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                <title>Dakshin Bharat Rashtramat</title>
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                <title>संजय राउत ने शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को 50 करोड़ रु. का प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: sanjay___raut Instagram account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76689/sanjay-raut-alleges-shiv-sena-ubt-mps-being-lured-with"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/sanjay-raut1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/भाषा। </strong>उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में फूट पड़ने की अटकलें तेज होने के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने बुधवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए ‘50 करोड़ रुपए’ की पेशकश की जा रही है और उन्होंने बागी सांसदों को पार्टी छोड़ने से पहले इस्तीफा देने की चुनौती भी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने, साल 2022 में हुई नेताओं की बगावत का नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान जिक्र करते हुए कहा कि अगर पार्टी में फिर उसी तरह फूट डाली गई तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (उबाठा) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संवाददाता सम्मेलन में शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन- अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि एक ‘महत्त्वपूर्ण व्यक्ति’ ने मंगलवार देर रात उन्हें बताया कि महाराष्ट्र के सांसदों को ‘खरीदने’ की कोशिश की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘मुझे बताया गया कि कीमत 50 करोड़ रुपए है और रात तक प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपए पहुंचाए जाने थे। वे धन मिले बिना विमान में सवार होने को कथित रूप से तैयार नहीं थे।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने हालांकि कहा कि पार्टी के पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और कुछ सांसदों के अलग होने की खबरें मीडिया के जरिये मिल रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘अगर दलों को इस तरह तोड़ा जाता है तो चुनाव लड़ने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि संबंधित सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना (उबाठा) के ‘मशाल’ चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए हैं और ‘किसी को भी उस जनादेश से विश्वासघात करने का अधिकार नहीं है।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर साल 2022 में अविभाजित शिवसेना में हुई फूट जैसी घटना दोहराई गई तो महाराष्ट्र और शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘अगर कोई पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए। वे हमारी पार्टी के टिकट पर और मतदाताओं द्वारा चुने जाने के कारण संसद पहुंचे हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी ने कानूनी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक के लिए ‘व्हिप’ जारी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उनसे संविधान के प्रावधानों के अनुरूप सख्ती से कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सावंत ने कहा कि किसी भी सांसद ने पार्टी छोड़ने के फैसले के बारे में आधिकारिक रूप से सूचित नहीं किया है और सभी खबरें मीडिया एवं सोशल मीडिया के जरिये सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देसाई ने कहा कि पार्टी को अपने सांसदों पर अब भी पूरा भरोसा है लेकिन एहतियात के तौर पर कानूनी उपाय किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (उबाठा) नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को ‘खरीदने और दलों को तोड़ने’ की प्रवृत्ति लोकतंत्र तथा संविधान के लिए खतरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">तीनों नेताओं ने कहा, ‘हमारे पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हमें ये खबरें मीडिया से मिल रही हैं और हम उन्हीं पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने उद्धव ठाकरे के साथ रविवार को हुई शिवसेना (उबाठा) सांसदों की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि एक सांसद ने चार बार साईं बाबा की कसम खाई, दूसरे ने देवी भवानी के नाम पर शपथ ली तथा बाकियों ने अपने बच्चों और माताओं की कसम खाकर कहा कि वे हमारे साथ बने रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमने इन सांसदों के लिए खून-पसीना बहाया है। हमने उन्हें टिकट दिया और अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक मदद भी की।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि ये सांसद उद्धव बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के कारण निर्वाचित हुए हैं न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कारण।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमने ‘व्हिप’ जारी कर संसदीय दल की बैठक बुलाई है। हमने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को खरीदना और दलों को तोड़ना लोकतंत्र तथा संविधान के विरुद्ध है।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि इसके बाद कानूनी लड़ाई होगी और यह इतना आसान नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अगर कोई सोचता है कि कुछ लोग एकत्र होकर धन के जरिए मामला निपटा सकते हैं तो वह गलतफहमी में है।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर पर दबाव डाले जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सांसद के पिता की हत्या के 20 साल पुराने मामले में बुधवार को फैसला सुनाया जाना था।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘उनसे कथित तौर पर कहा गया कि अगर वह अपने पिता की हत्या के मामले में अपने पक्ष में फैसला चाहते हैं तो उन्हें उनके गुट में शामिल हो जाना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब इस मामले में शनिवार को फैसला सुनाए जाने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘अगर ऐसा हो रहा है तो संविधान, अदालतों और लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है? बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। सभी को आमंत्रित किया गया है और सभी को बैठक में शामिल होना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा, ‘पार्टी ने हमें जो कुछ दिया है, उसे हम भूल नहीं सकते। बालासाहेब ठाकरे ने हमें बेटों की तरह माना और उद्धव ठाकरे ने हमेशा भाइयों जैसा व्यवहार किया।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.dakshinbharat.com/article/76689/sanjay-raut-alleges-shiv-sena-ubt-mps-being-lured-with</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिवसेना (यूबीटी) में बगावत की चर्चा पर राउत बोले- 'अगर वफ़ादारी बदलनी है तो इस्तीफ़ा दें'</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: sanjayraut.official FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76688/on-the-discussion-of-rebellion-in-shiv-sena-ubt-raut"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/sanjay-raut.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत।</strong> शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बुधवार को बागी सांसदों को चुनौती दी कि अगर वे पाला बदलना चाहते हैं तो पार्टी छोड़ दें। यह बयान उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में जल्द ही फूट पड़ने की बढ़ती अटकलों के बीच आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राउत ने कहा कि अगर पार्टी में फिर से फूट पड़ती है, तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह बात साल 2022 में हुई बगावत के संदर्भ में कही।</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन - अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे - ही राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने बागी नेताओं से कहा, 'उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने सांसदों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। अगर आप पाला बदलना चाहते हैं तो इस्तीफा दे दें।'</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, राज्यसभा सदस्य ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के पास अभी भी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।<br /> <br />उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को 15 करोड़ रुपए में खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा कि अगर तृणकां और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियां बंट जाती हैं तो चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>'इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं'</strong></p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में दलबदल कराने की किसी भी कथित कोशिश से उनकी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बावनकुले ने नागपुर में कहा, 'मुझे 'ऑपरेशन टाइगर' के बारे में कोई जानकारी नहीं है।' उन्होंने कहा, 'चूंकि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं होगा।'</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा की मिलीभगत के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, 'इससे भाजपा का क्या लेना-देना है? हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमें नहीं पता कि 'ऑपरेशन टाइगर' क्या है, इसे कौन लाया और क्यों लाया गया; हमें यह भी नहीं पता। भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है: अरविंद केजरीवाल</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @ArvindKejriwal X account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76687/center-has-no-intention-of-stopping-paper-leak-arvind-kejriwal"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-02/arvind-kejriwal1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को 'बेतुका' बताया और दावा किया कि सरकार का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि सरकार ने मंगलवार को 21 जून को होने वाले नीट-यूजी 2026 रीटेस्ट से पहले टेलीग्राम के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि यह कदम नकल कराने वाले रैकेट और गलत जानकारी से निपटने के लिए उठाया गया है।<br /> <br />एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने कहा कि 22 जून तक टेलीग्राम पर लगाई गई रोक, इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिशों का हिस्सा है कि दोबारा परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फ़ैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में सरकार की रणनीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।</p>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने कहा, 'मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है। इसीलिए ऐसे अजीबोगरीब कदम उठाए जा रहे हैं - जैसे सेना के विमान से पेपर ले जाना और टेलीग्राम को बंद करना। क्या इन कदमों से पेपर लीक रुकेंगे? बिल्कुल नहीं।'</p>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के नेता ने आगे आरोप लगाया कि पेपर लीक एक संगठित वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक का धंधा कई अरब रुपयों का रैकेट है। इसका पैसा ऊपर तक जाता है। अगर पेपर लीक रुक जाएं, तो विधायकों/सांसदों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आएगा?'