पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान

इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधान हटाने और दो केंद्र शासित प्रदेशों के निर्माण के फैसले से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में खासी हलचल है। जब उसे अमेरिका से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो उसके विदेश मंत्री चीन की शरण में चले गए।

कश्मीर मसले पर भारत की कार्रवाई से पाक को ऐसा झटका लगा है कि तालिबान भी उसका पक्ष लेने से कतरा रहा है। आतंकियों को पनाह देने वाले पाक को तालिबान ने कहा है कि वह अफगानिस्तान और कश्मीर मुद्दे को न जोड़े। तालिबान के प्रवक्ता जबीहउल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान को दो टूक कहा है कि कश्मीर मामले को अफगानिस्तान से जोड़ने की कोशिश से संकट को सुलझाने में कोई मदद नहीं मिलेगी।

तालिबान ने पाक को कहा कि अफगानिस्तान के मुद्दे का इससे कोई संबंध नहीं है। उसने कहा कि अफगानिस्तान अन्य देशों की प्रतिस्पर्धा के बीच नहीं फंसना चाहता। बता दें कि जनरल जिया उल हक के जमाने में पाकिस्तान ने बड़ी तादाद में आतंकियों के संगठन खड़े किए। वह भारत सहित अन्य देशों में आतंकवाद फैलाने के लिए इनका इस्तेमाल करता है।

पाक के अरमानों पर भारत ने फेरा पानी
हाल में अफगानिस्तान में शांति प्रकिया की चर्चा के बाद पाकिस्तान इस बात को लेकर इच्छुक था कि वह इसमें भूमिका निभाकर अमेरिका को अपने पाले में करेगा और कश्मीर मामले का समाधान अपने हक में करवाने पर जोर देगा। पिछले दिनों जब इमरान खान अमेरिका यात्रा पर गए और डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर में मध्यस्थता करने के बयान दिए तो पाकिस्तान में खुशी की लहर दौड़ने लगी कि अब कश्मीर ज्यादा दूर नहीं है। इधर, भारत में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेकर पाकिस्तान की सरकार, सेना और आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

करजई की कड़ी नसीहत
उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी आतंकवाद के मामले पर पाकिस्तान को कड़ी नसीहत दे चुके हैं। करजई ने एक ट्वीट में कहा कि अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया को कश्मीर में अपने मकसद से जोड़ना यह जाहिर करता है​ कि पाकिस्तान अफगानिस्तान को सिर्फ एक रणीनीतिक उपकरण के तौर पर देखता है। करजई ने पाकिस्तान सरकार से कहा कि वह हिंसक गतिविधियों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल न करे। साथ ही उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर के संबंध में भारत सरकार का फैसला राज्य और देश के लोगों की बेहतरी वाला साबित होगा। बता दें कि अफगानिस्तान में होने वाले बम धमाकों और तालिबान हमलों में पाकिस्तान की आईएसआई और उसके इशारों पर काम करने वाले आतंकी संगठनों की भूमिका है।

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