पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी

मास्को/दक्षिण भारत। भारत द्वारा अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले से बौखलाए पाकिस्तान के नेता दुनियाभर में कश्मीर राग अलापते हुए समर्थन मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें भारत के खिलाफ अब तक कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली है।

बुधवार (14 अगस्त) को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सहित कई ​वरिष्ठ नेताओं ने कश्मीर का मुद्दा उठाया। रूस दौरे पर गए उसके विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी खाली झोली लेकर ही लौटे हैं। उन्हें रूसी नेतृत्व से भारत के खिलाफ न कोई मदद मिली और न ही आश्वासन। रूस ने जम्मू-कश्मीर मामले में पाक का साथ देने से मना कर दिया है। उसने यह मुद्दा द्विपक्षीय वार्ता से सुलझाने की नसीहत दी है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बुधवार को अपने रूसी समकक्ष से मुलाकात की और उम्मीद जताई कि उन्हें इस मसले पर समर्थन मिलेगा। इसके उलट, रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की जरूरत है। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि भारत-पाक के बीच मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक तौर पर द्विपक्षीय बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

रूस ने यह कहते हुए पाक के अरमानों पर पानी फेर दिया कि जम्मू-कश्मीर को लेकर किया गया बदलाव और इसका बंटवारा कर दो केंद्र शासित प्रदेशों के निर्माण का फैसला भारतीय गणराज्य के संविधान के अनुसार ही लिया गया है। इसके साथ ही रूस ने पाकिस्तानी मंत्री को यह कहते हुए इशारों में नसीहत दे दी कि वह उम्मीद कर है कि दोनों देश शिमला समझौते और लाहौर घोषणपत्र के तहत अपने मुद्दे सुलझाएंगे।

गौरतलब है कि भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर के संबंध में लिए गए फैसले के ऐलान के बाद पाकिस्तान कई देशों के सामने मदद के लिए हाथ फैला चुका है लेकिन उसे वहां से निराशा ही हासिल हुई है। उसका सबसे गहरा मित्र चीन भी स्पष्ट समर्थन देने से पल्ला झाड़ चुका है। चीन ने कहा कि दोनों देश बातचीत से मुद्दा सुलझाएं। वहीं, पाकिस्तान यह मामला तुर्की, सऊदी अरब, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के सामने उठाकर हस्तक्षेप की मांग कर चुका है लेकिन वहां से उसके लिए कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं आई।