<br /> <br />परीक्षा रद्द होने के बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा के लिए सुरक्षा उपायों की कड़ी जांच-पड़ताल हो रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जहां एनटीए का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए संचार माध्यमों को रोकना और सैन्य परिवहन का इस्तेमाल करना ज़रूरी है, वहीं विपक्षी नेताओं का तर्क है कि इन कदमों से पेपर लीक के पीछे के मुख्य नेटवर्क का पता नहीं चल पाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:52:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए व्हिप जारी किया</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: UddhavBalasahebThackeray FB page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76686/shiv-sena-ubt-issues-whip-to-its-mps-to-attend"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-02/uddhav-thackeray.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत।</strong> उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में जल्द ही बगावत होने की अटकलों के बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों को 'महत्त्वपूर्ण मुद्दों' पर चर्चा के लिए नई दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल होने का व्हिप जारी किया है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी बैठक में शामिल न होने वालों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पार्टी ने सन् 2022 में भी ऐसा ही व्हिप जारी किया था, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई में 39 विधायकों ने शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। उसके बाद उन्हें अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को सूत्रों ने बताया कि विपक्षी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) संकट का सामना कर रही है, क्योंकि उसके नौ लोकसभा सांसदों में से 'छह से सात' सांसद शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने का मन बना चुके हैं और राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>'अलग हुए' गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया </strong></p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील की है कि वे पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी 'अलग हुए' गुट को मान्यता न दें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कार्यकर्ता परेशान </strong></p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में परभणी, हिंगोली और धाराशिव लोकसभा क्षेत्रों में शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता पार्टी के भीतर वफादारी बदलने की अटकलों के बीच घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संभावित दलबदल की चर्चाओं के ज़ोर पकड़ने के साथ ही माहौल में उत्सुकता और बेचैनी देखी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, हिंगोली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने इन अटकलों को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि उनके सांसद नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के साथ ही बने रहेंगे और पाला बदलने का कोई फैसला नहीं करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:34:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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                <title>सोशल मीडिया के भंवर में बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाना जरूरी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76685/childhood-in-the-whirlpool-of-social-media"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/social-media.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने संबंधी जो फैसला लिया, वह वक्त की जरूरत है। इससे पहले, मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर रोक लगाने वाले नियम जारी किए थे। भारत सरकार को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिएं। देश में लाखों बच्चे ऐसे हैं, जो सोशल मीडिया पर अपना अनमोल समय बर्बाद कर रहे हैं। अभी उन्हें अच्छी बातें सीखनी चाहिएं, किताबें पढ़नी चाहिएं, खेलकूद में भाग लेना चाहिए, प्रकृति के साथ लगाव विकसित करना चाहिए। उन्हें ऐसी गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए, जो उनके व्यक्तित्व का निर्माण करें। उन्हें स्वस्थ तन, स्वस्थ मन और खुशहाल जीवन के लिए काम करना चाहिए। वे इसके बजाय सोशल मीडिया के भंवर में फंसे रहते हैं। उन्हें पता ही नहीं चलता है कि वे अपना कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं! यह समय कभी लौटकर नहीं आएगा। उन्हें बाद में पछतावा होगा कि सोशल मीडिया की लत ने उनसे क्या-क्या छीन लिया! कुछ घरों में छोटे बच्चों को इसलिए मोबाइल फोन दे दिया जाता है, ताकि वे व्यस्त रहें और कामकाज में बाधा न डालें। इससे बच्चे व्यस्त तो हो जाते हैं, लेकिन यहीं से उनके मन में कुछ गलत आदतों की नींव पड़ जाती है। जब उनसे मोबाइल फोन वापस लिया जाता है तो वे ज़िद करते हैं। कई तो रोने लगते हैं। ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जब किसी बच्चे को मोबाइल फोन नहीं मिला तो उसने घर में तोड़फोड़ मचा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसका बचपन ऐसा होगा, उसकी जवानी कैसी होगी? इतनी हिंसक, अस्थिर, अनुशासनहीनता की मानसिकता रखने वाला शख्स भविष्य में कैसा नागरिक बनेगा? क्या बच्चों को मोबाइल फोन थमा देना, उन्हें सोशल मीडिया पर कई घंटे बिताने की इजाजत देना उनके साथ अन्याय नहीं है? मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के कारण किशोरों का भाषाज्ञान प्रभावित हो रहा है। वे लिखने में कई गलतियां कर रहे हैं। वे पढ़ाई पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। जब वे पढ़ाई करने बैठते हैं तो पास में मोबाइल फोन रख लेते हैं। वे हर पांच-दस मिनट के बाद फोन देखते रहते हैं। उन्हें लगता है कि दुनिया की सबसे जरूरी चीज मोबाइल फोन में है और अगर उसे अभी नहीं देखा तो बहुत बड़े लाभ से वंचित रह जाएंगे। इस दौरान एक समय ऐसा आता है, जब वे सोशल मीडिया पर आकर्षक सामग्री देखते-देखते दो-तीन घंटे बर्बाद कर देते हैं। सोशल मीडिया ऐप्स इस तरह तैयार किए जाते हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग उन पर समय बिताएं। जिस ऐप पर लोग जितना समय बिताते हैं, वह उतना ही कामयाब माना जाता है। यूं तो बड़ों को भी सोशल मीडिया को सीमित समय देना चाहिए, लेकिन बच्चों को इस मामले में अनुशासन का पाठ पढ़ाना जरूरी है। सोलह साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया से दूर रहें तो उनके लिए अच्छा है। चूंकि इस उम्र में भावनाएं प्रबल होती हैं, अच्छे-बुरे की समझ कम होती है, ऐसे में सोशल मीडिया उनके लिए सुरक्षित मंच नहीं है। साइबर ठग इतने शातिर हो चुके हैं कि वे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को सोशल मीडिया के जरिए चूना लगा रहे हैं। किशोर उनसे कब तक सुरक्षित रहेंगे? उनकी सुरक्षा, निजता, मन की पवित्रता और उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए। यह आज की बहुत बड़ी आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:32:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं खरीद पाएंगे कफ़ सिरप</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: PixaBay]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76684/now-you-will-not-be-able-to-buy-cough-syrup"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-10/doctor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>दवा की क्वालिटी और मरीज़ों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत अब पूरे देश में डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ़ सिरप समेत किसी भी तरह की सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का मकसद कफ सिरप समेत सिरप-आधारित फ़ॉर्मूलेशन को ज़्यादा सख़्त रेगुलेटरी निगरानी के दायरे में लाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस संशोधन से पहले, शेड्यूल के की एंट्री नंबर 13 के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की सिरप बेचने की इजाज़त थी, जिसके लिए रिटेल बिक्री के लाइसेंस से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना ज़रूरी नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;">संशोधित प्रावधानों के तहत, सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' की अनुसूची के में 'दवाओं की श्रेणी' के अंतर्गत सूचीबद्ध आइटम 7 से सिरप शब्द हटा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुसूची के उन दवाओं की कैटेगरी बताता है जिन्हें 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' और उससे जुड़े नियमों के तहत, कुछ खास शर्तों के साथ, उनके निर्माण, बिक्री और वितरण से जुड़ी कुछ ज़रूरतों से छूट दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों का मकसद सिरप को इस छूट वाली श्रेणी से बाहर रखकर, इन फ़ॉर्मूलेशन पर ज़्यादा सख़्त नियंत्रण और कड़ी निगरानी रखना है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संशोधन पिछले साल दिसंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी उस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के बाद किया गया है, जिसमें इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों और आम जनता समेत सभी संबंधित पक्षों से राय और सुझाव मांगे गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि अंतिम फ़ैसला लेने से पहले, कंसल्टेशन प्रोसेस के दौरान मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा की गई। यह फ़ैसला ड्रग्स टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड के साथ मिलकर लिया गया, जो फ़ार्मास्यूटिकल्स से जुड़े तकनीकी मामलों को देखने वाली देश की सबसे बड़ी वैधानिक संस्था है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:12:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी वायुसेना का बी-52 बमवर्षक विमान दुर्घटनाग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: PixaBay]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76683/us-air-force-b-52-bomber-plane-crashes"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-05/american-flag.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लॉस एंजिलिस/दक्षिण भारत। </strong>दक्षिणी कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान में स्थित अमेरिकी वायुसेना के एक अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद एक बी-52 बमवर्षक विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर आग की लपटों में घिर गया जिससे विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई। सैन्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राप्त तस्वीरों में दिखाई दिया कि आग लगने के बाद विमान पूरी तरह जलकर खाक हो गया। यह हादसा पूर्वाह्न लगभग 11:20 बजे लॉस एंजिलिस के उत्तर में स्थित एडवर्ड्स वायु सेना अड्डे में हुआ और विमान नियमित परीक्षण अभियान में रवाना हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे के बाद रनवे के पास रेगिस्तान के एक बड़े हिस्से से धुआं उठता दिखाई दिया। मौके पर आपातकालीन वाहन भी मौजूद थे। विमान में सरकारी ठेकेदारों और सैन्यकर्मियों सहित कुल आठ लोग सवार थे।</p>
<p style="text-align:justify;">एडवर्ड्स में ‘412 टेस्ट विंग’ के उप-कमांडर कर्नल जेम्स हेस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दुर्घटना का फुटेज देखने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि इसमें किसी के बचने की संभावना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमने आठ महान अमेरिकियों को खो दिया है।’ हेस ने कहा कि मृतकों के परिजनों को सूचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना का कारण तत्काल स्पष्ट नहीं है और जांच पूरी होने में छह महीने तक का समय लग सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि उन्होंने बताया कि बी-52 विमान वायु सेना के रडार आधुनिकीकरण कार्यक्रम से जुड़े परीक्षण मिशन में शामिल था।</p>
