Shashi Tharoor
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नई दिल्ली/भाषा। सर्बिया में अंतर संसदीय संघ (आईपीयू) की बैठक में कश्मीर मुद्दा उठाने को लेकर पाकिस्तान को आई्ना दिखाते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह विडंबना है कि जम्मू-कश्मीर में अनगिनत आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार देश इस तरह के दुर्भावनापूर्ण प्रयास कर रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल थरूर ने बुधवार को कहा कि भारत की संसद इस तरह के दुर्भावनापूर्ण प्रयासों को सफल नहीं होने देगी। भारतीय संसदीय शिष्टमंडल ने अंतर-संसदीय संघ के 141वें सम्मेलन में पाकिस्तान के निराधार आरोपों का खंडन किया।

भारतीय संसदीय शिष्टमंडल की तरफ से थरूर ने कहा, पाकिस्तान ने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए जो मुद्दा उठाया है वह भारत का आंतरिक मामला है और इस चर्चा का हिस्सा नहीं है। भारतीय शिष्टमंडल इसे पूरी तरह खारिज करता है और इस प्रकार के मुद्दों को उठाए जाने की कड़ी निंदा करता है।

उन्होंने कहा, मैं भारत में मुख्य विपक्षी दल का संसद सदस्य हूं। हम जम्मू और कश्मीर तथा अन्य मुद्दों के बारे में अपनी सरकार से चर्चा और वाद-विवाद करने के लिए अपने संसदीय मंच का प्रयोग करते रहेंगे। इसलिए यह लड़ाई अपने देश में और संसद सदस्य के रूप में होगी। हमें सीमा-पार से अवांछित हस्तक्षेप की न तो जरूरत है और न ही हम इसका समर्थन करते हैं।

उन्होंने कहा, जम्मू और कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है। यह विडम्बना ही है कि जो देश जम्मू-कश्मीर में अनगिनत सीमापार आतंकवादी हमले करने के लिए जिम्मेदार है, वह कश्मीरियों का मसीहा होने का ढोंग कर रहा है। लेकिन वह ऐसा नहीं है। भारत की संसद ऐसे विद्वेषपूर्ण प्रयासों को सफल नहीं होने देगी। हम उम्मीद करते हैं कि सांसद एक दूसरे पर लांछन लगाने की इस प्रवृत्ति से ऊपर उठकर कार्य करेंगे।

कांग्रेस सांसद ने कहा, हम आशा करते हैं कि अंतर संसदीय संघ में चर्चा किए जाने वाले गंभीर मुद्दों पर आधारित विश्व की संसदों के सामूहिक हित को देखते हुए पाकिस्तान का शिष्टमंडल इस सम्माननीय मंच पर दोबारा इस मुद्दे को नहीं उठाएगा।

बाद में दूसरे सत्र में भी थरूर ने पाकिस्तानी पक्ष की दलीलों का कड़ा प्रतिवाद करते हुए इस्लामाबाद पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, सभापति महोदय, इससे पहले कि मैं उस विषय पर आऊं जिसके लिए मैं यहां पर आया हूं, मैं पैनल के एक सदस्य द्वारा दिए गए विषैले भाषण पर खेद व्यक्त करना चाहूंगा। उन्होंने संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों और तुच्छ क्षेत्रीय महत्वकांक्षाओं के लिए अपने देश द्वारा प्रचारित किए जा रहे झूठे विमर्श को पुनर्प्रस्तुत किया है और तथ्यों को पूरी तरह गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। उनके इस कृत्य से इस मंच का निराशाजनक दुरुपयोग हुआ है।

थरूर ने कहा, पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामले को यहां पर उठाया है। एक विपक्षी संसद सदस्य के रूप में मैंने अपनी सरकार के सामने कश्मीर और अन्य प्रश्नों को उठाया है और एक संसद सदस्य के रूप में मैं अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए आगे भी इन मुद्दों को उठाता रहूंगा किंतु पाकिस्तान के राजनयिक द्वारा आज जो बयान दिया गया है, वह पूरी तरह व्यर्थ है।

उन्होंने आतंकवादियों को पाकिस्तान का संरक्षण मिलने का उल्लेख करते हुए कहा, यह एक बहुत ही विडम्बनापूर्ण बात है कि जम्मू-कश्मीर में अनगिनत सीमापार आतंकी हमले करने वाला देश अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थक होने का ढोंग कर रहा है। पाकिस्तान सरकार विश्व की एकमात्र सरकार है, जो अलकायदा एवं आईएस से जुड़ी प्रतिबंधित सूची में शामिल और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सूचीबद्ध व्यक्ति को पेंशन प्रदान कर रही है। पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित 130 आतंकी और 25 आतंकी संगठन सक्रिय हैं।

आज जब आतंकवाद मानव अधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन है, तब ऐसे देश के प्रतिनिधि द्वारा मानव अधिकारों के सम्मान की बात करना वस्तुत: एक विडंबना ही है। मुझे आईपीयू मंच से इस प्रकार के निंदाजनक दोषारोपण के स्थान पर बेहतर कार्य की आशा है। हम यहां पर अंतरराष्ट्रीय विधि के सम्मान जैसे गम्भीर मुद्दों पर रचनात्मक भावना से चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लेख किया है, किन्तु वह इस बात को भूल गया कि उसने गैर-कानूनी रूप से अधिकृत किए गए जम्मू-कश्मीर को मुक्त करने संबंधी सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव के उपबंधों का उल्लंघन किया है। पाकिस्तान ने 1972 के शिमला समझौते और फरवरी, 1999 की लाहौर घोषणा के अन्तर्गत अंतर्राष्ट्रीय विधि के प्रति अपनी अन्य प्रतिबद्धताओं की भी पूरी तरह अनदेखी की है।

उन्होंने कहा, सभापति महोदय, जो लोग शीशों के घरों में रहते हैं, वे दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। मैं माननीय प्रतिनिधियों को यह बताना चाहूंगा कि भारत के संविधान में असामान्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कानूनी उत्तरदायित्वों को महत्व दिया गया है। हमारे संविधान में अंतरराष्ट्रीय कानून और संगठित जन समूहों के बीच होने वाली संधियों के प्रति उत्तरदायित्व और सम्मान की भावना उत्पन्न करने के लिए अनुच्छेद 51 का उपबंध किया गया है। गौरतलब है कि आईपीयू की 141वीं बैठक सर्बिया के बेलग्रेड में 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है।