खुशी से खुलते हैं स्वर्ग के रास्ते : संत चन्द्रप्रभ

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दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कहिरियूर। संतश्री चन्द्रप्रभसागरजी महाराज ने कहा है कि खुशहाली से ब़ढकर जीवन की कोई दौलत नहीं होती है। भीतर की खुशी से ही स्वर्ग के रास्ते खुलते हैं। मन में खुशी है तो थो़डे से साधन भी सुख दे देते हैं, नहीं तो ढेर सारे साधन भी इकठ्ठे कर लो पर उससे कुछ होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जिसका मन हर हाल में खुश है उसे एक या दो घंटे की नहीं बल्कि पूरे २४ घंटे की सामायिक का लाभ मिल जाता है क्योंकि खुशी में महावीर का मौन और मीरा की मस्ती भी छिपी रहती है। सदाबहार शांति पाने के लिए व्यक्ति को हर हाल में खुश रहना सीखना होगा। संतश्री मंगलवार को जैन मंदिर रो़ड के पास जैन धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। संतश्री ने कहा कि व्यक्ति आज शरीर से कम, दिमाग से ज्यादा बीमार है। चिंता और तनाव आज की सबसे ब़डी बीमारियाँ हैं। बाहर से मुस्कुराता हुआ दिखाई देेने वाला इंसान भीतर में हजारों तरह की चिंताएँ पाले बैठा है। मक़डी के जाले से भी ज्यादा उलझने इंसान के दिमाग में है। गुस्से और चिंता को मानसिक शांति के दुश्मन बताते हुए संतश्री ने कहा कि गुस्से से दिमाग में स्क्रेच आ जाते हैं, सोचने, बोलने और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। चिंता को आत्मघातक रोग बताते हुए संतश्री ने कहा कि चिंता करना तो खुद पर कुल्हा़डी चलाने जैसा है। व्यक्ति बचपन से लेकर पचपन तक या तो अतीत की चिंता करता है या फिर आने वाले कल की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति चिंता करने की बजाय कल का इंतजाम और आज का चिंतन करे। चिंतामुक्त जीवन जीने का पहला मंत्र देते हुए संतश्री ने कहा कि जीवन में जो भी हो, जैसा भी हो हर होनी का स्वागत करें। उन्होंने कहा कि जब भगवान चोंच के साथ चुग्गा देता है और बच्चे को जन्म देने से पहले माँ के आँचल को दूध से भर देता है फिर हम किस बात की चिंता करें? व्यक्ति चिंता की चिता जलाए और चेतना को जगाए। कार्यक्रम में अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। १५ को चित्रदुर्गा में संतों का प्रवचन होगा।

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