<p style="text-align:justify;">बोइंग का ‘बी-52 स्ट्रेटोफोर्ट्रेस’ एक लंबी दूरी का बमवर्षक विमान है, जिसे सन् 1955 में सेवा में शामिल किया गया था। यह परंपरागत और परमाणु दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है तथा वियतनाम से लेकर ईरान तक अमेरिकी सैन्य अभियानों में इसका उपयोग किया जाता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एडवर्ड्स वायु सेना अड्डा अमेरिकी वायु सेना के विमान परीक्षण और विकास कार्यों का प्रमुख केंद्र है। यह लॉस एंजेलिस से लगभग 161 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ जेफ गुजेटी ने कहा कि दुर्घटना के कारणों पर अभी कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। हालांकि उनके अनुसार, उड़ान भरने के तुरंत बाद ‘बी-52’ का बिना अधिक ऊंचाई या दूरी तय किए दुर्घटनाग्रस्त हो जाना इस बात का संकेत देता है कि विमान की उड़ान नियंत्रण प्रणाली में किसी प्रकार की गंभीर खराबी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीट-यूजी री-टेस्ट: सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम पर रोक लगाई</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: PixaBay]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76682/neet-ug-re-test-government-bans-telegram-till-june-22"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-06/woman-mobile-phone.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत।</strong> केंद्र सरकार ने मंगलवार को नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कहा कि यह कदम नकल कराने वाले रैकेट और गलत जानकारी से निपटने के लिए उठाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के आधार पर, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत एक निर्देश जारी किया है। इसके तहत भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर एक तय और सीमित समय के लिए रोक लगाई गई है। यह रोक 22 जून, 2026 तक लागू रहेगी, जिसमें नीट (यूजी) 2026 की दोबारा परीक्षा का दिन और उसके ठीक बाद का समय भी शामिल है।<br /> <br />एनटीए ने एक बयान में कहा कि एक अलग निर्देश के तहत टेलीग्राम को भारत में 30 जून तक पहले से पोस्ट किए गए मैसेज के लिए 'मैसेज-एडिटिंग' फ़ीचर को बंद करना होगा। यह कदम उस खास फ़ीचर को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय परीक्षाओं के संबंध में घटना के बाद 'पेपर लीक' के झूठे सबूत गढ़ने के लिए किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">एनटीए ने कहा, 'ये दोनों कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए हैं। ये कदम 21 जून को होने वाली नीट 2026 की दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को धोखा देने वाले गिरोहों द्वारा इस प्लेटफ़ॉर्म के संगठित इस्तेमाल के जवाब में उठाए गए हैं।'</p>
<p style="text-align:justify;">3 मई को हुई मेडिकल-प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के कारण इसे रद्द कर दिया गया, जिससे लाखों उम्मीदवारों को निराशा हुई। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।<br /> <br />एजेंसी ने छात्रों के हित में उठाए गए 'समय पर कदम' के लिए मंत्रालय का आभार जताया और कहा कि इससे 21 जून को सुरक्षित परीक्षाएं आयोजित करने में मदद मिलेगी।<br /> <br />एनटीए ने कहा कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाला 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' मुख्य नोडल एजेंसी के तौर पर काम कर रहा है। यह सेंटर नीट उम्मीदवारों को निशाना बनाने वाले टेलीग्राम-आधारित फ्रॉड और गलत जानकारी के मामलों में ऑपरेशनल रिस्पॉन्स को कोऑर्डिनेट कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एजेंसी के अनुसार, एनटीए, बिहार, गुजरात और राजस्थान की पुलिस समेत राज्य की कानून लागू करने वाली एजेंसियों से मिली जानकारी और अपनी खुद की निगरानी के आधार पर, आई4सी ने धोखाधड़ी और गुमराह करने वाले मकसद का खुलेआम प्रचार करने वाले टेलीग्राम चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स की एक 'बड़ी संख्या' को तुरंत हटवाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:37:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तृणकां के दोनों गुटों के बारे में फ़ैसला लेने से पहले यह कदम उठाएंगे लोकसभा अध्यक्ष?</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: AITCofficial FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76681/lok-sabha-speaker-will-take-these-steps-before-taking-decision"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2022-12/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, अलग हुए गुट को मान्यता देने का फ़ैसला करने से पहले, पाला बदलने वाले तृणकां सांसदों और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, दोनों की बात सुनेंगे। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट — जो अब बहुत छोटा रह गया है — को भी एक ईमेल भेजकर उनकी राय मांगी है।<br /> <br />इससे पहले, सूत्रों ने बताया कि 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' (एनसीपीआई) - जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं - के साथ प्रस्तावित विलय के बाद, अलग गुट के तौर पर मान्यता पाने की नेताओं की मांग पर बिरला कानूनी राय ले सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि गुट की मांग पर कोई भी फ़ैसला संसद के मॉनसून सत्र से पहले लिया जाएगा, जो आम तौर पर जुलाई के तीसरे हफ़्ते में शुरू होता है। सूत्रों ने बताया कि कानूनी राय ली जाएगी ताकि अगर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए, तो वह न्यायिक जांच में टिक सके।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा के पूर्व महासचिव एवं संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 4 का हवाला देते हुए यह बात रेखांकित की कि केवल एक राजनीतिक पार्टी ही किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय कर सकती है, न कि सांसद या विधायक।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि अगर कोई राजनीतिक पार्टी किसी दूसरी पार्टी में विलय करने का फ़ैसला करती है, तो उसके विधायकों और सांसदों को इस विलय पर सहमत होना होगा, लेकिन सिर्फ़ सांसद या विधायक किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते... यही संवैधानिक प्रावधान है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग के एक पूर्व अधिकारी, जिन्होंने चुनाव प्राधिकरण में राजनीतिक दलों के मामलों को संभाला था, ने तृणकां के बागी नेताओं की एनसीपीआई में विलय की मौजूदा योजना को एक नया प्रयोग बताया है, जिसका ज़िक्र न तो दलबदल विरोधी कानून में है और न ही 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' में है।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को तृणकां में संकट और गहरा गया, जब पार्टी छोड़कर आए सांसदों ने एनसीपीआई में विलय की घोषणा की और निचले सदन में बैठने के लिए अलग व्यवस्था की मांग को लेकर बिरला से मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद, पार्टी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन पर पार्टी के 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'तृणकां के दो-तिहाई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय करेंगे और राजग का समर्थन करेंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में खुद को एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर रजिस्टर कराया था। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में इसका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले के संकराइल में एक इमारत है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी मौजूदगी बहुत कम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:56:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुझ पर हुए हमले के पीछे आरएसएस के कुछ लोग थे: अभिजित दीपके</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: cockroachjantaparty Instagram account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76680/abhijit-deepke-some-people-from-rss-were-behind-the-attack"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/cjp1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर/दक्षिण भारत। </strong>कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजित दीपके ने मंगलवार को आरोप लगाया कि एक दिन पहले उन पर हुए हमले के पीछे 'आरएसएस के कुछ लोग' थे। उन्होंने दावा किया कि यह असली मुद्दे से ध्यान भटकाने और छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले महीने हुए नीट (यूजी) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग के लिए सीजेपी का विरोध प्रदर्शन आज संविधान चौक पर होना है। इससे पहले मंगलवार सुबह दीपके नागपुर एयरपोर्ट पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को जयपुर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, जब सीजेपी के संस्थापक को उनके समर्थक कंधों पर उठाए हुए थे, तो कथित तौर पर दो लोगों ने उन्हें कई बार थप्पड़ मारे। इस घटना के सिलसिले में दो युवकों को हिरासत में लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उनसे पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि उन पर हुए हमले के पीछे कौन था, तो दीपके ने आरोप लगाया, 'इसमें आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े कुछ लोग शामिल थे और इसमें कोई नई बात नहीं है।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि जब भी कोई सरकार या उसकी विचारधारा के ख़िलाफ़ बोलता है, तो वे ऐसा ही करते हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं है।<br /> <br />आरएसएस से संबंध होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करने के दावों पर दीपके ने कहा, 'क्या इसीलिए उन्होंने कल मुझ पर हमला किया?'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि उन पर हुआ हमला असल मुद्दे से ध्यान भटकाने और छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'हम अपने मुद्दों से पीछे नहीं हटेंगे; आप चाहें तो हम पर जितने चाहें उतने हमले करें। हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे और अपने मुख्य मुद्दे से नहीं भटकेंगे — जो एक करोड़ से ज़्यादा छात्रों के साथ हो रहे अन्याय से जुड़ा है — और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।'</p>
