आतंकियों को अदालत में लाते हुए बांग्लादेशी सुरक्षा बल। फोटो: साभार Dhaka Tribune
आतंकियों को अदालत में लाते हुए बांग्लादेशी सुरक्षा बल। फोटो: साभार Dhaka Tribune

ढाका/भाषा। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक कैफे में 2016 में हुए इस्लामिक स्टेट के हमले में संलिप्तता के आरोप में विशेष बांग्लादेशी न्यायाधिकरण ने आठ संदिग्धों में से सात को मौत की सजा सुनाई है। देश के इतिहास में सबसे भीषण आतंकवादी हमले में एक भारतीय लड़की समेत 20 लोग मारे गए थे।

ढाका के आतंकवादरोधी विशेष न्यायाधिकरण के न्यायाधीश मुजिबुर रहमान ने पुराने ढाका में अदालत परिसर में सजा सुनाते हुए कहा, ‘उन्हें फांसी की सजा दी जाएगी।’ दोषियों को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया था।

मामले की जांच में यह पता चला कि दोषियों ने आतंकवादियों को धन मुहैया कराया था, हथियार की आपूर्ति की थी या फिर हमले में सीधे तौर पर शामिल लोगों की सहायता की थी। घटना एक जुलाई, 2016 को ढाका के गुलशन इलाके में हुई थी।

न्यायाधीश ने आठवें आरोपी को बरी कर दिया क्योंकि अभियोजन पक्ष प्रतिबंधित नियो-जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (नियो-जेएमबी) द्वारा किए गए हमले में उसके संबंध को साबित नहीं कर सका।

हमले में मारे गए 17 विदेशी नागरिकों में नौ इतालवी, सात जापानी, एक भारतीय शामिल थे। बंधक बनाए जाने के दौरान दो बांग्लादेशी पुलिस अधिकारी भी मारे गए थे।

हमले में मारे गए लोगों में शामिल भारतीय लड़की तारिशी जैन बर्कले में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की छात्रा थी और वह छुट्टी मनाने के लिए ढाका आई थी।

अपने फैसले में न्यायाधीश ने बांग्लोदशी मूल के कनाडाई नागरिक तमीम चौधरी को हमले का मास्टरमाइंड बताया, जो बाद में राष्ट्रव्यापी आतंकवाद रोधी सुरक्षा अभियान के दौरान मारा गया था।