दक्षिण मध्य रेलवे की पहली एक्सप्रेस ट्रेन। एक अप्रैल, 1967 को खींची गई अजंता एक्सप्रेस की तस्वीर।
दक्षिण मध्य रेलवे की पहली एक्सप्रेस ट्रेन। एक अप्रैल, 1967 को खींची गई अजंता एक्सप्रेस की तस्वीर।

सिकंदराबाद/दक्षिण भारत। दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के दिन देश की सेवा में एक और वर्ष पूर्ण कर रहा है। साल 1966 में इसी तारीख को अस्तित्व में आए दक्षिण मध्य रेलवे ने अब तक कई कीर्तिमान कायम किए हैं।

आज 6,234 रूट किलोमीटर की लंबाई और 754 स्टेशनों के साथ दक्षिण मध्य रेलवे देश के उत्तर, पूर्व और पश्चिम को दक्षिण से जोड़ने वाली कड़ी के रूप में कार्य कर रहा है। पांच दशकों की अनवरत यात्रा ने नेटवर्क विस्तार, यातायात में वृद्धि, प्रौद्योगिकी अनुकूलन और यात्रियों के लिए बेहतरीन सुविधाओं सहित मील के कई पत्थर देखे हैं।

दक्षिण मध्य रेलवे के संचालन के पहले वित्तीय वर्ष यानी 1967-68 में 11 मिलियन टन माल लदान हुआ था, जो 2011-12 में 100 मिलियन टन के निशान से आगे बढ़कर 2018-19 में सबसे अधिक 122.5 मिलियन टन के आंकड़े को छू गया। दक्षिण मध्य रेलवे के पहले वर्ष में 115 मिलियन यात्री पंजीकृत किए गए, जो प्रतिवर्ष बढ़ते हुए 2018-19 में 383 मिलियन हो गए। इसी प्रकार 1967-68 में 68.06 करोड़ से आगे बढ़ते हुए पांच दशकों में दक्षिण मध्य रेलवे की राजस्व आय साल 2018-19 में 15,640 करोड़ तक पहुंच गई।

दक्षिण मध्य रेलवे ने रेल सेवाओं के साथ ही सुविधाओं में भी विस्तार किया है। इसमें महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। साल 1960 में जहां लकड़ी के डिब्बों वाली ट्रेनों में सफर किया जाता था, वहीं अब तकनीकी रूप से उन्नत एलएचबी कोच सर्वोत्तम सुरक्षा मानकों को पूरा करते हुए सफर को आरामदेह बनाते हैं।

दक्षिण मध्य रेलवे नई तकनीकी का उपयोग करते हुए यात्रियों के सफर को आसान बनाने के लिए भी संकल्पबद्ध है। इसके अंतर्गत ऑनलाइन टिकट बुकिंग को प्रमुखता से शामिल किया जाता है। ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे उनका समय बचता है और कतारों में नहीं लगना पड़ता। यहां करीब 67 प्रतिशत आरक्षित टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं।

दो अक्टूबर, 1966 को दक्षिण मध्य रेलवे जोन का उद्घाटन करते हुए तत्कालीन रेल मंत्री एसके पाटिल।
दो अक्टूबर, 1966 को दक्षिण मध्य रेलवे जोन का उद्घाटन करते हुए तत्कालीन रेल मंत्री एसके पाटिल।

दक्षिण मध्य रेलवे ने स्वच्छता और यात्रियों की संतुष्टि की दिशा में भी लंबा सफर तय किया है। सीटों की कमी, अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सफाई की स्थिति के अलावा प्लेटफॉर्मों पर मूलभूत ​सुविधाओं को बढ़ाने की बेहद जरूरत थी। दक्षिण मध्य रेलवे ने इसके लिए सर्वोत्तम मानक तय कर बड़ी छलांग लगाई है।

सीटों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ उन्हें ज्यादा आरामदेह बनाया गया। प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त की गई, सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया और स्वच्छता को सुनिश्चित किया गया। स्टेशनों पर एसी युक्त वेटिंग हॉल और आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया गया। दक्षिण मध्य रेलवे सोशल मीडिया पर सक्रिय है और मोबाइल एप्स से विभिन्न सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।