<blockquote class="instagram-media"><strong><a href="https://www.instagram.com/p/DZnBSjOE73E/?hl=en&amp;img_index=1">https://www.instagram.com/p/DZnBSjOE73E/?hl=en&amp;img_index=1</a></strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'इस तरह के हमले होते रहेंगे, लेकिन मैं डरता नहीं हूं। हम गांधीजी और अंबेडकर के रास्ते पर चलते हैं और यह हमारा सत्याग्रह है। हम शांतिपूर्ण ढंग से इसे जारी रखेंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">दीपके ने नागपुर के निवासियों, जिनमें छात्र और युवा भी शामिल हैं, से अपील की है कि वे मंगलवार को शाम 4 बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए संविधान चौक पर इकट्ठे हों।<br /> <br />सीजेपी नीट (यूजी) पेपर लीक मामले को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:19:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्लोवाकिया ने संरा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76679/slovakia-supported-indias-permanent-membership-in-the-un-security-council"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2023-01/flag.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रातिस्लावा/दक्षिण भारत। </strong>स्लोवाकिया ने 'सुधारित' संरा सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य यूरोपीय देश की अहम यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया के उनके समकक्ष रॉबर्ट फिको के बीच हुई बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में, दोनों पक्षों ने संरा और यूएनएससी जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में व्यापक सुधारों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें 'अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाने वाला' बनाया जा सके।<br /> <br />दोनों नेताओं ने सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त बयान में कहा गया, 'इस संदर्भ में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के लगातार समर्थन की सराहना की।'<br /> <br />मोदी और फिको ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षवाद के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संरा सहित वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत लंबे समय से सुधारित और विस्तारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। उसका तर्क है कि 15 सदस्यों वाली इस संस्था का मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और आज की वैश्विक वास्तविकताओं को ठीक से नहीं दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली की उम्मीदवारी को कई यूरोपीय देशों के साथ-साथ जी4 समूह के अन्य सदस्यों — ब्राज़ील, जर्मनी और जापान — सहित कई देशों का समर्थन मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संरा सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य - चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका - और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्लोवाकिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) - जो 48 देशों का एक मल्टीलेटरल एक्सपोर्ट कंट्रोल सिस्टम है - में भारत की सदस्यता के प्रति अपने सकारात्मक रुख को फिर से दोहराया।<br /> <br />सन् 1993 में स्लोवाकिया की आज़ादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया, जिसका मकसद रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले और नियमों पर आधारित इंडो-पैसिफिक, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और नेविगेशन की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:45:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कौन खोलेगा अज्ञान की यह पट्टी?</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तानी खुद को विदेशी आक्रांताओं की संतान मानते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76678/who-will-open-this-bar-of-ignorance"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/knowledge.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने 'पाकिस्तान के साथ बातचीत' संबंधी जो टिप्पणी की, उसके विभिन्न पक्षों को सही ढंग से समझने की जरूरत है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भी कहा कि उनका संदर्भ देश के बजाय लोगों से बातचीत था। बंटवारे के इतने दशकों बाद भी, भारत में कई लोग असमंजस में रहते हैं कि पाकिस्तान के साथ बातचीत होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए! पाकिस्तान को समझने से पहले उसकी बुनियाद को समझना होगा, जिसका नाम है- दो क़ौमी नज़रिया। पाकिस्तान बनने के बाद वहां सभी लोगों को यह घुट्टी पिला दी गई कि 'हम अलग हैं'। इसकी शुरुआत चालीस के दशक से ही हो गई थी। आज उसका असर पाकिस्तानी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक दिखाई दे रहा है। वहां के आम आदमी के मन में भारत, खासकर हिंदुओं के लिए नफरत पाई जाती है। कोई कम नफरत करता है, कोई ज्यादा करता है, लेकिन क्यों करता है? यह उन्हें नहीं मालूम। उन्हें तोते की तरह यह बात रटाई गई है कि भारत रात के अंधेरे में हमला करता है। वे इस दुष्प्रचार के शिकार हैं कि भारत ने हमेशा पहले हमला किया और पाकिस्तान ने सिर्फ जवाब दिया! यह जानकर आश्चर्य होगा कि आज भी करोड़ों पाकिस्तानी मानते हैं कि उनके देश ने हर युद्ध जीता था। वे खुद को विदेशी आक्रांताओं की संतान मानते हैं। जब तक इस झूठ का पर्दाफाश नहीं होगा, वे हमसे बेवजह नफरत करते रहेंगे। जो पाकिस्तानी आतंकवादी इधर आते हैं, हमारे सशस्त्र बलों द्वारा ढेर किए जाते हैं, वे इसी सोच के शिकार हैं। अब सोशल मीडिया के कारण सरहद के उस पार लोगों को पता चल रहा है कि उन्हें झूठ परोसा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस झूठ के आवरण को हटाने के लिए लोगों के साथ विभिन्न मंचों पर संवाद होना चाहिए। इससे उनकी सोच बदलेगी, बदल भी रही है। हालांकि उनकी संख्या कम है, लेकिन भविष्य में बेहतरी की उम्मीद की जा सकती है। जब एक शिक्षित पाकिस्तानी को पता चलेगा कि पांच पीढ़ी पहले उसके पूर्वज हिंदू थे; यह विदेशी आक्रांताओं की नहीं, बल्कि साहित्य, संगीत और कलाओं की धरती है; तक्षशिला ज्ञान-विज्ञान का केंद्र था; हम कहीं बाहर से नहीं आए थे; हम इसी धरती के बेटे-बेटियां हैं, तो उसके मन में भारत के प्रति कुछ जिज्ञासा जरूर पैदा होगी। अगर इस सोच को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाए तो हजारों पाकिस्तानी युवाओं के मन में आतंकवाद का जहर पैदा होने से पहले ही खत्म किया जा सकता है। पाकिस्तानी सरकार, फौज, आईएसआई, कट्टरपंथी संगठन और आतंकवादी संगठन यही चाहेंगे कि उन लोगों की आंखों पर अज्ञान की पट्टी बंधी रहे। यह पट्टी सिर्फ भारतीय खोल सकते हैं। इसके लिए सोशल मीडिया के जरिए ऐसी सामग्री को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे आम पाकिस्तानी के मन में अपनी जड़ों को लेकर सवाल पैदा हो। जब उन्हें इस बात का बोध होगा कि हमारे पूर्वज एक थे, हम हजारों साल से एकसाथ रह रहे थे और कुछ नेताओं ने स्वार्थ के कारण दो क़ौमी नज़रिए की शक्ल में बंटवारे के बीज बोए थे, तो वे अपने हुक्मरानों से सवाल पूछेंगे। वे पूछेंगे कि भारत में आटा, चावल, दाल, सब्जी, दवाई, बिजली, रसोई गैस की कीमतें कम और पाकिस्तान में इतनी ज्यादा क्यों हैं? पाकिस्तानियों के हक पर डाका कौन डाल रहा है? चीजों के दाम कौन बढ़ा रहा है? जिस दिन 10 प्रतिशत पाकिस्तानी ऐसा सोचने लगेंगे, सवाल पूछने लगेंगे तो दो क़ौमी नज़रिया धराशायी होने लगेगा। यह काम जितना जल्दी हो, उतना अच्छा है। भारत मां की जो भुजाएं षड्यंत्रपूर्वक खंडित की गई थीं, वे पुन: अपने स्थान पर विराजमान हों। यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:10:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है: राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: rahulgandhi FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76677/every-paper-leaked-every-canceled-exam-not-just-a"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>कोटा में अपने छात्र सम्मेलन से पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि हर पेपर लीक और रद्द हुई परीक्षा सिर्फ़ सिस्टम की नाकामी नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं के सपनों पर भी एक चोट है।</p>
<p style="text-align:justify;">हिंदी में एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को जो मिलता है, वह कड़ी मेहनत का फल नहीं, बल्कि सपने देखने की हिम्मत करने की सज़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'देश के हर युवा से मेरी एक बात - आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की सज़ा मिलती है। हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा, हर अधूरी भर्ती - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है।'</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा, 'मैं जानता हूं कि आप थक चुके हैं। ग़ुस्से में हैं। पर याद रखिए - जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब आवाज़ ऊंची करनी पड़ती है। इसलिए मैं आप सबको बुला रहा हूं - 17 जून, कोटा। छात्रों की गूंज।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'आइए, मिलकर एक ऐसी हुंकार बनें जिसे अनसुना करना नामुमकिन हो। कोटा से शुरुआत - फिर देश के हर कोने तक। यह आपके भविष्य की लड़ाई है। और मैं आपके साथ हूं।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:16:35 +0530</pubDate>
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                <title>जंग खत्म हुई, अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी वापस ले सरकार: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: IndianNationalCongress FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76676/the-war-is-over-now-the-government-and-congress-should"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2022-12/congress2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत/भाषा। </strong>कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने के लिए सहमति बनने के बाद अब सरकार को पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन की कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह सवाल भी किया कि क्या प्रधानमंत्री इसकी घोषणा फ्रांस से करेंगे या फिर देश लौटकर यह खुशखबरी देंगे?</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन तक जारी रहे युद्ध को समाप्त करने व होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है और दोनों देशों के बीच समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">खेड़ा ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘हमें बताया जा रहा था कि भारत की बेहाल अर्थव्यवस्था की वजह अमेरिका-ईरान की जंग है। हर महंगाई, हर गिरावट और हर परेशानी का दोष सरकार की नीतियों पर नहीं, पश्चिम एशिया के तनाव पर था। अब जब जंग खत्म हो गई है, तो मोदीजी का बहाना भी खत्म हो जाना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">उनका कहना है, ‘कच्चे तेल के दाम कम होंगे। आपूर्ति शृंखला सामान्य होंगी। मांग स्थिर होगी। स्वाभाविक रूप से, इसका फायदा देश के ग्राहकों को भी मिलना चाहिए। मतलब यह कि पेट्रोल, डीज़ल, सीएनजी, एलपीजी और एलएनजी के दामों में की गई बढ़ोतरी को वापस लेना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने कहा, ‘क्या इस खुशखबरी का ऐलान मोदीजी फ्रांस से ही करेंगे? या फिर देश को उनके वापस लौटने का इंतज़ार करना पड़ेगा?’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:13:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में ईडी के सामने पेश हुए तृणकां सांसद अभिषेक बनर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: AbhishekBanerjeeOfficial FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76675/trc-mp-abhishek-banerjee-appears-before-ed-in-teacher-recruitment"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता/दक्षिण भारत/भाषा।</strong> प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने कथित प्राथमिक स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से पूछताछ शुरू की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">बनर्जी से यह पूछताछ ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए विधायकों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी के मामले में अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से करीब साढ़े आठ घंटे पूछताछ की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी से घोटाले के सिलसिले में पूछे जाने वाले दो दर्जन सवालों की सूची तैयार की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने बताया, ‘पूरी पूछताछ प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी, उसका सत्यापित किया जाएगा और इस मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों के साक्ष्यों और बयानों से उसका मिलान किया जाएगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कथित अपराध से अर्जित धन के स्रोत और उसके प्रवाह का पता लगाने के लिए जांचकर्ता बनर्जी का सामना वित्तीय दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड तथा मामले के अन्य आरोपियों के बयानों से भी कराएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने कहा, ‘हमारा ध्यान धन के लेन-देन की पूरी कड़ियों को जोड़ने पर है। यह पता लगाया जा रहा है कि धन का प्रबंधन किसने किया, उसे विभिन्न खातों और संस्थाओं के माध्यम से कैसे अंतरित किया गया और क्या उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए लेन-देन को कई स्तरों से गुजारा गया था।