उडुपी। श्री विद्याधीश तीर्थ स्वामी गुरुवार को आठ सौ वर्ष पुराने श्री कृष्ण मठ की पर्याय पीठ पर आरुढ हुए। वे आठ मठों वाले श्री कृष्ण मठ-मंदिर के पलिमार मठ से आते हैं और दूसरी बार पर्याय बने हैं जिसे सर्वजन पीठ भी कहा जाता है। इस प्रकार पलिमार पीठाधीश को अब अगले दो वर्षों के लिए मठ में भगवान कृष्ण की पूजा करने एवं मठ का संचालन करने का अधिकार हो गया। इस अवसर पर गुरुवार त़डके करीब ३.३० बजे भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। बाद में विविध प्रकार के धार्मिक विधानों के उपरांत उन्होंने पेजावर पीठाधीश श्री विश्वेशतीर्थ स्वामीजी से पर्याय की पीठ ग्रहण की।गौरतलब है कि पेजावर पीठाधीश रिकॉर्ड पांच बार पर्याय रहे हैं। मठ में पर्याय प्रणाली की शुरुआत वर्ष-१५२२ से मानी जाती है जिसके तहत हर दो वर्ष में पर्याय बदल जाते हैं। हालांकि पेजावर पीठाधीश के साथ यह परंपरा बदल गई और उन्हें पांच बार पर्याय पद पर आरुढ किया गया। इस प्रकार ऐसा करने वाले वे पहले पीठाधीश हुए। पर्याय आरुढन के ऐतिहासिक अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकली और पेजावर पीठ ने पर्याय के रूप में अंतिम बार विसर्जन पूजा की। बाद में पलिमार पीठ के विद्याधीश तीर्थ स्वामी ने पूजा की। ख्ररूफ्द्यर्‍ द्धय्द्य झ्द्भय्श्चद्भ द्धद्मष्ठ ्यप्श्रय्थ्र्‍प्रय् डप्य्द्बर्‍विद्याधीश तीर्थ स्वामी का जन्म १३ मई १९५६ को दक्षिण कन्ऩड जिले में हुआ था और वर्ष-१९७९ से वे इस प्रमुख धर्म क्षेत्र के प्रशासन से जु़डे हैं। यह उनका पर्याय के रूप में दूसरा चरण है। इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मस्थला के धर्माधिकारी डॉ वीरेन्द्र हेग़डे ने की। जिला प्रभारी मंत्री प्रमोद माधवराज, उडुपी चिकमगलूरु सांसद शोभा करंदलाजे सहित कई अन्य गणमान्य जन उपस्थित हुए।

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