने अपने देवालयों के परिसरों में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना कर इस त्यौहार को मनाने लगे हैं।

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