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि एजेंसी पहले प्रस्तुत की गई जानकारी और तलाशी के दौरान बरामद नई सामग्री के बीच पाई गई ‘विसंगतियों’ के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक स्कूल में शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में जारी समन के अनुपालन में बनर्जी सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे कोलकाता स्थित ईडी के सीजीओ कॉम्प्लेक्स कार्यालय पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूछताछ के दौरान फॉरेंसिक विश्लेषण में चिह्नित बिचौलियों और लाभार्थी संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी सवाल किए जाएंगे। अधिकारी ने कहा, ‘हमने बैंक रिकॉर्ड और संचार संबंधी डेटा जुटाए हैं, जिनसे कई संदिग्ध लोगों की संलिप्तता के संकेत मिलते हैं। आज की पूछताछ का उद्देश्य इन तथ्यों का बनर्जी के बयान से मिलान करना है।’</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी घोटाले की जांच के सिलसिले में पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा सहित कई लोगों से पहले भी पूछताछ कर चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 13:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बागी नेताओं का एनसीपीआई में विलय हास्यास्पद: तृणकां</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: AITCofficial FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76674/merger-of-rebel-leaders-into-ncpi-is-ridiculous"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-05/tmc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता/दक्षिण भारत।</strong> तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तब और तेज़ हो गई जब तृणकां के बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' यानी एनसीपीआई में विलय करने और राजग को समर्थन देने का ऐलान किया। ममता बनर्जी के खेमे ने इस कदम को बेतुका बताया, जबकि भाजपा ने इसे तृणकां के गहरे संकट का सबूत करार दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">वरिष्ठ तृणकां सांसद सौगत रॉय ने बागी नेताओं के 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' में विलय करने के फैसले का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने इस कदम की राजनीतिक अहमियत और मतदाताओं के सामने इसे सही ठहराने की बागियों की क्षमता, दोनों पर सवाल उठाए।</p>
<p style="text-align:justify;">रॉय ने कहा, 'जिस पार्टी के चुनाव चिह्न पर आप चुने गए, उसी पार्टी से धोखा करने के बाद आप अपने मतदाताओं का सामना कैसे करेंगे? यह विलय बेतुका है। एनसीपीआई को कौन जानता है? क्या वे अपने चुनाव क्षेत्रों में जाकर लोगों को बता सकते हैं कि वे अब एनसीपीआई का हिस्सा हैं? यह विलय उन गद्दारों की हताशा को दिखाता है जो अपने भाजपा आकाओं को खुश करना चाहते हैं।'</p>
<p style="text-align:justify;">यह आरोप लगाते हुए कि इस कदम को भाजपा का परोक्ष समर्थन हासिल था, रॉय ने कहा कि बागी सांसदों ने एनसीपीआई का रास्ता इसलिए चुना क्योंकि संसदीय नियम किसी मौजूदा पार्टी के भीतर एक अलग गुट को मान्यता देने की इजाज़त नहीं देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'इसीलिए उन्होंने भाजपा के सीधे समर्थन से यह रास्ता अपनाया। यह बेतुका है। जनता का समर्थन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणकां के साथ ही रहेगा, न कि गद्दारों के साथ।'</p>
<p style="text-align:justify;">यह टिप्पणी तब आई जब तृणकां के बागी सांसदों ने एनसीपीआई के साथ विलय की घोषणा के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और सदन में बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">बागी गुट ने दावा किया कि 20 सांसदों — जो पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों की संख्या का दो-तिहाई से ज़्यादा है — ने इस कदम का समर्थन किया है और वे संसद में राजग का साथ देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने लोकसभा अध्यक्ष के सामने बागी गुट के दावे को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि संविधान और दलबदल विरोधी कानून किसी राजनीतिक पार्टी के भीतर एक अलग गुट को मान्यता देने की इजाज़त नहीं देते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 10:48:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता हुआ, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76673/peace-agreement-between-america-and-iran-trump-will-open-the"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/peace.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/दक्षिण भारत।</strong> स्विट्जरलैंड में समझौते पर आमने-सामने दस्तखत करने के बाद, अमेरिका और ईरान ने अपनी 107 दिन की लड़ाई खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य वह संकरा समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया भर की तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा ले जाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर यह घोषणा की, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव कम हुआ। अधिकारियों ने बताया कि शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। सभी को बधाई।' उन्होंने आगे कहा कि इससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा का स्वागत किया है। गुटेरेस ने इसे संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अहम कदम बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक के जारी बयान में कहा गया कि गुटेरेस ने उस घोषणा का स्वागत किया है जिसमें कहा गया है कि 'अमेरिका और ईरान एक शांति समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते में तुरंत और स्थायी युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की व्यवस्था है।'</p>
<p style="text-align:justify;">डुजारिक ने कहा, 'यह संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अहम कदम है।'</p>
<p style="text-align:justify;">महासचिव ने शांति समझौते तक पहुंचाने वाली बातचीत का समर्थन करने में पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और क्षेत्र के अन्य देशों की रचनात्मक भूमिका के लिए गहरी सराहना व्यक्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने फिर से कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक स्थायी और व्यापक शांति हासिल करने में पक्षों का समर्थन करने के लिए तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सरकारी टेलीविज़न पर समझौते की पुष्टि की, लेकिन कहा कि ईरान इसे तब तक लागू करना शुरू नहीं करेगा जब तक कि शुक्रवार को इस पर हस्ताक्षर न हो जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 09:42:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैसे सुधरेगी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता?</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे शिक्षक देश का भविष्य उज्ज्वल बनाते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76672/how-will-the-quality-of-government-schools-improve"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/school.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकारी शिक्षकों के कोचिंग और निजी ट्यूशन पढ़ाने पर रोक लगाने संबंधी जो फैसला लिया, वह सराहनीय है। अन्य राज्य सरकारों को भी ऐसा फैसला लेना चाहिए। सभी सरकारी शिक्षक कोचिंग और निजी ट्यूशन नहीं पढ़ाते, लेकिन कई शिक्षक ऐसा करते हैं। वे स्कूल में पूर्ण मनोयोग से अपना कर्तव्य नहीं निभाते हैं। जैसे ही स्कूल की छुट्टी होती है, वे अपनी दूसरी पारी की तैयारी में जुट जाते हैं। वहां दर्जनों बच्चे आते हैं और शिक्षक महोदय उनसे पूरा शुल्क वसूलते हैं। इस काम में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषय, जो अन्य विषयों से थोड़े मुश्किल माने जाते हैं, के शिक्षकों की भागीदारी ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि जो शिक्षक कोचिंग और निजी ट्यूशन पढ़ाते हैं, वे स्कूल में पढ़ाने में जान-बूझकर सुस्ती दिखाते हैं। जिस पाठ को समझाने में ज्यादा मेहनत करनी होती है, वे उसमें पर्याप्त ऊर्जा नहीं लगाते। उनकी यह सोच होती है कि 'यहां ज्यादा मेहनत करने से कोई फायदा नहीं है, क्योंकि सरकार वेतन तो उतना ही देगी।' यह सोच हजारों विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय है। साथ ही, अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता है। जो शिक्षक अपनी पूरी ऊर्जा कोचिंग और निजी ट्यूशन में खर्च कर देगा, वह स्कूल में क्या पढ़ाएगा? उसे स्कूल में पढ़ाने के लिए प्रेरणा कहां से मिलेगी? वह तो इस सोच के साथ अपने दिन की शुरुआत करेगा कि कोचिंग और निजी ट्यूशन का प्रचार हो, वहां ज्यादा से ज्यादा बच्चे आएं, भरपूर कमाई हो, स्कूल में पढ़ाई चौपट होती है तो होती रहे। आज सरकारी शिक्षकों का वेतन बहुत अच्छा है। अब यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि 'सरकारी शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है, लिहाजा अतिरिक्त कमाई के लिए कोचिंग और निजी ट्यूशन की छूट दे देनी चाहिए, क्योंकि ये वहां भी मेहनत करते हैं और बच्चों का भविष्य संवारते हैं।'</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारें स्कूलों की दशा सुधारने के लिए हर साल अरबों रुपए खर्च करती हैं। इसमें बड़ा खर्च सरकारी शिक्षकों के वेतन-भत्तों पर होता है। इसके बावजूद ये स्कूल वैसे नतीजे नहीं दे पा रहे हैं, जैसी इनसे उम्मीद की जाती है। बोर्ड परीक्षा के नतीजों में निजी स्कूलों का ही दबदबा रहता है, जबकि इन स्कूलों के शिक्षकों का वेतन सरकारी शिक्षकों के वेतन से काफी कम होता है। देश में ऐसे सरकारी स्कूलों की संख्या हजारों में है, जहां 20 से कम विद्यार्थी हैं। जबकि उनके आस-पास निजी स्कूलों में भीड़ उमड़ रही है। क्या इस मुद्दे पर बात नहीं करनी चाहिए? सरकारी स्कूलों के संचालन में कुछ गंभीर खामियां हैं, जिन्हें बड़े-बड़े अधिकारी और नेतागण दूर नहीं कर पा रहे हैं। वहां जवाबदेही की कमी स्पष्ट झलकती है। अगर देश के इतने संसाधन खर्च हो रहे हैं तो बेहतर नतीजे दिखने चाहिएं। इसके लिए जवाबदेही तय की जाए। सरकारी शिक्षकों के कोचिंग और निजी ट्यूशन पढ़ाने पर रोक लगाई जाए। जो शिक्षक इन गतिविधियों में लिप्त पाए जाएं, उन्हें चेतावनी दी जाए। अगर वे फिर भी न मानें तो नौकरी से बाहर कर दिए जाएं। पूरे देश में ऐसा नियम लागू किया जाए कि सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल से ही दिलाएंगे। इस नियम के दायरे में सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को भी लाया जाए। जो सरकारी शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि ऐसा करने में आनाकानी करे, उसे पद से हटा दिया जाए। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने होंगे। सिर्फ बजट बढ़ाने, बड़ी घोषणाएं कर देने से कुछ नहीं होगा। अगर भारत को विश्वगुरु बनाना है तो हमें अपने सरकारी स्कूलों को अमेरिका और चीन के सरकारी स्कूलों से बेहतर बनाना होगा। जो सरकारी शिक्षक बहुत अच्छा पढ़ाते हैं, खूब मेहनत करते हैं, उन्हें सम्मानित करना चाहिए। ऐसे शिक्षक देश का भविष्य उज्ज्वल बनाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:56:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यह नया भारत है, जो सिर्फ़ समाधानों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनमें योगदान देने वाला है: प्रधानमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @BJP4India X account
