चेन्नई। विश्वविद्यालयों शिक्षक संघ (एटीयू)ने यह आरोप लगाया है कि नए सत्र शुरु के शुरु होते ही कई सरकारी और सरकारी अनुदान प्राप्त विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिला देने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इन आरोपों के साथ ही सरकार से अनुरोध किया गया है कि विश्वविद्यालयों में हो रही इस प्रकार की अनियमितताओं को रोकने के लिए जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय शिक्षक संघ(एयूटी) ने कहा है कि नियमों के अनुसार बहुत सारे विश्वविद्यालयों ने दाखिला कमेटी का गठन नहीं किया है।एटीयू के अनुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) द्वारा विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए गत वर्ष कई दिशा निर्देश जारी किए गए थे। यूजीसी ने अपने इन सभी दिशा निर्देशों से सरकारी और सरकारी अनुदान प्राप्त विश्वविद्यालयों को अवगत कराया था। इन दिशा निर्देशों का पालन करना राज्य एवं केन्द्र दोनों ही प्रकार के विश्वविद्यालयोंे के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन दिशा निर्देशों का पालन करने मेंे विश्वविद्यालयों द्वारा रुचि नहीं दिखाई जा रही है। शेट्टू ने कहा कि अगर किसी विश्वविद्यालय द्वारा दाखिला कमेटी का गठन किए बिना विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।राज्य कॉलेजिएट शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुसार सभी कॉलेजों को बारहवीं की परीक्षा के परिणामों के घोषित होने के १२ दिनों के बाद दाखिले की प्रक्रिया शुरु करनी है। हालांकि कई कॉलेज जानबूझकर इसमें देरी करते हैं। उन्होंने बताया कि दिशा निर्देशों के अनुसार अनुदानित कॉलेजों को पहले अपने यहां उन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को दाखिला देना है जो अनुदानित है और उसके बाद गैर अनुदानित पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया शुरु करनी है हालांकि कॉलेजों द्वारा ठीक इसके उलट कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सभी कॉलेजों को एक विद्यार्थी को सिर्फ एक पाठ्यक्रम में आवेदन करने के लिए ही आवेदन पत्र देना चाहिए लेकिन कॉलेजों द्वारा एक ही विद्यार्थी को तीन-तीन पाठ्यक्रमों में आवेदन करने की छूट दे दी जाती है। यह सामाजिक और आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। एक पाठ्यक्रम में आवेदन करने के लिए विद्यार्थियों को ४०० से लेकर १००० रुपए तक का भुगतान करना होता है और ऐसे में आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थी कई पाठ्यक्रमों में आवेदन नहीं कर पाते। एटीयू ने सरकार से अनुरोध किया है कि यूजीसी और कॉलेजियट शिक्षा विभाग के दिशा निर्देशों को राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करवाया जाना चाहिए।

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