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76671/this-is-the-new-india-which-is-not-just-a"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/narendra-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नीस/दक्षिण भारत।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को फ्रांस के नीस में 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में देश एक-दूसरे के साथ व्यापार करते हैं और रणनीतिक साझेदारियां बनाते हैं। हालांकि, कुछ रिश्ते साझा हितों से कहीं आगे बढ़कर होते हैं। वे एक साझा विज़न से प्रेरित होते हैं। भारत और फ्रांस के बीच की साझेदारी इसका एक उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि यह रिश्ता आपसी जुड़ाव और भरोसे पर टिका है। इसकी खासियत है इनोवेशन और प्रेरणा, साथ ही साझा मूल्य और विज़न। इसी आधार पर, हाल के वर्षों में भारत और फ्रांस ने मिलकर नई पहल शुरू की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि हम दोनों देश हमेशा मिलकर चले हैं। इसी साल में ही भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष की शुरुआत हुई है। आज मुझे खुशी है कि भारत इनोवेट्स की शुरुआत भी हम फ्रांस के साथ कर रहे हैं। मैं अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों का इस अवसर पर यहां आने के लिए बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत में बड़े बदलाव हो रहे हैं। आज देश एक और बड़े बदलाव के लिए तैयार है— सूचना क्रांति से प्रेरित स्टार्टअप क्रांति। आज के दौर में, नए नज़रिए और समाज के भले के लिए मज़बूत संकल्प से लैस भारतीय युवा, मुश्किल चुनौतियों का सामना ऐसे नए और अनोखे समाधानों से कर रहे हैं जिनसे मानवता का भला होता है। 'भारत इनोवेट्स' एक अहम मंच के तौर पर काम करता है, जो हमारे युवा इनोवेटर्स द्वारा तैयार किए गए वर्ल्ड-क्लास समाधानों को दुनिया के सामने लाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि इस रिवॉल्यूशन में भारत का नौजवान एक नए माइंडसेट के साथ मानवता के हित में समस्याओं के समाधान ढूंढ रहा है। हमारे नौजवानों के विश्व-स्तरीय समाधान को वैश्विक मंच पर लाने का माध्यम ही है- भारत इनोवेट्स।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि यह इनीशिएटिव उसी दिशा में एक कदम है। भारत इनोवेट्स का यह मंच- भारत के टैलेंट और यूरोपियन कैपिटल के बीच एक ब्रिज बन रहा है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म्स जहां भारत के यंग माइंड्स को यूरोपियन एक्सपर्टीज से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। आज 21वीं सदी का भारत बदलाव के एक बहुत बड़े दौर से गुजर रहा है। आज भारत में एक स्टार्टअप क्रांति हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां इतने सारे युवा उद्यमी इकट्ठे हुए हैं। उनकी मौजूदगी में आप भारत की एक झलक देख सकते हैं— एक ऐसा भारत जो आत्मविश्वास और भरपूर ऊर्जा से भरा है। यह एक नया भारत है, जो सिर्फ़ समाधानों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनमें योगदान देने वाला है। यहां कुछ लोग एआई के ज़रिए ग्रामीण भारत की ज़िंदगी बदलने का काम कर रहे हैं, तो कुछ किसान की मदद के लिए सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।<br /> <br />प्रधानमंत्री ने कहा कि आपकी क्षमता को देखते हुए, मैं कहूंगा: भारत बड़े पैमाने पर और तेज़ी से इनोवेशन करता है। भारत एक टिकाऊ भविष्य के लिए इनोवेशन करता है, और भारत पूरी दुनिया के लिए इनोवेशन करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 16:53:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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                <title>22 लोकसभा सांसद बागी तृणकां खेमे में हैं: काकोली घोष दस्तीदार</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: KakoliGhoshDastidarMP FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76670/22-lok-sabha-mps-kakoli-ghosh-dastidar-is-in-the"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/kakoli-ghosh-dastidar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता/दक्षिण भारत। </strong>बागी तृणकां सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार को कहा कि दो और सांसद बागी गुट में शामिल होने वाले हैं, जिससे लोकसभा में इस गुट की संख्या 22 हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले कोलकाता हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए घोष दस्तीदार ने कहा कि बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलेंगे और एक अलग संसदीय गुट के तौर पर मान्यता की मांग करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">घोष दस्तीदार ने कहा, 'हम एक बैठक के लिए दिल्ली जा रहे हैं। हमारे साथ 22 सांसद हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने हमें समय दिया है। हम सोमवार को उनसे मिलेंगे और एक अलग गुट के तौर पर मान्यता की मांग करेंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि उन्होंने दो और सांसदों की पहचान का खुलासा नहीं किया, लेकिन घोष दस्तीदार ने कहा कि उनके नाम तब बताए जाएंगे जब वे औपचारिक रूप से खेमे में शामिल हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'पिछले चार-पांच सालों में पश्चिम बंगाल के हालात के खिलाफ़ जिन्होंने ईमानदारी से अपनी राय रखी है, वे हमारे संपर्क में हैं। अब हमारी संख्या 22 हो गई है।' बागी गुट के सूत्रों ने बताया कि इस समूह की बैठक, जो पहले कोलकाता में होनी थी, अब दिल्ली में होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सूत्र ने बताया कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बैठक में शामिल होने की उम्मीद थी, लेकिन दीघा-शंकरपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के एक आधिकारिक काम की वजह से उनके राष्ट्रीय राजधानी जाने की संभावना कम है।<br /> <br />पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद तृणकां में जारी उथल-पुथल के बीच यह ताज़ा दावा सामने आया है। इस हफ़्ते की शुरुआत में पार्टी के लोकसभा सांसदों के बीच फूट साफ़ तौर पर दिखाई दी, जब बागी सांसदों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपना लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 15:52:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदेश नीति के मामलों में भारतीयों की ज़िंदगी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: खरगे</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: IndianNationalCongress FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76669/lives-of-indians-cannot-be-ignored-in-matters-of-foreign"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-04/mallikarjun-kharge.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को तीन भारतीय नाविकों की हत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'चुप्पी' को लेकर उन पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस बात का कोई सबूत नहीं चाहिए कि उन्होंने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और संप्रभुता को 'कमज़ोर' किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि भारत के राष्ट्रीय हितों से रोज़ाना समझौता किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">खरगे ने एक्स पर कहा, 'ओमान में अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए भारतीय नाविकों के शव भारत पहुंच रहे हैं। ऐसे में, मैं भी देश के साथ मिलकर इन तीन भारतीय नाविकों की मौत पर शोक व्यक्त करता हूं।'</p>
<p style="text-align:justify;">खरगे ने कहा, 'इस दु:खद घटना को तीन दिन बीत चुके हैं, फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कोई सार्वजनिक बयान या शोक संदेश तक नहीं आया है। देश को इसका इंतज़ार था, मोदीजी।'</p>
<p style="text-align:justify;">खरगे ने कहा, 'आपने 'देश नहीं झुकने दूंगा' की बात कही थी, लेकिन अब इस बात का कोई सबूत नहीं चाहिए कि आपने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और संप्रभुता को कमज़ोर किया है।'</p>
<p style="text-align:justify;">खरगे ने कहा, 'भारत तब 'विश्वगुरु' हुआ करता था जब उसने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी और गुटनिरपेक्षता की नीति का पालन किया। जब पिछली सभी सरकारों ने बिना झुके इस सुसंगत नीति का पालन किया, तो दुनिया ने हमारी बात सुनी।'</p>
<p style="text-align:justify;">खरगे ने कहा, 'विदेश नीति के मामलों में भारतीयों की ज़िंदगी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में जब गंभीर सवाल बिना जवाब के हैं, तो चुप्पी जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकती। देश को स्पष्टता मिलनी चाहिए और परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:56:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होंगे: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76668/trump-will-sign-america-iran-agreement-on-sunday"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए रविवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसके तुरंत बाद रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खोल दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की ये टिप्पणियां पाकिस्तान के उस संकेत के कुछ घंटों बाद आईं, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान बातचीत के आखिरी चरण में हैं और समझौते के लिए इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह रविवार को होना है।<br /> <br />हालांकि, बताई गई समय-सीमा पर ईरान की ओर से कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, 'यह डील कल साइन होने वाली है। इसके साइन होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खुल जाएगा।' यह महीनों के टकराव और बातचीत के बाद एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी का संकेत है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर समझौता उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ तो नए हमले हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'हम ईरान और पूरे मध्य पूर्व के साथ लंबे समय तक काम करने के लिए उत्सुक हैं। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्दी, आसानी से और सुचारु रूप से पूरी हो जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमारे पास एक आखिरी विकल्प भी है, जिसका इस्तेमाल दोबारा कभी न करना पड़े, ऐसी उम्मीद है।'</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रस्तावित समझौते की तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन' से भी की।<br /> <br />'बराक हुसैन ओबामा की ईरान के साथ हुई डील, यानी जेसीपीओए, परमाणु हथियार हासिल करने का एक आसान, शानदार और सीधा रास्ता था; अगर यह डील होती, तो ईरान के पास छह साल पहले ही परमाणु हथियार आ गए होते और वह अब तक उनका इस्तेमाल भी कर चुका होता।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'ईरान के साथ मेरा समझौता बिल्कुल इसके उलट है— परमाणु हथियार न होने की पक्की गारंटी! असल में, अब वे परमाणु हथियार न तो चाहते हैं और न ही उनके पास कोई परमाणु हथियार होगा— चाहे उसे खरीदा जाए, विकसित किया जाए या किसी भी अन्य तरीके से हासिल किया जाए।'</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने आगे दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से बेअसर कर दिया गया है और कहा कि बाकी बचे परमाणु सामग्री को बाद के चरण में ठिकाने लगा दिया जाएगा।<br /> <br />उन्होंने कहा, 'सही समय आने पर, जब सब कुछ शांत होगा, तो हम अपने शानदार बी-2 बॉम्बर्स और उनके बेहतरीन पायलटों की मदद से अंदर जाकर ग्रेनाइट के विशाल डूबे हुए पहाड़ों के नीचे दबी न्यूक्लियर डस्ट को निकालेंगे और उसे ईरान या अमेरिका, कहीं भी, डाउनब्लेंड करके नष्ट कर देंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते को अगले 24 घंटों में अंतिम रूप दिया जा सकता है, क्योंकि इस्लामाबाद ने संकेत दिया था कि रविवार को एक इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह होने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">उप-प्रधानमंत्री इशाक डार और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद, शनिवार को विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में इसके संकेत मिले। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के अंतिम चरण का स्वागत किया, जिसके तहत कल (रविवार) इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह होना है। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अहम घटनाक्रम क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता लाने में योगदान देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा गया है कि सऊदी विदेश मंत्री ने पूरी प्रक्रिया के दौरान मध्यस्थता और बातचीत के समर्थन में पाकिस्तान की 'लगातार और निरंतर कोशिशों' की सराहना की। <br /> <br />दोनों नेताओं ने इस महीने के आखिर में मिस्र में होने वाली 'रीजनल फोर फॉरेन मिनिस्टर्स' (आर-4) की आगामी बैठक पर भी चर्चा की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 09:38:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान में 4 जुलाई से शुरू होंगी खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @Khamenei_fa X account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76667/khameneis-funeral-rituals-will-start-in-iran-from-july-4"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-06/khamenei1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तेहरान/दक्षिण भारत।</strong> ईरान ने इस्लामिक क्रांति के दिवंगत नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई की विदाई, अंतिम संस्कार और दफ़नाने की रस्मों की जानकारी दी है। तेहरान, क़ोम और मशहद में उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">शोक कार्यक्रमों के आयोजकों ने शनिवार को घोषणा की कि तय व्यवस्थाओं के अनुसार, आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों की विदाई, अंतिम संस्कार और दफ़नाने की रस्मों से जुड़ी जानकारी जारी कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">घोषणा के अनुसार, दिवंगत नेता और उनके परिवार के सदस्यों — डॉ. मेस्बाह अल-होदा बाघेरी कानी, सैयदा बुशरा हुसैनी खामेनेई, ज़हरा हद्दाद आदेल और ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी — के पार्थिव शरीरों के लिए विदाई समारोह शनिवार, 4 जुलाई और रविवार, 5 जुलाई (मुहर्रम की 19 और 20 तारीख) को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला (भव्य प्रार्थना हॉल) में आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी मीडिया के अनुसार, सोमवार, 6 जुलाई को, जो मुहर्रम की 21 तारीख है, तेहरान में अंतिम संस्कार का जुलूस निकाला जाएगा। मंगलवार, 7 जुलाई को, जो मुहर्रम की 22 तारीख है, पवित्र शहर क़ोम में एक और अंतिम संस्कार जुलूस का आयोजन होगा।<br /> <br />अंतिम संस्कार समारोह गुरुवार, 9 जुलाई को पवित्र शहर मशहद में आयोजित किया जाएगा। यह दिन मुहर्रम की 24 तारीख और इमाम सज्जाद की शहादत की बरसी की पूर्व संध्या है। इसके बाद इमाम रज़ा के पवित्र मज़ार पर दफ़नाने की प्रक्रिया होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 18:17:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार अवसरों को उपलब्धियों में बदलने में नाकाम रही: जेपी नड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @BJP4India X account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76666/congress-government-in-himachal-pradesh-failed-to-convert-opportunities-into"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-04/jp-nadda1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शिमला/दक्षिण भारत। </strong>केंद्र से मिली अभूतपूर्व मदद के बावजूद, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार अवसरों को उपलब्धियों में बदलने में नाकाम रही। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को यह बात कही।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि सत्ताधारी कांग्रेस विकास और सुशासन, दोनों ही मोर्चों पर नाकाम रही है और राज्य में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में मिला भारी जनसमर्थन कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता का स्पष्ट फैसला है।<br /> <br />मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तंज कसते हुए नड्डा ने कहा कि ऐसा लगता है मानो मुख्यमंत्री का पद ही 'अतिरिक्त प्रभार' के तौर पर चलाया जा रहा है और राज्य की असली बागडोर शिमला के बजाय दिल्ली से दूर से नियंत्रित की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने 'सिस्टम में बदलाव' का नारा दिया था, लेकिन आज राज्य प्रशासनिक अव्यवस्था, अनिर्णय और नीतिगत अराजकता के माहौल में घिरा हुआ है।'</p>
<p style="text-align:justify;">नड्डा ने कहा, 'देश में शायद ही कोई और ऐसा उदाहरण हो जहां मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे अहम पदों का कामकाज 'अतिरिक्त प्रभार' के आधार पर चलाया जा रहा हो।'</p>
<p style="text-align:justify;">जेपी नड्डा ने कहा कि वरिष्ठ नौकरशाहों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं और अधिकारी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। फिर भी जवाबदेही का कहीं अता-पता नहीं है।<br /> <br />नड्डा ने आरोप लगाया कि यह स्थिति कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलता और नेतृत्व संकट को उजागर करती है।<br /> <br />केंद्र की ओर से राज्य को दी गई मदद का ज़िक्र करते हुए नड्डा ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश को 2024-25 वित्तीय वर्ष में स्पेशल असिस्टेंस स्कीम, एनडीआरएफ और बाहरी मदद वाले प्रोजेक्ट्स के तहत 6,537 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता मिली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:41:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम: वायुसेना का एएन-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: IndianAirForce FB page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76665/assam-air-forces-an-32-aircraft-crashes"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2024-05/air-force.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गुवाहाटी/दक्षिण भारत।</strong> असम के जोरहाट ज़िले में शनिवार को लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एक विमान एएन-32 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना तब हुई जब विमान रोवरिया इलाके में वायुसेना के एयरबेस पर उतर रहा था। प्रवक्ता ने बताया कि वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और किसी के हताहत होने की जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, एएन-32 एक टर्बोप्रॉप, दो इंजन वाला मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है। इसने पहली बार जुलाई 1976 में उड़ान भरी थी और इसे 1977 के पेरिस एयर शो में प्रदर्शित किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">एएन-24 का एक संस्करण, जिसमें अपग्रेडेड इक्विपमेंट और ज़्यादा पावरफुल इवचेंको एआई-20 इंजन लगाए गए थे। इसे खराब मौसम में उड़ान भरने के लिए तैयार किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विमान का निर्माण साल 1980 से 2012 तक किया गया था और यह अभी भी सेवा में है। यह एंटोनोव एएन-24 परिवार का चौथा सदस्य है। इसने एएन-24, एएन-30 और एएन-26 की जगह ली और रद्द किए गए एएन-132 से पहले आया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी का तरीका इंडि गठबंधन को मज़बूत नहीं करता: पी विजयन</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: PinarayiVijayan FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76664/rahul-gandhis-style-does-not-strengthen-india-alliance-p-vijayan"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2024-12/pinarayi-vijayan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोझिकोड/दक्षिण भारत।</strong> केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पी विजयन ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक तरीका इंडि गठबंधन को मज़बूत नहीं करता और अक्सर इससे भाजपा को ही फ़ायदा पहुंचता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंडि गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी की उस कथित टिप्पणी के बारे में पूछे गए सवाल पर कि वे केरल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण विजयन को गले नहीं लगाएंगे, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि कौन किसे गले लगाता है।<br /> <br />विजयन ने कहा, 'लेकिन हम सबने राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी को गले लगाते हुए तस्वीर देखी। मेरा विरोध मोदी को गले लगाने की क्रिया से नहीं है। बल्कि उनकी बातों से एक खास राजनीतिक संदेश मिलता है। इससे राहुल गांधी का नज़रिया और इंडि गठबंधन के बारे में उनकी सोच का पता चलता है।'</p>
<p style="text-align:justify;">सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस मामले पर विस्तार से चर्चा की ज़रूरत है और वे अभी इस पर ज़्यादा बात नहीं करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इंडि गठबंधन आज एक खास मुकाम पर पहुंच गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'सिर्फ़ हम नहीं, बल्कि अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं और कांग्रेस के अलावा अन्य प्रमुख पार्टियों ने भी बैठक के दौरान आपत्ति जताई और कांग्रेस के रुख़ के ख़िलाफ़ बात की।' उन्होंने आगे कहा कि लोग देख सकते हैं कि द्रमुक अब किस स्थिति में है।</p>
<p style="text-align:justify;">विजयन ने कहा, 'मौजूदा हालात कांग्रेस के रवैए, ख़ासकर राहुल गांधी के रवैए की वजह से बने हैं। सच तो यह है कि इस रवैए से इंडि गठबंधन मज़बूत नहीं होता। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, इससे अक्सर भाजपा को ही फ़ायदा पहुंचता है। ऐसे कामों से राहुल गांधी ऐसी स्थिति बना रहे हैं जिसमें वे असल में भाजपा के हितों को ही आगे बढ़ा रहे हैं।'</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान, विजयन और राहुल गांधी दोनों ने अपने भाषणों में एक-दूसरे पर निशाना साधा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दक्षिण भारत </category>
                                            <category>केरल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:04:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प. बंगाल: पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के आवास पर छापेमारी की</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: AbhishekBanerjeeOfficial FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76663/west-bengal-police-raids-abhishek-banerjees-residence"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता/दक्षिण भारत।</strong> पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल मचाने वाले एक नाटकीय घटनाक्रम में, शनिवार तड़के पुलिस और केंद्रीय बलों की एक बड़ी टुकड़ी ने पश्चिम मेदिनीपुर ज़िले के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले के सिलसिले में तृणकां के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर छापा मारा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल सीआईडी द्वारा राज्य विधानसभा से जुड़े कथित जाली हस्ताक्षर मामले में बनर्जी से पूछताछ करने के ठीक दो दिन बाद और कई जांच एजेंसियों द्वारा उन्हें लगातार नए समन भेजे जाने के बीच हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी पुलिस स्टेशन और कोलकाता पुलिस के अधिकारियों समेत पुलिस की टीमें तड़के 3 बजे के कुछ ही देर बाद बनर्जी के पटुआपाड़ा स्थित आवास के बाहर पहुंचीं।<br /> <br />केंद्रीय बल के जवानों ने परिसर के बाहर मोर्चा संभाला, जबकि पुलिस अधिकारियों ने घर में घुसने की कोशिश की। तृणकां ने आरोप लगाया कि पुलिस टीमों ने ताला तोड़कर बनर्जी के परिसर में प्रवेश किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की अचानक कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणकां प्रमुख ममता बनर्जी तुरंत अभिषेक के घर पहुंचीं। </p>
<p style="text-align:justify;">यह ऑपरेशन चार घंटे से ज़्यादा समय तक चला और पुलिसकर्मी सुबह भी परिसर के अंदर ही मौजूद रहे। आज सुबह कई अधिकारियों को बनर्जी के घर से बाहर आते और घर में दोबारा जाने से पहले बाहर बातचीत करते देखा गया। </p>
<p style="text-align:justify;">घर से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ताला तोड़कर पूरे घर की तलाशी ली। हालांकि, अधिकारियों ने तुरंत यह साफ़ नहीं किया कि यह ऑपरेशन किस खास मामले के सिलसिले में चलाया गया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 10:13:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह कैसी कॉमेडी?</title>
                                    <description><![CDATA[किसी जटिल मुद्दे को कॉमेडियन बड़ी आसानी से समझा सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76662/what-kind-of-comedy-is-this"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/comedy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता परोसने का ऐसा सिलसिला चल पड़ा है, जिस पर सरकार को सख्ती दिखानी चाहिए। लोगों को हंसाने, उन्हें बेहतर महसूस कराने, खुशी का माहौल बनाने के लिए अभद्र और आपत्तिजनक शब्द बोलने जरूरी नहीं हैं। अगर किसी कलाकार के पास लोगों को हंसाने का हुनर है तो वह शालीन शब्दों के जरिए भी ऐसा कर सकता है। गलत शब्द बोलकर तालियां बटोरने की हरकत इस बात का प्रमाण है कि वह शख्स कोई कलाकार नहीं है। अक्सर उनके पक्ष में यह कुतर्क दिया जाता है कि उन्हें बहुत लोग सुनते हैं, इसलिए आपत्ति नहीं जतानी चाहिए। लोगों को बुराई जल्दी आकर्षित करती है, इसलिए अभद्र कॉमेडी जल्दी मशहूर होती है। सोशल मीडिया ने ऐसे कथित स्टैंड-अप कॉमेडियन को कुछ ज्यादा ही 'महान' बना दिया है, जो द्विअर्थी संवाद बोलकर, अश्लीलता का रंग घोलकर लोगों को हंसाने की कोशिश करते हैं। उनके वीडियो बहुत वायरल होते हैं। इससे अन्य कॉमेडियन, जो रातोंरात मशहूर होना चाहते हैं, प्रेरणा लेते हैं और आपत्तिजनक शब्दों की बौछार शुरू कर देते हैं। अब तो इन लोगों ने अश्लीलता को जल्दी मशहूर होने का संक्षिप्त सूत्र मान लिया है। जो व्यक्ति सोशल मीडिया पर आपत्ति जताता है, उसे इनके प्रशंसक यह कहकर चुप रहने की हिदायत देते हैं कि 'आपको यह सब पसंद नहीं है तो न देखें, हमें पसंद है, इसलिए हम देखेंगे।' क्या किसी गलत बात को इस आधार पर बढ़ावा देना सही है, क्योंकि उसे बड़ी संख्या में लोग पसंद करने लगे हैं? यह बहुत खतरनाक चलन है, जिसे रोका जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन्हें यह लगता है कि अभद्र और आपत्तिजनक शब्दों के बिना किसी को हंसाया ही नहीं जा सकता, उन्हें जसपाल भट्टी के 'फ्लॉप शो' और 'फुल टेंशन' जैसे शो जरूर देखने चाहिएं। ये नब्बे के दशक में इतने मशहूर हुए थे कि इन्होंने प्रसिद्धि के नए रिकॉर्ड बना दिए थे। आज भी ये यूट्यूब पर खूब देखे जाते हैं। इन्होंने साबित किया कि मर्यादित शब्दों, मर्यादित वेशभूषा और मर्यादित दृश्यों के साथ भरपूर हास्य उत्पन्न किया जा सकता है। जनता में ऐसे शो ज्यादा पसंद किए जाते हैं, क्योंकि लोग उन्हें अपने परिवार के साथ देख सकते हैं। वे सोशल मीडिया पर बेझिझक शेयर किए जा सकते हैं। इसलिए देश में अच्छे शो के देखे जाने की संभावना आज भी बहुत ज्यादा है। क्या वर्तमान कॉमेडियन ऐसे शो बना सकते हैं? कॉमेडी में आपत्तिजनक शब्दों का तड़का लगाने के पीछे, कुछ लोगों द्वारा एक वजह यह बताई जाती है कि 'इससे ऐसा लगता है कि कॉमेडियन आधुनिक सोच वाला इन्सान है।' ऐसा सोचना ही पूरी तरह गलत है। आधुनिकता का संबंध नई और अच्छी सोच से होता है। मर्यादाहीन और ओछी हरकतें करने से कोई आधुनिक नहीं बन जाता है। कोई कॉमेडियन आधुनिक कहलाना चाहता है तो उसे सबसे पहले अपने शो में ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए, जहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी लोग बैठ सकें और सहज होकर हास्य का आनंद ले सकें। सिर्फ हंसा देना और तालियां बटोर लेना काफी नहीं है। कॉमेडियन को देश-दुनिया की विभिन्न समस्याओं का अपनी कला के जरिए समाधान पेश करना चाहिए। इससे लोग जागरूक होंगे। यह हकीकत है कि किसी जटिल मुद्दे को कॉमेडियन बड़ी आसानी से समझा सकता है। आज पर्यावरण प्रदूषण, नशाखोरी, साइबर अपराध जैसी बुराइयों का बोलबाला है। अगर कॉमेडियन मर्यादा में रहते हुए इन पर अपने तीखे शब्दबाण छोड़ें, राष्ट्रीय एकता का संदेश दें तो बहुत बड़ा सुधार हो सकता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 09:20:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान के साथ युद्ध खत्म, सप्ताहांत तक शांति समझौता होगा: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76661/trump-will-end-the-war-with-iran-and-reach-a"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-01/donald-trump2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/दक्षिण भारत। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता लगभग पूरा हो चुका है और उम्मीद है कि इस सप्ताहांत यूरोप में इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने ईरान के तेल उद्योग पर कब्ज़ा करने की धमकी देने के कुछ ही घंटों बाद उस देश पर सैन्य हमले का फ़ैसला रद्द कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस साइनिंग सेरेमनी में शामिल होंगे, जो इस वीकेंड यूरोप में हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने बातचीत के ताज़ा दौर के बारे में कतर, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान समेत मध्य-पूर्व के देशों के नेताओं से बात की है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'हमने अभी-अभी ईरान के साथ युद्ध को लेकर एक बढ़िया समझौता किया है। दस्तावेज़ लगभग तैयार हैं, तो देखते हैं। यह काम काफ़ी तेज़ी से हो जाना चाहिए।'</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित समझौता तीन महीने से चल रहे उस संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों में सबसे बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी, जिसमें हज़ारों लोग मारे गए हैं और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर बुरा असर पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता लगभग पूरा हो चुका है और इस पर यूरोप में इसी सप्ताहांत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि तेहरान ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित समझौते पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप का यह ऐलान ईरान पर तय सैन्य हमले को रद्द करने के कुछ घंटों बाद आया। उन्होंने ईरान पर बहुत ज़ोरदार हमला करने और उसके मुख्य तेल एक्सपोर्ट हब, खर्ग आइलैंड पर कब्ज़ा करने की अपनी पहले की धमकी को वापस ले लिया। </p>
<p style="text-align:justify;">जॉर्जिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर बर्ट जोन्स के समर्थन में हुई एक टेली-रैली में ट्रंप ने और आगे बढ़कर यह घोषणा कर दी कि यह टकराव असल में खत्म हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि आपने सुना या नहीं, लेकिन हमने आज (गुरुवार) ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है, और वे कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गए हैं - जिस बात पर हमने ज़ोर दिया था। यही तो हमारा मकसद था।'</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने फिर दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना तेहरान के खिलाफ वॉशिंगटन के अभियान का मुख्य मकसद था।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार नहीं खरीदेंगे और न ही विकसित करेंगे। उनके पास परमाणु हथियार नहीं होगा।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:55:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर अशोक ने शिवकुमार को 'ताकतवर लॉबी, ठेकेदारों और कचरा माफिया का कमीशन एजेंट' बताया</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: RAshokaBJP FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76660/r-ashok-called-shivkumar-a-commission-agent-of-powerful-lobby"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/r-ashoka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलूरु/दक्षिण भारत। </strong>कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधते हुए, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शुक्रवार को उन्हें 'ताकतवर लॉबी, ठेकेदारों और कचरा माफिया का कमीशन एजेंट' बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा नेता, शिवकुमार के उस आरोप का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि बेंगलूरु में कथित '39,000 करोड़ रुपए के कचरा प्रोसेसिंग घोटाले' में सत्ताधारी कांग्रेस पर 10,000 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाकर अशोक 'कचरा माफिया' के एजेंट की तरह बात कर रहे थे।<br /> <br />विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि अगर उनमें ज़रा भी पारदर्शिता बची है, तो वे कचरा टेंडर विवाद की जांच के लिए बनाई गई हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट जारी करें।</p>
<p style="text-align:justify;">अशोक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, 'डीके शिवकुमार, हां, मैं एक एजेंट के तौर पर बात कर रहा हूं। लेकिन आपकी तरह, मैं ताकतवर लॉबी, ठेकेदारों या कचरा माफिया का कमीशन एजेंट नहीं हूं। मैं जनता का एजेंट हूं – 7.5 करोड़ कन्नड़िगा और बेंगलूरु के 1.5 करोड़ नागरिकों की आवाज़, जिन्हें आपकी सरकार के भ्रष्टाचार, अक्षमता और कुशासन की कीमत चुकानी पड़ रही है।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'विपक्ष के नेता के तौर पर घोटालों का पर्दाफ़ाश करना, संदिग्ध टेंडरों पर सवाल उठाना और सरकार को जवाबदेह ठहराना कोई विशेषाधिकार नहीं है – यह मेरा संवैधानिक कर्तव्य है। ऐसा करने के लिए मुझे किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं है।'</p>
<p style="text-align:justify;">अशोक ने कहा कि सालों की लॉबिंग, गुज़ारिश और कांग्रेस आलाकमान के दरवाज़े पर इंतज़ार करने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने पर, यह एहसास होना निराशाजनक हो सकता है कि कर्नाटक की जनता उन्हें 'हनीमून पीरियड' (शुरुआती राहत का समय) भी देने को तैयार नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने शिवकुमार से कहा, 'लेकिन विपक्ष पर उंगली उठाने से पहले शायद आपको अपनी पार्टी के भीतर देखना चाहिए। जब ​​आपके अपने विधायक खुलकर असंतोष ज़ाहिर करते हैं, शिकायतें लेकर दिल्ली भागते हैं और सार्वजनिक रूप से आपके नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं, तो साफ़ है कि समस्या विपक्ष की नहीं है।'<br /> <br />विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री के उस दावे को कर्नाटक में हाल के समय का सबसे बड़ा राजनीतिक मज़ाक बताया, जिसमें कहा गया था कि विपक्ष, सरकार की पारदर्शिता और कामकाज को बर्दाश्त नहीं कर सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दक्षिण भारत </category>
                                            <category>कर्नाटक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:09:16 +0530</pubDate>
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